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करवा चौथ

मई 21, 2025

📅 तिथि और शुभ मुहूर्त

  • व्रत तिथि: 10 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार)
  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 9 अक्टूबर 2025 को रात 10:54 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 10 अक्टूबर 2025 को शाम 7:38 बजे
  • पूजा मुहूर्त: शाम 6:19 बजे से 7:32 बजे तक
  • चंद्रोदय (दिल्ली): रात 8:47 बजे
    (समय दिल्ली के अनुसार है; कृपया अपने स्थान का पंचांग अवश्य देखें।)

🌟 पर्व का महत्व

करवा चौथ विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला एक विशेष व्रत है। यह व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलती हैं।


🛐 पूजा विधि और परंपराएं

🔅 सरगी

  • व्रत से पहले सुबह सूर्योदय से पहले सरगी का सेवन किया जाता है, जो सास द्वारा बहू को दिया जाता है। इसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे आदि शामिल होते हैं।

🔅 व्रत और पूजा

  • महिलाएं दिन भर निर्जला व्रत रखती हैं।
  • शाम को करवा चौथ की कथा सुनती हैं और करवा (मिट्टी का पात्र) की पूजा करती हैं।
  • पूजा में मां पार्वती, भगवान शिव, गणेश जी और करवा माता की आराधना की जाती है।

🔅 चंद्रमा को अर्घ्य

  • चंद्रमा के दर्शन के बाद, महिलाएं चलनी से चंद्रमा को देखकर अर्घ्य देती हैं।
  • इसके बाद पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलती हैं।

🎉 सांस्कृतिक महत्व

  • उत्तर भारत में यह पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है, खासकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में।
  • यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।

🧿 आध्यात्मिक लाभ

  • पति की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना।
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम और समर्पण की भावना को मजबूत करना।
  • आत्म-नियंत्रण और संयम का अभ्यास।

🙋‍♂️ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र1. क्या अविवाहित लड़कियां भी करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?
हां, कई अविवाहित लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।

प्र2. व्रत के दौरान क्या पूरी तरह से पानी भी नहीं पी सकते?
जी हां, यह व्रत निर्जला होता है, जिसमें सूर्योदय से चंद्रोदय तक कुछ भी खाना-पीना वर्जित होता है।

प्र3. अगर स्वास्थ्य कारणों से व्रत पूरा न कर सकें तो क्या करें?
स्वास्थ्य सर्वोपरि है। यदि आवश्यक हो, तो फलाहार या जल ग्रहण करके भी व्रत की भावना को बनाए रखा जा सकता है।


📝 निष्कर्ष

करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है। यह दिन पति-पत्नी के रिश्ते को और मजबूत बनाता है और वैवाहिक जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है।