क्या आपको बार-बार त्वचा से जुड़ी समस्याएं, एलर्जी, या संक्रमण होते हैं?
क्या इलाज के बावजूद आराम सिर्फ कुछ समय तक ही रहता है?
ज्योतिष के अनुसार, इसका संबंध होता है केतु ग्रह से—जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली, त्वचा और छुपे रोगों से जुड़ा होता है।
- अगर केतु छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो यह शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकता है, जिससे एलर्जी, स्किन रैशेज या संक्रमण बार-बार हो सकते हैं।
- केतु ऐसे रोग देता है जिनका ठोस कारण पकड़ में नहीं आता—ये रोग अक्सर कर्मजन्य और ऊर्जा स्तर के असंतुलन से जुड़े होते हैं।
- यह शरीर में चल रही आंतरिक शुद्धि का संकेत भी हो सकता है।
✅ त्वचा और रोग प्रतिरोधक क्षमता के उपाय:
- रोज़ सोने से पहले “ॐ केतवे नमः” मंत्र का जाप करें।
- त्वचा पर चंदन या हल्दी का प्रयोग करें (अगर एलर्जी न हो)।
- चांदी के बर्तन में पानी पिएं—यह केतु को शांत करता है।
- शनिवार को नीम का तेल या आयुर्वेदिक दवाएं दान करें।
- चाँदनी में बैठें (moon bathing)—यह ठंडी और संतुलित ऊर्जा देती है।
जब केतु शांत होता है, तब शरीर की सूक्ष्म पीड़ाएं भी धीरे-धीरे ठीक होने लगती हैं।