वर
- चंद्र राशि
- नक्षत्र
- लग्न
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वर-वधू की जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान से अष्टकूट मिलान। आठों कूट का अलग-अलग स्कोर, नाड़ी और भकूट दोष की स्थिति, और हर अंक का अर्थ — सरल हिंदी में। जन्म समय पता न हो, तो उसके नीचे “मुझे यह जन्म समय नहीं पता” चुनें — या ऊपर “नाम से” मिलान करें।
पारंपरिक गुण मिलान
वर
वधू
एक अंक से आगे
ये पारंपरिक कूटों को दोनों कुंडलियों के आपसी योगों के साथ जोड़कर बनते हैं।
आठ पारंपरिक कसौटियाँ
केवल अंक देखने के बजाय पढ़िए कि हर कूट किस बात को तौलता है।
| कूट | अंक | क्या देखा जाता है | व्याख्या |
|---|
महत्वपूर्ण जाँच
किसी दोष के साथ उसका परिहार भी हो सकता है। निष्कर्ष निकालने से पहले व्याख्या पढ़िए।
आगे क्या
ऊपर का पूरा मिलान मुफ़्त है और मुफ़्त ही रहेगा।
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दोनों प्रोफ़ाइल सहेजें, तुलना फिर से खोलें, और साथ में रोज़ का पंचांग और गोचर देखें।
दोनों कुंडलियाँ सहेजेंविवाह रिपोर्ट
सप्तम भाव, शुक्र और गुरु का संदर्भ, मांगलिक विश्लेषण, वर्ग कुंडलियाँ और तिथि सहित दशा अवधि। यह एक व्यक्ति की रिपोर्ट है, दूसरा मिलान स्कोर नहीं।
रिपोर्ट का मुख्य विवरण अभी अंग्रेज़ी में है।
रिपोर्ट में क्या है, देखेंजन्म समय नहीं पता?
नामकरण परंपरा में बच्चे का नाम उसी अक्षर से रखा जाता है जो जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र चरण का होता है, इसलिए पहले नाम से जन्म नक्षत्र पढ़कर आठों कूट गिने जा सकते हैं। दोनों पहले नाम भरें: पूरा परिणाम नाम से कुंडली मिलान के पेज पर खुलेगा।
यह अनुमान तभी भरोसेमंद है जब दोनों नाम नामकरण के अक्षर से रखे गए हों। जन्म तिथि, समय और स्थान पता हों, तो ऊपर वाला मिलान ज़्यादा सटीक है — उसमें चंद्रमा की असली स्थिति और मांगलिक जाँच भी है।
वैदिक ज्योतिष में विवाह मिलान दोनों की चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र की तुलना से होता है। आठ कसौटियाँ — वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी — मिलकर 36 अंक बनाती हैं।
परंपरा में 18 से ऊपर को व्यवहार्य और 24 से ऊपर को उत्तम माना जाता है। पर अनुभवी ज्योतिषी कुल अंक से ज़्यादा यह देखते हैं कि कौन-सा कूट शून्य आया — विशेषकर नाड़ी, जो अकेले 8 अंक की है।
दोनों की नाड़ी एक होने पर नाड़ी दोष बनता है और भकूट दोष राशि की दूरी से। दोनों के लिए शास्त्रों में परिहार भी दिए गए हैं — जैसे एक ही राशि होने पर या राशि स्वामी एक होने पर भकूट दोष निष्प्रभावी माना जाता है। केवल दोष बता देना और परिहार छोड़ देना अधूरी बात है।
दोनों का जन्म समय न पता हो, तो ऊपर हर व्यक्ति के लिए “मुझे यह जन्म समय नहीं पता” चुनें। और जन्म तिथि से प्रेम अनुकूलता हर संभव जन्म समय के लिए गुण गिनता है और बताता है कि कौन-से कूट तिथि से तय हो जाते हैं और किन्हें जन्म समय बदल सकता है।
परंपरा में 18 या उससे ज़्यादा गुण निभने योग्य, 24 या ज़्यादा अच्छे और 32 या ज़्यादा उत्तम माने जाते हैं। पर कुल अंक से ज़्यादा यह देखा जाता है कि कौन-सा कूट शून्य आया।
दोनों की नाड़ी एक होने पर नाड़ी दोष बनता है। यह अकेले 8 अंक का है, इसलिए सबसे पहले यही देखा जाता है।
तब नाम से गुण मिलान किया जा सकता है, क्योंकि नामकरण परंपरा में नाम का पहला अक्षर जन्म नक्षत्र से आता है।
ऊपर वर और वधू दोनों की जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान भरें — वर का विवरण पहले। हर जन्म के क्षण से चंद्रमा का नक्षत्र और राशि निकलती है, और आठों कूट उसी से गिने जाते हैं; नाम केवल दोनों परिणामों पर लिखे जाते हैं, अंक नहीं बदलते।
जन्म समय के नीचे “मुझे यह जन्म समय नहीं पता” चुनें। तब वह कुंडली उस दिन के सूर्योदय की बनती है: चंद्र राशि और गुण मिलान आम तौर पर वही रहते हैं, पर लग्न, भाव और लग्न से मांगलिक जाँच अनुमानित रहती है।
हाँ। पूरा मिलान मुफ़्त है, लॉगिन नहीं चाहिए, और जन्म विवरण केवल इसी गणना में पढ़े जाते हैं — कहीं सहेजे नहीं जाते।
कुंडली मिल जाए तो अगला प्रश्न तारीख का होता है। अगला विवाह मुहूर्त शनिवार, 21 नवंबर 2026 को है (नई दिल्ली के समय अनुसार)। महीनेवार हर तारीख, उसके समय, नक्षत्र और लग्न के साथ:
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