ज्योतिष की नींव · नक्षत्र
27 नक्षत्रों के नाम, अंश, स्वामी और देवता
नक्षत्र राशिचक्र के 27 बराबर भाग हैं, हर एक 13 अंश 20 कला का। चंद्रमा लगभग 27.3 दिन में पूरा चक्र लगाता है, यानी लगभग रोज़ एक नक्षत्र — इसीलिए नक्षत्र चंद्रमा की गति से जुड़ी पुरानी और व्यावहारिक व्यवस्था है। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, वही जन्म नक्षत्र है: इसी से नामाक्षर, गुण मिलान की नाड़ी, योनि और गण, और विंशोत्तरी दशा की शुरुआत तय होती है।
इस समय चंद्रमा हस्त नक्षत्र में है, शनिवार, 10 अक्तूबर 2026, रात 9:42 बजे तक (नई दिल्ली का समय)। आज का नक्षत्र पूरा देखें
अश्विनी से रेवती
27 नक्षत्रों की सूची: अंश, स्वामी, देवता, गण और नाड़ी
| क्रम | नक्षत्र | अंश | स्वामी | देवता | गण | नाड़ी | मूल भाव |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | अश्विनी | मेष 0°00′ – मेष 13°20′ | केतु | अश्विनी कुमार | देव | आदि (वात) | गति, उपचार, नई शुरुआत |
| 2 | भरणी | मेष 13°20′ – मेष 26°40′ | शुक्र | यम | मनुष्य | मध्य (पित्त) | सहनशक्ति, संयम, परिवर्तन |
| 3 | कृत्तिका | मेष 26°40′ – वृषभ 10°00′ | सूर्य | अग्नि | राक्षस | अंत्य (कफ) | तीक्ष्णता, स्पष्टता, शुद्धि |
| 4 | रोहिणी | वृषभ 10°00′ – वृषभ 23°20′ | चंद्र | ब्रह्मा (प्रजापति) | मनुष्य | अंत्य (कफ) | वृद्धि, सौंदर्य, सुख-सुविधा |
| 5 | मृगशिरा | वृषभ 23°20′ – मिथुन 6°40′ | मंगल | सोम (चंद्र) | देव | मध्य (पित्त) | खोज, जिज्ञासा, बेचैनी |
| 6 | आर्द्रा | मिथुन 6°40′ – मिथुन 20°00′ | राहु | रुद्र | मनुष्य | आदि (वात) | तूफ़ान, उथल-पुथल, नई राह |
| 7 | पुनर्वसु | मिथुन 20°00′ – कर्क 3°20′ | गुरु | अदिति | देव | आदि (वात) | वापसी, नवीनीकरण, सुरक्षित आश्रय |
| 8 | पुष्य | कर्क 3°20′ – कर्क 16°40′ | शनि | बृहस्पति | देव | मध्य (पित्त) | पोषण, कर्तव्य, स्थिरता |
| 9 | आश्लेषा | कर्क 16°40′ – कर्क 30°00′ | बुध | नाग (सर्प देवता) | राक्षस | अंत्य (कफ) | अंतर्दृष्टि, रणनीति, पकड़ |
| 10 | मघा | सिंह 0°00′ – सिंह 13°20′ | केतु | पितर (पूर्वज) | राक्षस | अंत्य (कफ) | वंश, अधिकार, विरासत |
| 11 | पूर्वा फाल्गुनी | सिंह 13°20′ – सिंह 26°40′ | शुक्र | भग | मनुष्य | मध्य (पित्त) | आनंद, विश्राम, रचनात्मकता |
| 12 | उत्तरा फाल्गुनी | सिंह 26°40′ – कन्या 10°00′ | सूर्य | अर्यमा | मनुष्य | आदि (वात) | अनुबंध, सेवा, भरोसा |
| 13 | हस्त | कन्या 10°00′ – कन्या 23°20′ | चंद्र | सविता (सूर्य) | देव | आदि (वात) | हाथ का कौशल, शिल्प, दक्षता |
| 14 | चित्रा | कन्या 23°20′ – तुला 6°40′ | मंगल | विश्वकर्मा | राक्षस | मध्य (पित्त) | रचना, चमक, रूप |
| 15 | स्वाति | तुला 6°40′ – तुला 20°00′ | राहु | वायु | देव | अंत्य (कफ) | स्वतंत्रता, व्यापार, लचीलापन |
| 16 | विशाखा | तुला 20°00′ – वृश्चिक 3°20′ | गुरु | इंद्राग्नि (इंद्र और अग्नि) | राक्षस | अंत्य (कफ) | महत्वाकांक्षा, एकाग्रता, लक्ष्य |
| 17 | अनुराधा | वृश्चिक 3°20′ – वृश्चिक 16°40′ | शनि | मित्र | देव | मध्य (पित्त) | मित्रता, समर्पण, सहयोग |
| 18 | ज्येष्ठा | वृश्चिक 16°40′ – वृश्चिक 30°00′ | बुध | इंद्र | राक्षस | आदि (वात) | वरिष्ठता, संरक्षण, प्रतिस्पर्धा |
| 19 | मूल | धनु 0°00′ – धनु 13°20′ | केतु | निऋति | राक्षस | आदि (वात) | जड़ें, खोज, उखाड़ना |
| 20 | पूर्वाषाढ़ा | धनु 13°20′ – धनु 26°40′ | शुक्र | आपः (जल देवता) | मनुष्य | मध्य (पित्त) | उत्साह, प्रेरणा, जल |
| 21 | उत्तराषाढ़ा | धनु 26°40′ – मकर 10°00′ | सूर्य | विश्वेदेव | मनुष्य | अंत्य (कफ) | स्थायी विजय, ईमानदारी |
| 22 | श्रवण | मकर 10°00′ – मकर 23°20′ | चंद्र | विष्णु | देव | अंत्य (कफ) | सुनना, सीखना, परंपरा |
| 23 | धनिष्ठा | मकर 23°20′ – कुंभ 6°40′ | मंगल | अष्ट वसु | राक्षस | मध्य (पित्त) | लय, धन, संगीत |
| 24 | शतभिषा | कुंभ 6°40′ – कुंभ 20°00′ | राहु | वरुण | राक्षस | आदि (वात) | उपचार, रहस्य, व्यवस्था |
| 25 | पूर्व भाद्रपदा | कुंभ 20°00′ – मीन 3°20′ | गुरु | अज एकपाद | मनुष्य | आदि (वात) | तीव्रता, आदर्शवाद, विरक्ति |
| 26 | उत्तर भाद्रपदा | मीन 3°20′ – मीन 16°40′ | शनि | अहिर्बुध्न्य | मनुष्य | मध्य (पित्त) | गहराई, धैर्य, विवेक |
| 27 | रेवती | मीन 16°40′ – मीन 30°00′ | बुध | पूषा | देव | अंत्य (कफ) | पूर्णता, सुरक्षित यात्रा, दया |
पद और नामाक्षर
नक्षत्र के चार पद और नामाक्षर
हर नक्षत्र के चार पद होते हैं और हर पद का एक नामाक्षर होता है। 27 में से 9 नक्षत्र दो राशियों में बँटे हैं, इसलिए राशि हमेशा पद से पढ़ी जाती है। किसी नक्षत्र पर क्लिक करके उसके चारों पद, नवांश, नामाक्षर, स्वभाव, मिलान और चंद्रमा के अगली बार उस नक्षत्र में आने का समय देखें।
गणना
नक्षत्र सूची कैसे बनी
हर अंश, स्वामी, देवता, गण, योनि और नाड़ी इंजन की उन्हीं तालिकाओं से आते हैं जिन पर इस साइट की दशा और गुण मिलान गणना चलती है, और 9 अक्तूबर 2026 को एस्ट्रोसेज के नक्षत्र पेजों से मिलाए गए हैं। गणना लाहिड़ी अयनांश पर है; दूसरा अयनांश सीमा के पास नक्षत्र एक आगे-पीछे कर सकता है।
प्रश्न
नक्षत्र से जुड़े आम प्रश्न
नक्षत्र कितने होते हैं?
सत्ताईस। राशिचक्र के 360 अंशों को 27 बराबर भागों में बाँटने पर हर नक्षत्र 13 अंश 20 कला का होता है। कुछ परंपराएँ मुहूर्त के लिए उत्तराषाढ़ा और श्रवण के बीच अभिजित को अट्ठाईसवाँ नक्षत्र मानती हैं, पर जन्म नक्षत्र, दशा और मिलान 27 पर ही चलते हैं।
जन्म नक्षत्र कैसे पता करें?
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, वही जन्म नक्षत्र है। इसके लिए जन्म तिथि, समय और स्थान चाहिए; चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है, इसलिए समय में एक-दो घंटे का अंतर भी पद बदल सकता है।
एक नक्षत्र में कितने पद होते हैं?
चार, हर एक 3 अंश 20 कला का। 27 नक्षत्रों में कुल 108 पद हैं, और हर पद का अपना नामाक्षर और नवांश राशि होती है।
क्या एक नक्षत्र दो राशियों में हो सकता है?
हाँ। 27 में से 9 नक्षत्र दो राशियों में बँटे हैं — जैसे कृत्तिका का पहला पद मेष में और बाकी तीन वृषभ में। इसीलिए राशि नक्षत्र से नहीं, पद से तय होती है।
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