काल सर्प दोष कैलकुलेटर

जन्म तिथि, सटीक समय और स्थान भरें — कैलकुलेटर सातों ग्रहों को राहु-केतु अक्ष के सापेक्ष अंशों से जाँचता है और 12 में से प्रकार बताता है। उदाहरण (1 जनवरी 1960, 11:30, नई दिल्ली): काल सर्प दोष बनता है: तक्षक काल सर्प, राहु सातवें भाव में।

  • सातों ग्रहों की जाँच अंशों से, केवल राशि से नहीं
  • प्रकार और घेराव तोड़ने वाले ग्रह का नाम
  • जन्म विवरण केवल इस परिणाम के लिए, सहेजा नहीं जाता

तिथि, सटीक समय और स्थान। जाँच सर्वर पर इन्हीं से होती है और कुछ सहेजा नहीं जाता।

लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसलिए नीचे के भाव जन्म समय पर निर्भर हैं। समय अनुमानित हो तो भावों को भी अनुमानित मानें।

आपका विवरण केवल यह परिणाम निकालने के लिए इस्तेमाल होता है और सहेजा नहीं जाता। यह पेज के पते (URL) में नहीं, अनुरोध के भीतर भेजा जाता है, और इससे बना पेज न कैश होता है न सर्च में जाता है।

काल सर्प दोष परिणाम

तक्षक काल सर्प दोष

सातों ग्रह राहु से केतु वाली ओर (राशि-क्रम में राहु के आगे) हैं — राहु सातवें भाव (कन्या) से केतु पहले भाव (मीन) तक। राहु सातवें भाव में हो तो परंपरा इसे तक्षक काल सर्प कहती है।

सातों ग्रह राहु-केतु अक्ष के सापेक्ष (निरयन, लाहिड़ी)
ग्रहराशिराहु से आगेकिस ओर
सूर्यधनु101.1°राहु→केतु
चंद्रमकर135.2°राहु→केतु
मंगलवृश्चिक81.8°राहु→केतु
बुधधनु86.6°राहु→केतु
बृहस्पतिवृश्चिक80.1°राहु→केतु
शुक्रवृश्चिक60.0°राहु→केतु
शनिधनु100.8°राहु→केतु

तक्षक काल सर्प के बारे में नीचे पढ़ें

काल सर्प दोष के 12 प्रकार

राहु जिस भाव में हो, उसी से प्रकार का नाम तय होता है; केतु हमेशा उससे सातवें भाव में होता है। परंपरा हर प्रकार को उन दो भावों के विषयों पर केंद्रित मानती है।

राहु के भाव से काल सर्प के बारह नाम
प्रकारराहुकेतु
अनंत (Anant)पहले भाव — स्वयं और स्वभावसातवें भाव — विवाह और साझेदारी
कुलिक (Kulik)दूसरे भाव — परिवार, वाणी और बचतआठवें भाव — अचानक बदलाव और साझा संसाधन
वासुकि (Vasuki)तीसरे भाव — प्रयास, साहस और भाई-बहननौवें भाव — पिता, गुरु और आस्था
शंखपाल (Shankhpal)चौथे भाव — घर, माता और मन की शांतिदसवें भाव — करियर और प्रतिष्ठा
पद्म (Padma)पाँचवें भाव — संतान, विद्या और रचनात्मकताग्यारहवें भाव — लाभ और संपर्क
महापद्म (Mahapadma)छठे भाव — रोज़ का काम, ऋण और विवादबारहवें भाव — खर्च, विश्राम और दूर के स्थान
तक्षक (Takshak)सातवें भाव — विवाह और साझेदारीपहले भाव — स्वयं और स्वभाव
कर्कोटक (Karkotak)आठवें भाव — अचानक बदलाव और साझा संसाधनदूसरे भाव — परिवार, वाणी और बचत
शंखचूड़ (Shankhachood)नौवें भाव — पिता, गुरु और आस्थातीसरे भाव — प्रयास, साहस और भाई-बहन
घातक (Ghatak)दसवें भाव — करियर और प्रतिष्ठाचौथे भाव — घर, माता और मन की शांति
विषधर (Vishdhar)ग्यारहवें भाव — लाभ और संपर्कपाँचवें भाव — संतान, विद्या और रचनात्मकता
शेषनाग (Sheshnag)बारहवें भाव — खर्च, विश्राम और दूर के स्थानछठे भाव — रोज़ का काम, ऋण और विवाद

एक ही प्रकार के लिए वर्तनी अलग-अलग मिलती है — शंखचूड़ को शंखनाद भी लिखा जाता है, पद्म को पदम। नाम राहु के भाव से ही बनता है, वर्तनी से नहीं।

यह कैलकुलेटर काल सर्प कैसे तय करता है

  • जन्म तिथि, समय और स्थान से सातों ग्रहों और राहु के निरयन (लाहिड़ी) अंश निकाले जाते हैं। केतु हमेशा राहु से ठीक 180° पर होता है।
  • हर ग्रह की दूरी राहु से राशि-क्रम में नापी जाती है। सातों 0° और 180° के बीच हों, या सातों 180° और 360° के बीच, तभी काल सर्प बनता है। राशि नहीं, अंश देखे जाते हैं।
  • कोई ग्रह ठीक राहु या केतु के अंश पर हो तो घेराव टूटा माना जाता है।
  • प्रकार का नाम लग्न से राहु के भाव (संपूर्ण राशि भाव) से रखा जाता है।
  • ऐप का दोष कार्ड यही नियम इसी इंजन से लगाता है, इसलिए दोनों का उत्तर एक ही रहता है।

कैलकुलेटर अलग उत्तर क्यों देते हैं

इस दोष पर परंपराएँ कई बातों में बँटी हैं, और यह पेज अपना चुनाव साफ़ बताता है:

  • अंश या राशि: कुछ टूल केवल राशि देखते हैं, तो राहु की राशि में राहु से पीछे बैठा ग्रह भी अंदर गिना जाता है। यहाँ अंश देखे जाते हैं।
  • दिशा: केतु से राहु वाली ओर का घेराव कुछ लोग काल अमृत कहते हैं या दोष नहीं मानते। यहाँ दोनों ओर गिनी जाती हैं और परिणाम बताता है कि ग्रह किस ओर हैं।
  • आंशिक काल सर्प: एक ग्रह बाहर हो तो कुछ लोग इसे आंशिक दोष कहते हैं। यहाँ नियम पूरा है या नहीं — बीच की कोई श्रेणी नहीं।
  • मध्यम या स्पष्ट राहु: राहु की दो गणनाएँ लगभग 1.5° तक अलग हो सकती हैं; सीमा पर बैठा ग्रह इससे बदल सकता है।

काल सर्प दोष का पारंपरिक संदर्भ

काल सर्प का उल्लेख बृहत् पाराशर होरा शास्त्र जैसे मूल ग्रंथों में नहीं मिलता; यह बाद की परंपरा है। राहु-केतु लगभग 18 महीने एक राशि में रहते हैं और ग्रह कई हफ़्तों तक एक ओर रह सकते हैं, इसलिए उन हफ़्तों में जन्मे सभी लोगों की कुंडली में यह बनता है। विस्तार से पढ़ें: काल सर्प दोष गाइड (अंग्रेज़ी)।

काल सर्प दोष में अपनाए जाने वाले उपाय

जो लोग कोई पारंपरिक अभ्यास चाहते हैं, वे पहले मुफ़्त उपाय चुनते हैं: रोज़ महामृत्युंजय मंत्र या ॐ नमः शिवाय का जप, सोमवार को शिव पूजा, और नाग पंचमी का व्रत। मंदिर में काल सर्प पूजा वैकल्पिक है — कोई डर दिखाकर जल्दी पैसे माँगे तो रुकें।

काल सर्प दोष — सामान्य प्रश्न

काल सर्प दोष क्या है?

जब सातों ग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि — राहु और केतु को जोड़ने वाली रेखा के एक ही ओर हों, तो उसे काल सर्प दोष कहते हैं।

जन्म तिथि से काल सर्प दोष कैसे जानें?

ऊपर जन्म तिथि, सटीक जन्म समय और जन्म स्थान भरें। कैलकुलेटर हर ग्रह की राहु से दूरी नापकर बताता है कि सातों एक ओर हैं या नहीं, किस ओर हैं, और राहु के भाव से कौन-सा प्रकार बनता है।

काल सर्प दोष के 12 प्रकार कौन-से हैं?

अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर और शेषनाग — राहु के क्रमशः पहले से बारहवें भाव में होने पर।

क्या आंशिक काल सर्प दोष होता है?

कुछ ज्योतिषी एक ग्रह बाहर होने पर इसे आंशिक दोष कहते हैं। यह कैलकुलेटर पूरा नियम लगाता है: एक भी ग्रह बाहर हो तो दोष नहीं बनता, और परिणाम उस ग्रह का नाम बताता है।

क्या काल सर्प दोष शास्त्रों में है?

नहीं। यह बृहत् पाराशर होरा शास्त्र और दूसरे मूल ग्रंथों में नहीं मिलता और पिछली सदी में फैला। कोई उपाय बेचे तो यह बात जानना उपयोगी है।

क्या काल सर्प के लिए जन्म समय ज़रूरी है?

दोष बनना ग्रहों के अंशों पर निर्भर है, जो धीरे चलते हैं, इसलिए अक्सर तिथि से ही तय हो जाता है। पर प्रकार लग्न से राहु के भाव पर निर्भर है, और उसके लिए सटीक समय चाहिए।