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देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी)

मई 21, 2025

📅 तिथि और शुभ मुहूर्त

  • पर्व तिथि: शनिवार, 1 नवम्बर 2025
  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 31 अक्टूबर को रात 9:01 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 1 नवम्बर को शाम 6:43 बजे
  • पारण मुहूर्त: 2 नवम्बर को सुबह 6:34 बजे के बाद और 8:49 बजे से पहले

(समय दिल्ली के अनुसार है; कृपया अपने स्थान का पंचांग अवश्य देखें।)


🌟 देवउठनी एकादशी का महत्व

देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी या देवुत्थान एकादशी भी कहा जाता है, उस दिन को दर्शाती है जब भगवान विष्णु चातुर्मास की योगनिद्रा से जागते हैं। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि अब से शुभ कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि की शुरुआत हो सकती है।

यह एक तरह से नए शुभ समय की शुरुआत और विष्णु जी की कृपा का पुनः सक्रिय होना माना जाता है।


🛐 पूजा विधि और परंपराएं

🔅 सुबह की तैयारी

  • व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, घर की सफाई करें
  • भगवान विष्णु की चरण पादुका (चरण चिन्ह) घर के बाहर या पूजन स्थल पर बनाएं

🔅 मुख्य पूजन विधि

  • तुलसी जी को सजाएं, शालिग्राम या भगवान विष्णु की मूर्ति के साथ पूजा करें
  • भोग में पंचामृत, फल, पीले फूल, मिष्ठान्न अर्पित करें
  • ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें, या विष्णु सहस्रनाम पढ़ें
  • शाम को दीपदान करें – घर के बाहर दीपक जलाएं

🔅 तुलसी विवाह (वैकल्पिक)

  • कई जगहों पर आज या अगले दिन तुलसी विवाह का आयोजन होता है
  • तुलसी जी और शालिग्राम का विवाह प्रतीकात्मक रूप से किया जाता है
  • इससे विवाह मुहूर्त का प्रारंभ माना जाता है

🌿 व्रत नियम

  • अनाज, चावल, दाल और सामान्य नमक से परहेज़ करें
  • व्रती दिनभर केवल फल, दूध, या व्रत भोजन से रह सकते हैं
  • व्रत अगले दिन पारण (सही समय पर) करने के बाद समाप्त किया जाता है

🧿 आध्यात्मिक लाभ

  • भगवान विष्णु की कृपा और पुण्य की प्राप्ति
  • चातुर्मास का अंत, यानी अब शुभ कार्य दोबारा शुरू हो सकते हैं
  • मन और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शुद्धता आती है

🙋‍♂️ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. देवउठनी एकादशी क्यों खास मानी जाती है?
यह भगवान विष्णु के नींद से जागने का दिन है। अब से सभी शुभ कार्य फिर से शुरू किए जा सकते हैं।

Q2. क्या इस दिन के बाद विवाह करना शुभ है?
हां, देवउठनी एकादशी के बाद विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।

Q3. क्या तुलसी विवाह जरूरी है?
जरूरी नहीं, लेकिन जो तुलसी विवाह करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य और परिवार में सुख-शांति की प्राप्ति मानी जाती है।


📝 निष्कर्ष

देवउठनी एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं — यह नई ऊर्जा, नए शुभ समय और भगवान विष्णु की सक्रिय कृपा का दिन है।
इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी माता की पूजा करने से धन, शांति और समृद्धि का मार्ग खुलता है।