क्या आपको ध्यान, मोक्ष या आत्मज्ञान की तरफ गहरी खिंचाव महसूस होता है?
लेकिन साथ ही, क्या दैनिक जीवन की जिम्मेदारियाँ भारी लगती हैं?
ज्योतिष के अनुसार, यह स्थिति तब आती है जब केतु ग्रह सक्रिय या अशांत होता है—जो वैराग्य और आत्मिक ज्ञान का प्रतीक है।
- जब केतु लग्न, चतुर्थ, नवम या द्वादश भाव में हो, तो व्यक्ति दुनियावी जीवन से कटने की भावना रखता है।
- ये लोग गहरी सोच और आत्मा से जुड़ी खोज में होते हैं, लेकिन रोज़मर्रा के कार्यों में स्थिर नहीं रह पाते।
- केतु मुक्ति की ओर ले जाता है—पर ज़मीन से जुड़कर चलना ही संतुलन है।
✅ आध्यात्मिक स्थिरता के उपाय:
- “ॐ केतवे नमः” मंत्र का जाप सुबह या सूर्यास्त के समय करें।
- रोज़ कुछ समय घास पर नंगे पाँव चलें।
- पास में चांदी की अंगूठी या रुद्राक्ष रखें।
- शनिवार को धूपबत्ती या आध्यात्मिक पुस्तकें दान करें।
- सरल दिनचर्या अपनाएं—यही स्थिरता और शांति का आधार है।
जब केतु संतुलन में होता है, तब आत्मा उड़ान भरती है लेकिन शरीर ज़मीन पर रहता है।