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सूर्य, चंद्रमा और राहु-केतु की जाँच

ग्रहण दोष कैलकुलेटर

ग्रहण दोष तब माना जाता है जब जन्म कुंडली में सूर्य या चंद्रमा राहु या केतु के साथ एक ही राशि में हों; ग्रहण शब्द का मूल अर्थ ग्रहण के समय जन्म है। जन्म विवरण भरें और देखें कि आपकी कुंडली में यह है या नहीं, दोनों कितने पास हैं, कौन-से परिहार हैं और इसका क्या अर्थ नहीं है।

अपना जन्म विवरण भरें

तिथि, सटीक समय और स्थान। जाँच सर्वर पर इन्हीं से होती है और कुछ सहेजा नहीं जाता।

लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसलिए नीचे के भाव जन्म समय पर निर्भर हैं। समय अनुमानित हो तो भावों को भी अनुमानित मानें।

आपका विवरण केवल यह परिणाम निकालने के लिए इस्तेमाल होता है और सहेजा नहीं जाता। यह पेज के पते (URL) में नहीं, अनुरोध के भीतर भेजा जाता है, और इससे बना पेज न कैश होता है न सर्च में जाता है।

कैलकुलेटर के बारे में

ग्रहण दोष कैलकुलेटर

  • सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोष की अलग-अलग जाँच
  • जन्म ग्रहण के समय हुआ या नहीं, यह भी
  • जन्म विवरण केवल इस परिणाम के लिए, सहेजा नहीं जाता

राहु-केतु से जुड़े दूसरे दोष भी देखें: काल सर्प, गुरु चांडाल और श्रापित दोष।

उदाहरण (26 नवंबर 1993, 18:20, नई दिल्ली): ग्रहण दोष बनता है: सूर्य वृश्चिक में राहु के साथ है, 1.3° की दूरी पर।

ग्रहण दोष परिणाम

ग्रहण दोष बनता है

ग्रहण दोष बनता है: सूर्य वृश्चिक में राहु के साथ है, 1.3° की दूरी पर।

ग्रहण दोष की जाँच: ग्रह और राहु-केतु (निरयन, लाहिड़ी)
ग्रहराशिभावराहु/केतु के साथ?
सूर्यवृश्चिकसातवें भावहाँ — राहु, 1.3° दूर
चंद्रमामेषबारहवें भावनहीं
राहुवृश्चिकसातवें भाव—
केतुवृषभपहले भाव—

इस कुंडली में ग्रंथों में बताई गई परिहार की कोई स्थिति नहीं है। इससे यह बदलता है कि परंपरा इसे कितना महत्व देती है, यह नहीं कि आगे क्या होगा।

सबसे पास का ग्रहण 29 नवंबर 1993 का पूर्ण चंद्र ग्रहण था — जन्म से 3 दिन बाद (जन्म स्थान से नहीं दिखा)। जन्म उसके दौरान नहीं हुआ, इसलिए ग्रहण के समय जन्म वाला मूल ग्रहण दोष इस कुंडली में नहीं है।

यह योग आम है: लगभग हर दस में से तीन कुंडलियों में मिलता है। इसे निजी दुर्भाग्य का प्रमाण न मानें।

यह कैलकुलेटर ग्रहण दोष कैसे तय करता है

  • जन्म तिथि, समय और स्थान से सूर्य, चंद्रमा, राहु और केतु की निरयन (लाहिड़ी) स्थिति और लग्न से संपूर्ण राशि भाव निकाले जाते हैं।
  • सूर्य या चंद्रमा राहु या केतु के साथ एक ही राशि में हों तो ग्रहण दोष बताया जाता है: सूर्य के लिए सूर्य ग्रहण दोष, चंद्रमा के लिए चंद्र ग्रहण दोष। एक कुंडली में दोनों हो सकते हैं।
  • दोनों के बीच के अंश भी दिखाए जाते हैं, क्योंकि पास की युति को दूर की युति से अधिक प्रभावी माना जाता है।
  • कैलकुलेटर जन्म के आसपास के ग्रहण भी खोजता है और बताता है कि जन्म किसी ग्रहण के दौरान हुआ या नहीं।
  • ऐप का दोष कार्ड यही नियम इसी इंजन से लगाता है, इसलिए दोनों का उत्तर एक ही रहता है।

ग्रहण दोष और असली ग्रहण

ग्रहण दोष का सबसे पुराना अर्थ सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय जन्म है: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के जन्म-शांति अध्याय इसे अमावस्या या संक्रांति पर जन्म के साथ उन समयों में गिनते हैं जिनके लिए शांति विधि बताई गई है। ग्रहण तभी होता है जब सूर्य और चंद्रमा राहु-केतु के पास हों, इसलिए बाद की परंपरा हर सूर्य-राहु या चंद्र-केतु युति को ग्रहण दोष कहने लगी। युति वाली अधिकतर कुंडलियों का जन्म ग्रहण के समय नहीं हुआ होता, और परिणाम बताता है कि आपकी कुंडली कौन-सी है।

ग्रहण दोष पर ज्योतिषी अलग क्यों बोलते हैं

  • ग्रहण या युति: कुछ ज्योतिषी यह नाम केवल ग्रहण के समय जन्म के लिए रखते हैं; अधिकतर कैलकुलेटर युति गिनते हैं। यह पेज दोनों बताता है।
  • कितनी पास: कुछ केवल लगभग दस-बारह अंश के भीतर की युति गिनते हैं, कुछ पूरी राशि। अंश दिखाए गए हैं, ताकि आप कोई भी नियम लगा सकें।
  • दृष्टि: कुछ राहु की दृष्टि को भी गिनते हैं। आपकी कुंडली में ऐसी दृष्टि हो तो परिणाम उसे बताता है, पर गिनता नहीं।
  • मध्यम या स्पष्ट राहु: राहु की दो गणनाएँ लगभग 1.5° तक अलग हो सकती हैं; राशि की सीमा पर बैठी युति इससे बदल सकती है।

ग्रहण दोष का क्या अर्थ नहीं है

यह कोई श्राप नहीं है, और न यह बीमारी, माता-पिता के कष्ट या असफलता की भविष्यवाणी करता है। सूर्य और चंद्रमा हर साल राहु-केतु के पास से गुज़रते हैं, इसलिए लगभग हर दस में से तीन कुंडलियों में यह युति मिलती है। परंपरा इसे सूर्य (आत्मविश्वास, पिता) या चंद्रमा (मन, माता) का संवेदनशील बिंदु मानती है, जिसे सहारा देना है, उससे डरना नहीं।

ग्रहण दोष में अपनाए जाने वाले उपाय

पारंपरिक उपाय मुफ़्त हैं: सूर्य के लिए उगते सूर्य को जल और आदित्य हृदय स्तोत्र; चंद्रमा के लिए सोमवार को शिव पूजा और चंद्र मंत्र; ग्रहण के दिन शांत जप और दान। पैसे लेकर कराई जाने वाली ग्रहण पूजा वैकल्पिक है, ज़रूरी नहीं।

ग्रहण दोष — सामान्य प्रश्न

ग्रहण दोष क्या है?

जन्म कुंडली में सूर्य या चंद्रमा राहु या केतु के साथ एक ही राशि में हों तो उसे ग्रहण दोष कहते हैं। ग्रहण शब्द का मूल अर्थ सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय जन्म है।

कुंडली में ग्रहण दोष कैसे देखें?

ऊपर जन्म तिथि, सटीक जन्म समय और जन्म स्थान भरें। कैलकुलेटर देखता है कि सूर्य या चंद्रमा राहु या केतु के साथ एक राशि में हैं या नहीं, कितने अंश दूर हैं, और जन्म किसी ग्रहण के दौरान हुआ या नहीं।

सूर्य ग्रहण दोष और चंद्र ग्रहण दोष में क्या अंतर है?

सूर्य के साथ राहु या केतु हो तो सूर्य ग्रहण दोष, चंद्रमा के साथ हो तो चंद्र ग्रहण दोष। एक कुंडली में कोई एक, दोनों या कोई भी नहीं हो सकता है।

क्या ग्रहण दोष का अर्थ ग्रहण के समय जन्म है?

अधिकतर नहीं। ग्रहण के समय जन्म इसका मूल अर्थ है, पर ज़्यादातर कैलकुलेटर हर सूर्य-चंद्र और राहु-केतु की युति गिनते हैं, और ऐसे अधिकतर जन्म ग्रहण के समय नहीं होते। यहाँ परिणाम दोनों बताता है।

ग्रहण दोष कितना आम है?

लगभग हर दस में से तीन कुंडलियों में यह युति मिलती है, क्योंकि सूर्य और चंद्रमा हर साल राहु-केतु के पास से गुज़रते हैं। यह आम स्थिति है, कोई दुर्लभ संकट नहीं।

ग्रहण दोष के उपाय क्या हैं?

पारंपरिक उपाय मुफ़्त हैं: सूर्य के लिए उगते सूर्य को जल या आदित्य हृदय स्तोत्र, चंद्रमा के लिए सोमवार को शिव पूजा, और ग्रहण के दिन जप और दान। पैसे वाली पूजा वैकल्पिक है।