SwarnSiddhi
Login Join for Free
Back to Blog

प्रदोष व्रत

मई 19, 2025

📅 तिथि और प्रदोष काल

  • तिथि: 20 अगस्त 2025 (बुधवार)
  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 20 अगस्त को दोपहर 1:58 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 21 अगस्त को दोपहर 12:44 बजे
  • प्रदोष काल (पूजन का शुभ समय): 20 अगस्त को शाम 6:56 बजे से रात 9:07 बजे तक

🌟 महत्व

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण उपवास है, जो हर पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन शिवजी की आराधना करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। बुधवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत "बुध प्रदोष" कहलाता है, जो विशेष रूप से बुद्धि और स्वास्थ्य में वृद्धि के लिए लाभकारी माना जाता है।([upcharnuskhe.com][1])


🛐 पूजा विधि

  1. स्नान और संकल्प: प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  2. पूजा की तैयारी: शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. पूजन सामग्री: बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, धूप, दीपक, फल, मिठाई आदि अर्पित करें।
  4. मंत्र जाप: "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या शिव पुराण का पाठ करें।
  5. आरती और प्रसाद: पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद वितरण करें।([upcharnuskhe.com][1], [MP Breaking News][2])

🤲 व्रत के लाभ

  • पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति।
  • मानसिक शांति और आत्मिक बल में वृद्धि।
  • परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास।
  • बुधवार को व्रत रखने से बुद्धि और स्वास्थ्य में सुधार होता है।