वैदिक ज्योतिष में कुंडली के 12 भाव

भाव बताता है कि कुंडली में कोई विषय कहाँ सक्रिय होता है। लग्न से गिनें, फिर राशि, उसके स्वामी, स्थित ग्रह, दृष्टि और प्राकृतिक कारक को साथ पढ़ें—किसी एक भाव को अकेले नहीं।

सभी भाव देखें

लग्न · स्वयं

स्वयं, शारीरिक शरीर, रूप, स्वास्थ्य, स्वभाव, अहंकार, जीवन की दिशा

धन · संपत्ति

धन, संचित संपत्ति, परिवार, वाणी, प्रारंभिक शिक्षा, खान-पान की आदतें

सुख · घर

माता, घर, संपत्ति, वाहन, आंतरिक शांति, मातृभूमि, प्राथमिक शिक्षा

पुत्र · बुद्धि

संतान, बुद्धि, रोमांस, रचनात्मकता, सट्टा, पूर्व जन्म के कर्म (पूर्व पुण्य)

अरि · सेवा

शत्रु, ऋण, रोग, मुकदमेबाजी, दैनिक कार्य, मामा, पालतू जानवर

युवति · साझेदारी

जीवनसाथी, विवाह, व्यापारिक साझेदारी, सार्वजनिक छवि, खुले शत्रु, विदेश यात्रा

रंध्र · परिवर्तन

आयु, अचानक घटनाएं, मृत्यु, परिवर्तन, गुप्त विद्या, विरासत, बिना कमाया धन

धर्म · भाग्य

धर्म, भाग्य, पिता, गुरु, उच्च शिक्षा, लंबी यात्राएं

कर्म · करियर

पेशा, करियर, स्थिति, अधिकार, प्रसिद्धि, सरकार, सार्वजनिक जीवन

लाभ · आय

लाभ, आय, इच्छाओं की पूर्ति, बड़े भाई-बहन, सामाजिक नेटवर्क, मित्र

व्यय · मोक्ष

हानि, व्यय, विदेश में बसना, अस्पताल, जेल, मोक्ष, शयनकक्ष का सुख

इस भाव को कैसे पढ़ें

पहले इस भाव की राशि, उसके स्वामी की स्थिति और स्थान देखें। फिर स्थित ग्रह, आने वाली दृष्टि और प्राकृतिक कारक जोड़ें। खाली भाव निष्क्रिय नहीं होता; उसका स्वामी और दृष्टियाँ विषय को सक्रिय रखते हैं।

पारंपरिक शारीरिक संबंध

भाव विश्लेषण सही जन्म समय पर निर्भर है क्योंकि लग्न लगभग हर दो घंटे में बदल सकता है। शारीरिक संबंध पारंपरिक प्रतीक हैं, निदान या स्वास्थ्य भविष्यवाणी नहीं।

अपनी कुंडली में भाव देखें