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विंशोत्तरी दशा

सूर्य की महादशा

शुक्र → सूर्य → चंद्र

9 अंतर्दशाएँ

6 वर्ष

विंशोत्तरी दशा में सूर्य की महादशा 6 वर्ष चलती है — नौ में सबसे छोटी। यह शुक्र की महादशा के बाद आती है और इसके बाद चंद्र की आती है; जिनका जन्म-चंद्र कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी या उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में हो, उनका जीवन इसी महादशा से शुरू होता है।

अवधि
6 वर्ष
चक्र में स्थान
शुक्र → सूर्य → चंद्र
इसके नक्षत्र
कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा
अंतर्दशाएँ
9

शास्त्रीय ग्रंथ क्या कहते हैं

सूर्य की महादशा विंशोत्तरी चक्र की सबसे छोटी दशा है, और ग्रंथ इसका फल सूर्य के बल से जोड़ते हैं: बली हो तो वे पहचान, अधिकार, सरकार और वरिष्ठों की कृपा और ओज पढ़ते हैं; निर्बल या पीड़ित हो तो इसे अधिकारियों या पिता से टकराव, गर्मी से जुड़ी शिकायतों और अहंकार पर चोट से जोड़ते हैं। इसके विषय हैं नेतृत्व, पिता, सरकार और जीवन-शक्ति।

सूर्य महादशा की नौ अंतर्दशाएँ

हर अंतर्दशा की अवधि = महादशा के वर्ष × अंतर्दशा स्वामी के वर्ष ÷ 120, और क्रम सूर्य से ही शुरू होता है। अवधि पारंपरिक तालिकाओं की तरह (12 माह, 30 दिन का माह) दी है; दशा कैलकुलेटर जन्म के अनुसार हर एक की सही तारीख़ देता है।

सूर्य महादशा की अंतर्दशाएँ, क्रम से
अंतर्दशाअवधिवर्षकब तक
सूर्य – सूर्य3 माह 18 दिन0.303 माह 18 दिन
सूर्य – चंद्र6 माह0.509 माह 18 दिन
सूर्य – मंगल4 माह 6 दिन0.351 वर्ष 1 माह 24 दिन
सूर्य – राहु10 माह 24 दिन0.902 वर्ष 18 दिन
सूर्य – गुरु9 माह 18 दिन0.802 वर्ष 10 माह 6 दिन
सूर्य – शनि11 माह 12 दिन0.953 वर्ष 9 माह 18 दिन
सूर्य – बुध10 माह 6 दिन0.854 वर्ष 7 माह 24 दिन
सूर्य – केतु4 माह 6 दिन0.355 वर्ष
सूर्य – शुक्र1 वर्ष1.006 वर्ष

हर लग्न के लिए यह क्या जगाती है

महादशा उन भावों के विषय लाती है जिनका उसका स्वामी है। कौन से भाव, यह लग्न पर निर्भर है:

बारह लग्नों के लिए सूर्य की महादशा
लग्नकिन भावों का स्वामीशास्त्रीय भूमिकाकिन विषयों को आगे लाती है
मेष5त्रिकोणेश — शुभसंतान और बुद्धि
वृषभ4केंद्रेश — स्थिति के अनुसार फलघर, माता और संपत्ति
मिथुन3तीसरे या ग्यारहवें का स्वामी — मिश्रितपराक्रम और भाई-बहन
कर्क2द्वितीयेश — धन और परिवारधन, वाणी और परिवार
सिंह1लग्नेश — जहाँ भी हो, शुभव्यक्तित्व और स्वास्थ्य
कन्या12दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेव्यय और विदेश
तुला11तीसरे या ग्यारहवें का स्वामी — मिश्रितआय और लाभ
वृश्चिक10केंद्रेश — स्थिति के अनुसार फलकरियर और प्रतिष्ठा
धनु9त्रिकोणेश — शुभभाग्य और पिता
मकर8दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेआयु और अचानक बदलाव
कुंभ7केंद्रेश — स्थिति के अनुसार फलविवाह और जीवनसाथी
मीन6दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेशत्रु, ऋण और रोग

जिस भाव में यह बैठा है

सूर्य महादशा में उपाय

  • सूर्य का मंत्र जपें: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — रविवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 2 माला (216 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 7,000 जप पूरे होते हैं।
  • सूर्य का दान करें. गेहूँ, गुड़, ताँबा का दान रविवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी वृद्ध पुरुष या पितृ-तुल्य व्यक्ति को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • सूर्य के लिए दैनिक आचरण. सूर्योदय पर सूर्य को जल अर्पित करें; पिता और अधिकारियों का सम्मान करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

नौ ग्रहों के उपाय · सूर्य का पूरा मंत्र

अपनी दशा देखें

आप किस महादशा में हैं, और सूर्य की महादशा आपके लिए कब शुरू या ख़त्म होती है, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र पर निर्भर है। दशा कैलकुलेटर हर अवधि तारीख़ों के साथ देता है।

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दूसरी महादशाएँ

सामान्य प्रश्न

सूर्य की महादशा कितने साल की होती है?

6 वर्ष, विंशोत्तरी दशा के 120 वर्ष के चक्र में।

सूर्य की महादशा में अंतर्दशाओं का क्रम क्या है?

सूर्य → चंद्र → मंगल → राहु → गुरु → शनि → बुध → केतु → शुक्र। पहली अंतर्दशा सूर्य की अपनी होती है (3 माह 18 दिन)।

क्या सूर्य की महादशा शुभ है या अशुभ?

यह कुंडली में सूर्य की स्थिति पर निर्भर है — किस भाव में है, किस राशि में, किस लग्न के लिए किन भावों का स्वामी है। ऊपर की तालिकाएँ यही दिखाती हैं।

कैसे जानें कि सूर्य की महादशा चल रही है?

दशा कैलकुलेटर में जन्म तिथि, समय और स्थान डालें; वह हर महादशा और अंतर्दशा तारीख़ों के साथ देता है।