क्या आपको लगता है कि आप वास्तविकता और कल्पना में फर्क नहीं कर पा रहे?
क्या मन बार-बार भ्रमित, अस्थिर या ओवरथिंकिंग से ग्रस्त हो जाता है?
ज्योतिष के अनुसार, इसका कारण हो सकता है राहु का अत्यधिक या अशुभ प्रभाव।
- जब राहु लग्न, पंचम, छठे, अष्टम या द्वादश भाव में हो या उन्हें देख रहा हो, तो व्यक्ति में भ्रम, डर और असत्य विश्वास की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।
- राहु आपको मायाजाल में फँसाता है—जहाँ सच और झूठ में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।
- व्यक्ति कभी-कभी अपने ही बनाए भ्रम में जीने लगता है।
✅ मानसिक स्पष्टता के लिए उपाय:
- रोज़ शाम को “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र का जाप करें।
- “सो हम” या “ॐ नमः शिवाय” जैसे ग्राउंडिंग मंत्रों से ध्यान करें।
- घर में कपूर का दीपक जलाएं—यह वातावरण और मन को शुद्ध करता है।
- राहुकाल में निर्णय न लें।
- अपने पास चांदी का सिक्का या अंगूठी रखें—यह राहु को स्थिर करता है।
जब राहु संतुलित होता है, तो भ्रम मिटता है और सच्चाई उजागर होती है।