क्या आपको बिना वजह डर या चिंता सताती है?
क्या आप फोबिया, अजीब सपने या ऐसा डर महसूस करते हैं जिसका कोई तर्क नहीं है?
ज्योतिष के अनुसार, ऐसे अनुभवों का संबंध होता है केतु ग्रह से—जो बीते जन्मों के कर्म, अवचेतन की स्मृतियाँ और वियोग की भावना का प्रतिनिधित्व करता है।
- जब केतु चतुर्थ, अष्टम या द्वादश भाव में होता है, तो व्यक्ति को भीतर से डर, अनजानी बेचैनी या भावनात्मक अलगाव का अनुभव हो सकता है।
- ये डर केवल इस जन्म के नहीं होते—बल्कि आत्मा के पिछले सफर से जुड़े अधूरे कर्मों के संकेत होते हैं।
✅ भीतर की शांति के लिए उपाय:
- रोज़ सूर्यास्त के बाद “ॐ केतवे नमः” मंत्र का जाप करें।
- सोते समय तकिए के नीचे चांदी का सिक्का रखें।
- बिस्तर के पास कपूर की कटोरी रखें—यह ऊर्जाओं को शुद्ध करता है।
- शनिवार को काले तिल या कंबल का दान करें।
- नियमित श्वास ध्यान और क्षमा प्रार्थना करें—यह डर को मुक्त करता है।
जब केतु संतुलित होता है, तब बीते जन्मों का बोझ हल्का होकर शांति में बदल जाता है।