📅 तिथि और शुभ मुहूर्त
- पर्व तिथि: शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 19 दिसंबर 2025 को सुबह 4:59 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 20 दिसंबर 2025 को सुबह 7:12 बजे
(समय दिल्ली के अनुसार है; कृपया अपने स्थान के पंचांग से समय की पुष्टि करें।)
🌟 हनुमान जयंती का महत्व
हनुमान जयंती, जिसे तमिलनाडु में हनुमथ जयंती कहा जाता है, भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को मनाया जाता है, जब मूल नक्षत्र का योग होता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था।
भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति, साहस और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा से शनि दोष, भूत-प्रेत बाधा और सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।
🛐 पूजा विधि और परंपराएं
🔹 व्रत और उपवास
- भक्तगण इस दिन फलाहार या निर्जला व्रत रखते हैं।
- दिनभर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और रामायण का पाठ करते हैं।
🔹 मंदिर दर्शन और भजन
- अंजनियार मंदिरों में विशेष पूजा, कीर्तन और भजन संध्या का आयोजन होता है।
- विशेष रूप से चेन्नई के नंगनल्लूर अंजनेयार मंदिर, लूज अंजनेयार मंदिर और आलमेलुमंगापुरम अंजनेयार मंदिर में भव्य उत्सव मनाए जाते हैं।
🔹 दान और सेवा
- इस दिन गरीबों को भोजन कराना, वस्त्र और अन्न का दान करना विशेष पुण्यदायी माना गया है।
🌍 तमिलनाडु में उत्सव
- चेन्नई के प्रमुख अंजनेयार मंदिरों में लाखों भक्त इस दिन दर्शन के लिए उमड़ते हैं।
- मंदिरों में विशेष रथ यात्रा, दीपमाला, और भगवद कथा का आयोजन होता है।
- नंगनल्लूर अंजनेयार मंदिर में 32 फीट ऊँची हनुमान प्रतिमा के दर्शन का विशेष महत्व है।
🙋♂️ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. तमिलनाडु में हनुमान जयंती कब मनाई जाती है?
तमिलनाडु में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को मनाई जाती है, जो 2025 में 19 दिसंबर (शुक्रवार) को है।
Q2. क्या इस दिन व्रत रखना आवश्यक है?
व्रत रखना लाभकारी है, लेकिन यदि संभव न हो, तो स्नान कर भगवान हनुमान का नाम जपें, तुलसी पत्र अर्पित करें, हनुमान चालीसा का पाठ करें, और दान अवश्य करें।
Q3. क्या इस दिन विशेष मंदिरों में दर्शन का महत्व है?
हाँ, नंगनल्लूर अंजनेयार मंदिर, लूज अंजनेयार मंदिर, और आलमेलुमंगापुरम अंजनेयार मंदिर में विशेष पूजा और उत्सव का आयोजन होता है।
📝 निष्कर्ष
हनुमान जयंती केवल एक पर्व नहीं — यह आत्मा को शुद्ध करने, पापों से मुक्त होने, और परम शांति की ओर अग्रसर होने का दिव्य अवसर है।
इस दिन की गई पूजा और सेवा का फल सहस्त्रों एकादशियों के बराबर माना गया है।
प्रभु हनुमान की कृपा से आपका जीवन सत्कर्म, भक्ति और शांति से भर जाए।