क्या आपको लगता है कि दुनियावी चीज़ों से मन हट गया है?
चाहे पैसे हों, रिश्ते हों या सुविधाएं—कुछ भी आकर्षक नहीं लगता?
ज्योतिष के अनुसार, ऐसा भाव तब आता है जब केतु ग्रह कुंडली में प्रभावी होता है।
केतु त्याग, वैराग्य और आत्मिक मुक्ति का प्रतिनिधि है।
- अगर केतु द्वितीय (धन), चतुर्थ (सुख) या पंचम (संतान/आनंद) भाव में हो, तो व्यक्ति को सांसारिक सुखों से विरक्ति होने लगती है।
- केतु व्यक्ति को बाहरी दुनिया से काटकर भीतर की यात्रा पर ले जाना चाहता है।
- यह स्थिति कभी-कभी शून्यता जैसी लग सकती है, लेकिन यह आत्मा की गहराई में जाने का संकेत है।
✅ आध्यात्मिक संतुलन के ज्योतिषीय उपाय:
- रोज़ “ॐ केतवे नमः” मंत्र का जाप करें (मंगल या शनिवार को विशेष प्रभावी)।
- प्रकृति में अकेले समय बिताएं या कुछ समय मौन रहें।
- बाएँ हाथ में चांदी की अंगूठी पहनें।
- ध्यान करते समय रुद्राक्ष माला पहनें या पास रखें।
- दूसरों से तुलना न करें—केतु का रास्ता भीतर का होता है।
जब केतु संतुलन में आता है, तो वैराग्य भी ज्ञान का स्रोत बन जाता है।