महादशा कैलकुलेटर: विंशोत्तरी दशा और अंतर्दशा

अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान भरें — जीवन की हर महादशा तिथियों के साथ, और आज चल रही महादशा, अंतर्दशा व प्रत्यंतर दशा ठीक-ठीक दिखेगी। आज, 8 अक्तूबर 2026, उदाहरण कुंडली (12 अप्रैल 1990, 10:30, नई दिल्ली) में बुध की महादशा में केतु की अंतर्दशा और चंद्र की प्रत्यंतर दशा चल रही है; प्रत्यंतर दशा 17 अक्तूबर 2026 तक है। अगली अंतर्दशा, शुक्र, 6 जून 2027 से आरंभ होगी।

  • चंद्रमा के सटीक निरयन अंश (लाहिड़ी अयनांश) से तिथियाँ
  • तीनों स्तर: महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा
  • जन्म विवरण केवल इस परिणाम के लिए, कहीं सहेजा नहीं जाता

जन्म तिथि, समय और स्थान। दशा इन्हीं से सर्वर पर निकाली जाती है और कुछ भी सहेजा नहीं जाता।

इसे चुनने पर कुंडली जन्म स्थान पर उस दिन के सूर्योदय के लिए बनेगी — यही पारंपरिक विकल्प है — और परिणाम साफ़ बताएगा कि इससे कौन-से उत्तर अनिश्चित रहते हैं।

जहाँ जन्म हुआ वही कस्बा लिखें, पास का बड़ा शहर नहीं। दशा चंद्रमा से निकलती है, जो एक क्षण में हर जगह एक ही होता है — पर जन्म समय स्थानीय घड़ी का समय है, और घड़ी का समय स्थान से तय होता है।

आपका विवरण केवल यह परिणाम निकालने में उपयोग होता है और सहेजा नहीं जाता। यह पेज के पते में नहीं, अनुरोध के भीतर भेजा जाता है, और इससे बना पेज न कैश होता है न खोज में जाता है, इसलिए आपकी कुंडली किसी और तक नहीं पहुँचती।

उदाहरण: 12 अप्रैल 1990, 10:30, नई दिल्ली की विंशोत्तरी दशा

जन्म के समय चंद्रमा तुला राशि में 21°03′ पर (निरयन, लाहिड़ी), विशाखा नक्षत्र के पहले चरण में था। विशाखा के स्वामी गुरु हैं, इसलिए जीवन गुरु की महादशा से आरंभ हुआ। चंद्रमा विशाखा का 7.8% भाग पार कर चुका था, इसलिए गुरु की 16 वर्ष की महादशा में से जन्म के समय 14 वर्ष 9 महीने 0 दिन शेष थे।

वर्तमान महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा

बुध

12 जनवरी 2024 – 12 जनवरी 2041 · 14 वर्ष 3 महीने शेष

बुध इस कुंडली में मेष राशि में, एकादश भाव में है और प्रथम और चतुर्थ भावों का स्वामी है।

केतु

9 जून 2026 – 6 जून 2027 · 7 महीने 28 दिन शेष

केतु इस कुंडली में कर्क राशि में, द्वितीय भाव में है। छाया ग्रह होने से यह किसी राशि का स्वामी नहीं; कर्क राशि का स्वामी चंद्र है।

चंद्र

16 सितंबर 2026 – 17 अक्तूबर 2026 · 9 दिन शेष

चंद्र इस कुंडली में तुला राशि में, पंचम भाव में है और द्वितीय भाव का स्वामी है।

आगे के दशा परिवर्तन

  1. 6 जून 2027 — बुध की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा आरंभ
  2. 6 अप्रैल 2030 — बुध की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा आरंभ
  3. 12 फ़रवरी 2031 — बुध की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा आरंभ

महादशा समयरेखा

हर पट्टी जीवन के 120 वर्ष के अक्ष पर एक महादशा है; लाल रेखा आज की तिथि है।

  1. गुरु1990–2005
  2. शनि2005–2024
  3. बुध2024–2041
  4. केतु2041–2048
  5. शुक्र2048–2068
  6. सूर्य2068–2074
  7. चंद्र2074–2084
  8. मंगल2084–2091
  9. राहु2091–2109

बुध महादशा के भीतर अंतर्दशाएँ:

  1. बुध2024–2026
  2. केतु2026–2027
  3. शुक्र2027–2030
  4. सूर्य2030–2031
  5. चंद्र2031–2032
  6. मंगल2032–2033
  7. राहु2033–2036
  8. गुरु2036–2038
  9. शनि2038–2041

जन्म से महादशा की तिथियाँ

जन्म से विंशोत्तरी महादशा
महादशाआरंभसमाप्तिअवधिआरंभ पर आयुस्थिति
गुरु12 अप्रैल 199012 जनवरी 200514.75 वर्ष (जन्म के समय शेष)0पूर्ण
शनि12 जनवरी 200512 जनवरी 202419.00 वर्ष14पूर्ण
बुध12 जनवरी 202412 जनवरी 204117.00 वर्ष33अभी चल रही — आप यहाँ हैं
केतु12 जनवरी 204112 जनवरी 20487.00 वर्ष50आने वाली
शुक्र12 जनवरी 204812 जनवरी 206820.00 वर्ष57आने वाली
सूर्य12 जनवरी 206812 जनवरी 20746.00 वर्ष77आने वाली
चंद्र12 जनवरी 207412 जनवरी 208410.00 वर्ष83आने वाली
मंगल12 जनवरी 208412 जनवरी 20917.00 वर्ष93आने वाली
राहु12 जनवरी 209112 जनवरी 210918.00 वर्ष100आने वाली

हर महादशा में अंतर्दशा की तिथियाँ

गुरु महादशा (1990–2005) की अंतर्दशाएँ
गुरु महादशा में अंतर्दशा
अंतर्दशाआरंभसमाप्तिअवधिस्थिति
गुरु12 अप्रैल 19902 मार्च 199110 महीने 20 दिनपूर्ण
शनि2 मार्च 199112 सितंबर 19932 वर्ष 6 महीनेपूर्ण
बुध12 सितंबर 199318 दिसंबर 19952 वर्ष 3 महीनेपूर्ण
केतु18 दिसंबर 199524 नवंबर 199611 महीने 7 दिनपूर्ण
शुक्र24 नवंबर 199624 जुलाई 19992 वर्ष 7 महीनेपूर्ण
सूर्य24 जुलाई 199912 मई 20009 महीने 19 दिनपूर्ण
चंद्र12 मई 200012 सितंबर 20011 वर्ष 4 महीनेपूर्ण
मंगल12 सितंबर 200118 अगस्त 200211 महीने 5 दिनपूर्ण
राहु18 अगस्त 200212 जनवरी 20052 वर्ष 4 महीनेपूर्ण
शनि महादशा (2005–2024) की अंतर्दशाएँ
शनि महादशा में अंतर्दशा
अंतर्दशाआरंभसमाप्तिअवधिस्थिति
शनि12 जनवरी 200515 जनवरी 20083 वर्षपूर्ण
बुध15 जनवरी 200824 सितंबर 20102 वर्ष 8 महीनेपूर्ण
केतु24 सितंबर 20103 नवंबर 20111 वर्ष 1 महीनेपूर्ण
शुक्र3 नवंबर 20113 जनवरी 20153 वर्ष 2 महीनेपूर्ण
सूर्य3 जनवरी 201515 दिसंबर 201511 महीने 11 दिनपूर्ण
चंद्र15 दिसंबर 201515 जुलाई 20171 वर्ष 7 महीनेपूर्ण
मंगल15 जुलाई 201724 अगस्त 20181 वर्ष 1 महीनेपूर्ण
राहु24 अगस्त 201830 जून 20212 वर्ष 10 महीनेपूर्ण
गुरु30 जून 202112 जनवरी 20242 वर्ष 6 महीनेपूर्ण
बुध महादशा (2024–2041) की अंतर्दशाएँ
बुध महादशा में अंतर्दशा
अंतर्दशाआरंभसमाप्तिअवधिस्थिति
बुध12 जनवरी 20249 जून 20262 वर्ष 4 महीनेपूर्ण
केतु9 जून 20266 जून 202711 महीने 27 दिनअभी चल रही — आप यहाँ हैं
शुक्र6 जून 20276 अप्रैल 20302 वर्ष 10 महीनेआने वाली
सूर्य6 अप्रैल 203012 फ़रवरी 203110 महीने 8 दिनआने वाली
चंद्र12 फ़रवरी 203112 जुलाई 20321 वर्ष 4 महीनेआने वाली
मंगल12 जुलाई 20329 जुलाई 203311 महीने 27 दिनआने वाली
राहु9 जुलाई 203327 जनवरी 20362 वर्ष 6 महीनेआने वाली
गुरु27 जनवरी 20363 मई 20382 वर्ष 3 महीनेआने वाली
शनि3 मई 203812 जनवरी 20412 वर्ष 8 महीनेआने वाली
केतु महादशा (2041–2048) की अंतर्दशाएँ
केतु महादशा में अंतर्दशा
अंतर्दशाआरंभसमाप्तिअवधिस्थिति
केतु12 जनवरी 20419 जून 20414 महीने 26 दिनआने वाली
शुक्र9 जून 20419 अगस्त 20421 वर्ष 2 महीनेआने वाली
सूर्य9 अगस्त 204215 दिसंबर 20424 महीने 6 दिनआने वाली
चंद्र15 दिसंबर 204215 जुलाई 20436 महीने 29 दिनआने वाली
मंगल15 जुलाई 204312 दिसंबर 20434 महीने 28 दिनआने वाली
राहु12 दिसंबर 204330 दिसंबर 20441 वर्षआने वाली
गुरु30 दिसंबर 20446 दिसंबर 204511 महीने 6 दिनआने वाली
शनि6 दिसंबर 204515 जनवरी 20471 वर्ष 1 महीनेआने वाली
बुध15 जनवरी 204712 जनवरी 204811 महीने 27 दिनआने वाली
शुक्र महादशा (2048–2068) की अंतर्दशाएँ
शुक्र महादशा में अंतर्दशा
अंतर्दशाआरंभसमाप्तिअवधिस्थिति
शुक्र12 जनवरी 204812 मई 20513 वर्ष 3 महीनेआने वाली
सूर्य12 मई 205112 मई 20521 वर्षआने वाली
चंद्र12 मई 205212 जनवरी 20541 वर्ष 8 महीनेआने वाली
मंगल12 जनवरी 205412 मार्च 20551 वर्ष 1 महीनेआने वाली
राहु12 मार्च 205512 मार्च 20583 वर्षआने वाली
गुरु12 मार्च 205812 नवंबर 20602 वर्ष 8 महीनेआने वाली
शनि12 नवंबर 206012 जनवरी 20643 वर्ष 2 महीनेआने वाली
बुध12 जनवरी 206412 नवंबर 20662 वर्ष 10 महीनेआने वाली
केतु12 नवंबर 206612 जनवरी 20681 वर्ष 2 महीनेआने वाली
सूर्य महादशा (2068–2074) की अंतर्दशाएँ
सूर्य महादशा में अंतर्दशा
अंतर्दशाआरंभसमाप्तिअवधिस्थिति
सूर्य12 जनवरी 206830 अप्रैल 20683 महीने 18 दिनआने वाली
चंद्र30 अप्रैल 206830 अक्तूबर 20686 महीनेआने वाली
मंगल30 अक्तूबर 20686 मार्च 20694 महीने 5 दिनआने वाली
राहु6 मार्च 206930 जनवरी 207010 महीने 26 दिनआने वाली
गुरु30 जनवरी 207018 नवंबर 20709 महीने 18 दिनआने वाली
शनि18 नवंबर 207030 अक्तूबर 207111 महीने 11 दिनआने वाली
बुध30 अक्तूबर 20716 सितंबर 207210 महीने 8 दिनआने वाली
केतु6 सितंबर 207212 जनवरी 20734 महीने 6 दिनआने वाली
शुक्र12 जनवरी 207312 जनवरी 207412 महीनेआने वाली
चंद्र महादशा (2074–2084) की अंतर्दशाएँ
चंद्र महादशा में अंतर्दशा
अंतर्दशाआरंभसमाप्तिअवधिस्थिति
चंद्र12 जनवरी 207412 नवंबर 207410 महीनेआने वाली
मंगल12 नवंबर 207412 जून 20756 महीने 29 दिनआने वाली
राहु12 जून 207512 दिसंबर 20761 वर्ष 6 महीनेआने वाली
गुरु12 दिसंबर 207612 अप्रैल 20781 वर्ष 3 महीनेआने वाली
शनि12 अप्रैल 207812 नवंबर 20791 वर्ष 7 महीनेआने वाली
बुध12 नवंबर 207912 अप्रैल 20811 वर्ष 5 महीनेआने वाली
केतु12 अप्रैल 208112 नवंबर 20817 महीने 1 दिनआने वाली
शुक्र12 नवंबर 208112 जुलाई 20831 वर्ष 7 महीनेआने वाली
सूर्य12 जुलाई 208312 जनवरी 20846 महीने 1 दिनआने वाली
मंगल महादशा (2084–2091) की अंतर्दशाएँ
मंगल महादशा में अंतर्दशा
अंतर्दशाआरंभसमाप्तिअवधिस्थिति
मंगल12 जनवरी 20849 जून 20844 महीने 27 दिनआने वाली
राहु9 जून 208427 जून 20851 वर्षआने वाली
गुरु27 जून 20853 जून 208611 महीने 6 दिनआने वाली
शनि3 जून 208612 जुलाई 20871 वर्ष 1 महीनेआने वाली
बुध12 जुलाई 20879 जुलाई 208811 महीने 28 दिनआने वाली
केतु9 जुलाई 20886 दिसंबर 20884 महीने 28 दिनआने वाली
शुक्र6 दिसंबर 20886 फ़रवरी 20901 वर्ष 2 महीनेआने वाली
सूर्य6 फ़रवरी 209012 जून 20904 महीने 4 दिनआने वाली
चंद्र12 जून 209012 जनवरी 20917 महीने 1 दिनआने वाली
राहु महादशा (2091–2109) की अंतर्दशाएँ
राहु महादशा में अंतर्दशा
अंतर्दशाआरंभसमाप्तिअवधिस्थिति
राहु12 जनवरी 209124 सितंबर 20932 वर्ष 8 महीनेआने वाली
गुरु24 सितंबर 209318 फ़रवरी 20962 वर्ष 4 महीनेआने वाली
शनि18 फ़रवरी 209624 दिसंबर 20982 वर्ष 10 महीनेआने वाली
बुध24 दिसंबर 209812 जुलाई 21012 वर्ष 6 महीनेआने वाली
केतु12 जुलाई 210130 जुलाई 21021 वर्षआने वाली
शुक्र30 जुलाई 210230 जुलाई 21053 वर्षआने वाली
सूर्य30 जुलाई 210524 जून 210610 महीने 25 दिनआने वाली
चंद्र24 जून 210624 दिसंबर 21071 वर्ष 6 महीनेआने वाली
मंगल24 दिसंबर 210712 जनवरी 21091 वर्षआने वाली

वर्तमान अंतर्दशा में प्रत्यंतर दशा की तिथियाँ

बुध–केतु में प्रत्यंतर दशा
प्रत्यंतर दशाआरंभसमाप्तिअवधिस्थिति
केतु9 जून 202630 जून 202621 दिनपूर्ण
शुक्र30 जून 202629 अगस्त 20262 महीनेपूर्ण
सूर्य29 अगस्त 202616 सितंबर 202618 दिनपूर्ण
चंद्र16 सितंबर 202617 अक्तूबर 20261 महीनेअभी चल रही — आप यहाँ हैं
मंगल17 अक्तूबर 20267 नवंबर 202621 दिनआने वाली
राहु7 नवंबर 202631 दिसंबर 20261 महीने 24 दिनआने वाली
गुरु31 दिसंबर 202617 फ़रवरी 20271 महीने 18 दिनआने वाली
शनि17 फ़रवरी 202716 अप्रैल 20271 महीने 27 दिनआने वाली
बुध16 अप्रैल 20276 जून 20271 महीने 21 दिनआने वाली

सभी तिथियाँ जन्म स्थान के समय क्षेत्र (Asia/Kolkata) में हैं।

योगिनी दशा

योगिनी दशा आठ योगिनियों का 36 वर्ष का चक्र है: मंगला (चंद्र, 1), पिंगला (सूर्य, 2), धान्या (गुरु, 3), भ्रामरी (मंगल, 4), भद्रिका (बुध, 5), उल्का (शनि, 6), सिद्धा (शुक्र, 7), संकटा (राहु, 8)। पहली योगिनी जन्म नक्षत्र की संख्या में 3 जोड़कर 8 से भाग देने पर शेष से तय होती है, और विंशोत्तरी की तरह पहली दशा का केवल बचा हुआ भाग मिलता है। इस कुंडली में चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में है, इसलिए जीवन धान्या (गुरु) योगिनी से शुरू हुआ।

आज धान्या योगिनी दशा (16 जनवरी 2029 तक) में भद्रिका की अंतर्दशा (16 जनवरी 2027 तक) चल रही है।

योगिनी दशा: जन्म से आगे के 36 वर्ष तक
योगिनीग्रहआरंभसमाप्तिस्थिति
धान्यागुरु12 अप्रैल 199016 जनवरी 1993पूर्ण
भ्रामरीमंगल16 जनवरी 199316 जनवरी 1997पूर्ण
भद्रिकाबुध16 जनवरी 199716 जनवरी 2002पूर्ण
उल्काशनि16 जनवरी 200217 जनवरी 2008पूर्ण
सिद्धाशुक्र17 जनवरी 200816 जनवरी 2015पूर्ण
संकटाराहु16 जनवरी 201516 जनवरी 2023पूर्ण
मंगलाचंद्र16 जनवरी 202317 जनवरी 2024पूर्ण
पिंगलासूर्य17 जनवरी 202416 जनवरी 2026पूर्ण
धान्यागुरु16 जनवरी 202616 जनवरी 2029अभी चल रही — आप यहाँ हैं
भ्रामरीमंगल16 जनवरी 202916 जनवरी 2033आने वाली
भद्रिकाबुध16 जनवरी 203316 जनवरी 2038आने वाली
उल्काशनि16 जनवरी 203817 जनवरी 2044आने वाली
सिद्धाशुक्र17 जनवरी 204416 जनवरी 2051आने वाली
संकटाराहु16 जनवरी 205116 जनवरी 2059आने वाली
मंगलाचंद्र16 जनवरी 205917 जनवरी 2060आने वाली
पिंगलासूर्य17 जनवरी 206016 जनवरी 2062आने वाली
धान्यागुरु16 जनवरी 206216 जनवरी 2065आने वाली

विंशोत्तरी दशा की गणना कैसे होती है

विंशोत्तरी दशा 120 वर्षों का चक्र है, जिसे नौ ग्रह एक तय क्रम में बाँटते हैं: केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि और बुध। हर ग्रह तीन नक्षत्रों का स्वामी है, और 27 नक्षत्र इसी क्रम में तीन बार आते हैं।

चक्र कहाँ से शुरू होगा, यह जन्म के समय चंद्रमा का नक्षत्र तय करता है। जिस नक्षत्र में चंद्रमा था, उसका स्वामी ग्रह जीवन की पहली महादशा देता है। पर वह पूरी नहीं मिलती: चंद्रमा उस नक्षत्र का जितना भाग पार कर चुका था, महादशा का उतना भाग जन्म से पहले ही बीत गया माना जाता है। बाकी — दशा शेष या भोग्य दशा — जन्म से शुरू होती है, और उसके बाद की हर महादशा अपनी पूरी अवधि चलती है।

सबसे लंबी महादशा शुक्र की (20 वर्ष) और सबसे छोटी सूर्य की (6 वर्ष) है।

नौ ग्रहों की विंशोत्तरी दशा अवधि

विंशोत्तरी दशा: नौ ग्रह, 120 वर्ष
ग्रह (क्रम से)महादशा के वर्षजिन नक्षत्रों का स्वामी
1. केतु7अश्विनी, मघा, मूल
2. शुक्र20भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा
3. सूर्य6कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा
4. चंद्र10रोहिणी, हस्त, श्रवण
5. मंगल7मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा
6. राहु18आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा
7. गुरु16पुनर्वसु, विशाखा, पूर्व भाद्रपदा
8. शनि19पुष्य, अनुराधा, उत्तर भाद्रपदा
9. बुध17आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती

जन्म के समय दशा शेष

ऊपर की कुंडली पर यह गणना, हर चरण के साथ:

  1. जन्म के समय चंद्रमा: 201.0432° (निरयन)।
  2. विशाखा नक्षत्र 200°00′ से 213°20′ तक है; चंद्रमा उसका 1°03′ पार कर चुका था, यानी 13°20′ का 7.82%।
  3. गुरु की महादशा 16 वर्ष की है, इसलिए 16 × 0.0782 = 1.2518 वर्ष जन्म से पहले बीत चुके थे।
  4. दशा शेष = 16 × (1 − 0.0782) = 14.7482 वर्ष, जो 12 जनवरी 2005 को पूरा होता है; वहीं से शनि की महादशा आरंभ होती है।

अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा की अवधि

हर महादशा नौ अंतर्दशाओं में बँटती है, उसी क्रम में, महादशा के अपने ग्रह से शुरू होकर। अंतर्दशा की अवधि = महादशा के वर्ष × अंतर्दशा ग्रह के वर्ष ÷ 120। प्रत्यंतर दशा इसी नियम से अंतर्दशा को फिर नौ भागों में बाँटती है।

इस कुंडली में अभी बुध (17 वर्ष) की महादशा में केतु (7 वर्ष) की अंतर्दशा चल रही है: 17 × 7 ÷ 120 = 0.9917 वर्ष, यानी लगभग 362.2 दिन। उसी तरह चंद्र की प्रत्यंतर दशा उस अंतर्दशा का 10/120 भाग है — लगभग 30.2 दिन।

जन्म की पहली महादशा में एक बात और: उसकी जो अंतर्दशाएँ जन्म से पहले पूरी हो चुकी थीं, वे जीवन का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए तालिका में पहली महादशा की अंतर्दशाएँ नौ से कम हो सकती हैं। बची हुई अंतर्दशाएँ अपनी सही लंबाई रखती हैं।

जन्म समय और दशा की सटीकता

दशा की हर तिथि जन्म के क्षण के चंद्र-अंश से निकलती है। इस कुंडली में चंद्रमा 11.89° प्रतिदिन, यानी 0.496° प्रति घंटा चल रहा था। एक नक्षत्र 13°20′ का है, इसलिए जन्म समय में एक घंटे की चूक पहली महादशा (गुरु, 16 वर्ष) के शेष भाग को लगभग 217 दिन बदल देती है — और उसके बाद की हर तिथि उतनी ही खिसकती है, क्योंकि बाद की दशाएँ पूरी लंबाई की होती हैं।

चंद्रमा की गति 11.89° प्रतिदिन पर
जन्म के समय की महादशाहर घंटे की चूक पर तिथियों का खिसकना (दिन)
केतु95
शुक्र272
सूर्य81
चंद्र136
मंगल95
राहु244
गुरु217
शनि258
बुध231

अलग-अलग कैलकुलेटर में दशा तिथियाँ क्यों अलग आती हैं

अयनांश। निरयन चंद्र-अंश अयनांश पर निर्भर है। यह पेज लाहिड़ी (चित्रापक्ष) अयनांश लेता है, जो भारत में सबसे प्रचलित है। कोई दूसरा अयनांश चंद्रमा को कुछ कला आगे-पीछे कर देता है, और दशा तिथियाँ कुछ दिन खिसक जाती हैं।

वर्ष की लंबाई। यहाँ एक दशा-वर्ष 365.25 दिन का है। कुछ गणनाएँ 360 दिन का सावन वर्ष लेती हैं, और कुछ केवल जन्मदिन की वर्षगाँठ गिनती हैं। यह परंपरा में विवादित बिंदु है। 360 दिन वाले वर्ष से हर वर्ष सवा पाँच दिन का अंतर जुड़ता है, जो 60 वर्ष में लगभग दस महीने बन जाता है।

ऐतिहासिक समय क्षेत्र। यह पेज जन्म स्थान का उस तारीख़ का वास्तविक घड़ी-अंतर लेता है। उदाहरण के लिए, 1942 से 1945 तक भारत की घड़ियाँ UTC से साढ़े छह घंटे आगे थीं, साढ़े पाँच नहीं। जो गणना हर तारीख़ पर +5:30 मान लेती है, वह उन वर्षों के जन्म को एक घंटा खिसका देती है — और जैसा ऊपर दिखाया, एक घंटा दशा तिथियों को महीनों तक बदल सकता है।

जन्म समय। सबसे बड़ा कारण प्रायः यही होता है। अस्पताल का दर्ज समय, परिवार की याद और बाद में सुधारा गया समय अक्सर आधे घंटे तक अलग होते हैं।

जन्म कुंडली

लग्न, भाव और ग्रह — वह कुंडली जिसके ग्रहों की दशा यहाँ चल रही है।

नवांश कुंडली

दशा स्वामी की ताक़त पढ़ने के लिए सबसे अधिक देखी जाने वाली वर्ग कुंडली।

महादशा कैलकुलेटर — सामान्य प्रश्न

महादशा कैलकुलेटर क्या करता है?

यह जन्म कुंडली की विंशोत्तरी दशाएँ निकालता है: 120 वर्ष के चक्र की नौ ग्रहों की महादशाएँ, उनकी अंतर्दशाएँ और प्रत्यंतर दशाएँ, आरंभ और समाप्ति की तिथियों के साथ। पहली दशा और उसका शेष भाग जन्म के समय चंद्रमा के सटीक नक्षत्र से तय होता है।

मेरी अभी कौन-सी महादशा चल रही है, कैसे जानें?

अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान भरें। परिणाम आज चल रही महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा को चिह्नित करता है और बताता है कि हर एक कब समाप्त होगी।

महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा में क्या अंतर है?

ये एक ही घड़ी के तीन स्तर हैं। महादशा 6 से 20 वर्ष की होती है। हर महादशा ग्रहों के वर्षों के अनुपात में नौ अंतर्दशाओं में बँटती है, और हर अंतर्दशा इसी नियम से नौ प्रत्यंतर दशाओं में।

जन्म के समय दशा शेष कैसे निकाला जाता है?

जन्म नक्षत्र का जितना भाग चंद्रमा ने अभी पार नहीं किया, उस अनुपात को नक्षत्र स्वामी के महादशा वर्षों से गुणा करें। यही जीवन की पहली दशा है; उसके बाद की हर दशा पूरी चलती है।

क्या बिना जन्म समय के महादशा निकल सकती है?

हाँ। बॉक्स चुनने पर कुंडली सूर्योदय के लिए बनती है, जो पारंपरिक विकल्प है। फिर पेज उस दिन के हर मिनट के लिए गणना दोबारा करता है और बताता है कि कौन-सी दशा पक्की है और तिथियाँ कितनी खिसक सकती हैं। चंद्रमा हर घंटे लगभग आधा अंश चलता है, इसलिए तिथियाँ महीनों तक बदल सकती हैं।

दूसरी वेबसाइट पर मेरी दशा तिथियाँ अलग क्यों आती हैं?

आम कारण हैं: जन्म समय, अयनांश, दशा-वर्ष की लंबाई (यहाँ 365.25 दिन; कुछ गणनाएँ 360 दिन लेती हैं), और पुरानी तारीख़ों पर लगाया गया समय क्षेत्र। हर कारण इसी पेज पर समझाया गया है।

सबसे लंबी महादशा किसकी होती है?

शुक्र की, 20 वर्ष। शनि 19, राहु 18, बुध 17, गुरु 16, चंद्र 10, केतु और मंगल 7-7, और सूर्य 6 वर्ष।

योगिनी दशा क्या है?

एक दूसरी, छोटी दशा पद्धति: आठ योगिनियाँ, हर एक 1 से 8 वर्ष, कुल 36 वर्ष का चक्र, यह भी चंद्रमा के नक्षत्र से शुरू होता है। परिणाम में इसका अलग टैब है।

क्या यह कैलकुलेटर बताता है कि दशा में क्या होगा?

नहीं। यह दशाओं की गणना करता है और दिखाता है कि चल रही दशा का ग्रह आपकी कुंडली में कहाँ बैठा है। दशा का फल पूरी कुंडली पर निर्भर करता है, और एक वाक्य उसे ईमानदारी से नहीं कह सकता।