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विंशोत्तरी दशा

शुक्र की महादशा

केतु → शुक्र → सूर्य

9 अंतर्दशाएँ

20 वर्ष

विंशोत्तरी दशा में शुक्र की महादशा 20 वर्ष चलती है — नौ में सबसे लंबी। यह केतु की महादशा के बाद आती है और इसके बाद सूर्य की आती है; जिनका जन्म-चंद्र भरणी, पूर्वा फाल्गुनी या पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में हो, उनका जीवन इसी महादशा से शुरू होता है।

अवधि
20 वर्ष
चक्र में स्थान
केतु → शुक्र → सूर्य
इसके नक्षत्र
भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा
अंतर्दशाएँ
9

शास्त्रीय ग्रंथ क्या कहते हैं

शुक्र की महादशा चक्र की सबसे लंबी दशा है और संबंध, विवाह, सुख, वाहन, कला, विलास और धन लाती है। बली हो तो ग्रंथ इसे सुख और समृद्धि की लंबी अवधि पढ़ते हैं; पीड़ित हो तो वे इसे भोग में अति, संबंधों में तनाव और प्रजनन या मूत्र तंत्र की शिकायतों से जोड़ते हैं।

शुक्र महादशा की नौ अंतर्दशाएँ

हर अंतर्दशा की अवधि = महादशा के वर्ष × अंतर्दशा स्वामी के वर्ष ÷ 120, और क्रम शुक्र से ही शुरू होता है। अवधि पारंपरिक तालिकाओं की तरह (12 माह, 30 दिन का माह) दी है; दशा कैलकुलेटर जन्म के अनुसार हर एक की सही तारीख़ देता है।

शुक्र महादशा की अंतर्दशाएँ, क्रम से
अंतर्दशाअवधिवर्षकब तक
शुक्र – शुक्र3 वर्ष 4 माह3.333 वर्ष 4 माह
शुक्र – सूर्य1 वर्ष1.004 वर्ष 4 माह
शुक्र – चंद्र1 वर्ष 8 माह1.676 वर्ष
शुक्र – मंगल1 वर्ष 2 माह1.177 वर्ष 2 माह
शुक्र – राहु3 वर्ष3.0010 वर्ष 2 माह
शुक्र – गुरु2 वर्ष 8 माह2.6712 वर्ष 10 माह
शुक्र – शनि3 वर्ष 2 माह3.1716 वर्ष
शुक्र – बुध2 वर्ष 10 माह2.8318 वर्ष 10 माह
शुक्र – केतु1 वर्ष 2 माह1.1720 वर्ष

हर लग्न के लिए यह क्या जगाती है

महादशा उन भावों के विषय लाती है जिनका उसका स्वामी है। कौन से भाव, यह लग्न पर निर्भर है:

बारह लग्नों के लिए शुक्र की महादशा
लग्नकिन भावों का स्वामीशास्त्रीय भूमिकाकिन विषयों को आगे लाती है
मेष2, 7केंद्रेश — स्थिति के अनुसार फलधन, वाणी और परिवार; विवाह और जीवनसाथी
वृषभ1, 6लग्नेश — जहाँ भी हो, शुभव्यक्तित्व और स्वास्थ्य; शत्रु, ऋण और रोग
मिथुन5, 12त्रिकोणेश — शुभसंतान और बुद्धि; व्यय और विदेश
कर्क4, 11तीसरे या ग्यारहवें का स्वामी — मिश्रितघर, माता और संपत्ति; आय और लाभ
सिंह3, 10तीसरे या ग्यारहवें का स्वामी — मिश्रितपराक्रम और भाई-बहन; करियर और प्रतिष्ठा
कन्या2, 9त्रिकोणेश — शुभधन, वाणी और परिवार; भाग्य और पिता
तुला1, 8लग्नेश — जहाँ भी हो, शुभव्यक्तित्व और स्वास्थ्य; आयु और अचानक बदलाव
वृश्चिक7, 12दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेविवाह और जीवनसाथी; व्यय और विदेश
धनु6, 11दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेशत्रु, ऋण और रोग; आय और लाभ
मकर5, 10योगकारक — केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामीसंतान और बुद्धि; करियर और प्रतिष्ठा
कुंभ4, 9योगकारक — केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामीघर, माता और संपत्ति; भाग्य और पिता
मीन3, 8दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेपराक्रम और भाई-बहन; आयु और अचानक बदलाव

जिस भाव में यह बैठा है

शुक्र महादशा में उपाय

  • शुक्र का मंत्र जपें: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — शुक्रवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 4 माला (432 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 16,000 जप पूरे होते हैं।
  • शुक्र का दान करें. सफ़ेद मिठाई, श्वेत वस्त्र, इत्र का दान शुक्रवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी युवती या कलाकार को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • शुक्र के लिए दैनिक आचरण. स्त्रियों का सम्मान करें; ज़रूरतमंद महिलाओं को वस्त्र या शृंगार-सामग्री दान करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

नौ ग्रहों के उपाय · शुक्र का पूरा मंत्र

अपनी दशा देखें

आप किस महादशा में हैं, और शुक्र की महादशा आपके लिए कब शुरू या ख़त्म होती है, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र पर निर्भर है। दशा कैलकुलेटर हर अवधि तारीख़ों के साथ देता है।

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दूसरी महादशाएँ

सामान्य प्रश्न

शुक्र की महादशा कितने साल की होती है?

20 वर्ष, विंशोत्तरी दशा के 120 वर्ष के चक्र में।

शुक्र की महादशा में अंतर्दशाओं का क्रम क्या है?

शुक्र → सूर्य → चंद्र → मंगल → राहु → गुरु → शनि → बुध → केतु। पहली अंतर्दशा शुक्र की अपनी होती है (3 वर्ष 4 माह)।

क्या शुक्र की महादशा शुभ है या अशुभ?

यह कुंडली में शुक्र की स्थिति पर निर्भर है — किस भाव में है, किस राशि में, किस लग्न के लिए किन भावों का स्वामी है। ऊपर की तालिकाएँ यही दिखाती हैं।

कैसे जानें कि शुक्र की महादशा चल रही है?

दशा कैलकुलेटर में जन्म तिथि, समय और स्थान डालें; वह हर महादशा और अंतर्दशा तारीख़ों के साथ देता है।