क्या आप अनियमित पीरियड्स, पीसीओएस, संतान संबंधित समस्याओं या हार्मोनल असंतुलन से परेशान हैं?
क्या इलाज के बावजूद समस्याएं बार-बार लौटती हैं?
ज्योतिष के अनुसार, इन समस्याओं का संबंध होता है शुक्र, चंद्रमा, और पंचम व अष्टम भाव से।
- शुक्र गर्भाशय, प्रजनन शक्ति और हार्मोन संतुलन का कारक है। अगर शुक्र नीच का हो या राहु/शनि से पीड़ित हो, तो गर्भ संबंधी या स्त्री रोग हो सकते हैं।
- चंद्रमा शरीर के हार्मोनल चक्र और भावनात्मक स्थिति को नियंत्रित करता है। कमजोर चंद्रमा मूड स्विंग और चक्र असंतुलन ला सकता है।
- पंचम भाव संतान और अष्टम भाव गुप्त रोगों से जुड़ा होता है—इनका प्रभाव भी महत्वपूर्ण है।
✅ प्रजनन स्वास्थ्य के ज्योतिषीय उपाय:
- “ॐ शुक्राय नमः” और “ॐ चंद्राय नमः” का जाप करें।
- तेज़ रोशनी, रात जागना और जंक फूड से बचें।
- शुक्रवार और सोमवार को साफ़ सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें।
- दूध, दही या चावल कन्याओं या ज़रूरतमंद महिलाओं को दान करें।
- नियमित सौम्य योग और प्राणायाम करें—विशेष रूप से कूल्हों और गर्भाशय क्षेत्र को सक्रिय करने वाले आसन।
जब शुक्र और चंद्रमा संतुलन में होते हैं, तब शरीर भी सहज और स्वस्थ हो जाता है।