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क्या भाइयों या सहकर्मियों से हमेशा टकराव रहता है? जानिए ज्योतिष क्या कहता है
अप्रैल 18, 2025
क्या आपके भाई-बहनों से अक्सर बहस होती है? या ऑफिस में सहकर्मियों से बात-बात पर टकराव हो जाता है?
अगर हाँ, तो आपकी कुंडली के मंगल, बुध और तीसरे भाव में कुछ असंतुलन हो सकता है।
तीसरा भाव भाई-बहनों, साहस और रोज़मर्रा के संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है। अगर इस भाव पर शनि, राहु या केतु का प्रभाव हो, या इसका स्वामी अशुभ हो, तो रिश्तों में दूरियाँ, अहम की लड़ाई या बार-बार गलतफहमियाँ होती हैं।
मंगल अगर तीसरे भाव में हो या उसे दृष्टि दे रहा हो, तो यह व्यक्ति को झगड़ालू, गुस्सैल या कंट्रोलिंग बना सकता है, जिससे ऑफिस में भी क्लेश होता है।
अगर बुध कमजोर हो या राहु/केतु से ग्रस्त हो, तो आपकी बातों का लहजा कड़वा या ताना मारने जैसा हो सकता है—जिससे संबंध और बिगड़ते हैं।
✅ रिश्तों में शांति लाने के ज्योतिषीय उपाय:
- रोज़ “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- बुधवार को गाय को हरी घास खिलाएं।
- मंगलवार को मसूर दाल या लाल कपड़ा दान करें।
- भाई-बहनों या बच्चों को किताबें या खिलौने दान करें।
- अपनी वाणी पर संयम रखें – ग्रह शांति के साथ व्यवहार भी जरूरी है।
आपके बोल और ऊर्जा ही आपके ग्रह हैं—उन्हें सहेजिए, रिश्ते भी संवरेंगे।