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विंशोत्तरी दशा

मंगल की महादशा

चंद्र → मंगल → राहु

9 अंतर्दशाएँ

7 वर्ष

विंशोत्तरी दशा में मंगल की महादशा 7 वर्ष चलती है — केतु की महादशा की तरह सात वर्ष की, सूर्य के बाद सबसे छोटी। यह चंद्र की महादशा के बाद आती है और इसके बाद राहु की आती है; जिनका जन्म-चंद्र मृगशिरा, चित्रा या धनिष्ठा नक्षत्र में हो, उनका जीवन इसी महादशा से शुरू होता है।

अवधि
7 वर्ष
चक्र में स्थान
चंद्र → मंगल → राहु
इसके नक्षत्र
मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा
अंतर्दशाएँ
9

शास्त्रीय ग्रंथ क्या कहते हैं

मंगल की महादशा कर्म की अवधि है: संपत्ति, भूमि, भाई-बहन, तकनीकी काम और साहस। बली हो तो ग्रंथ उपलब्धि, संपत्ति और प्रतिद्वंद्वियों पर विजय पढ़ते हैं; पीड़ित हो तो वे इसे टकराव, भूमि-विवाद, भाई-बहनों से झगड़े और चोट के बढ़े जोखिम से जोड़ते हैं।

मंगल महादशा की नौ अंतर्दशाएँ

हर अंतर्दशा की अवधि = महादशा के वर्ष × अंतर्दशा स्वामी के वर्ष ÷ 120, और क्रम मंगल से ही शुरू होता है। अवधि पारंपरिक तालिकाओं की तरह (12 माह, 30 दिन का माह) दी है; दशा कैलकुलेटर जन्म के अनुसार हर एक की सही तारीख़ देता है।

मंगल महादशा की अंतर्दशाएँ, क्रम से
अंतर्दशाअवधिवर्षकब तक
मंगल – मंगल4 माह 27 दिन0.414 माह 27 दिन
मंगल – राहु1 वर्ष 18 दिन1.051 वर्ष 5 माह 15 दिन
मंगल – गुरु11 माह 6 दिन0.932 वर्ष 4 माह 21 दिन
मंगल – शनि1 वर्ष 1 माह 9 दिन1.113 वर्ष 6 माह
मंगल – बुध11 माह 27 दिन0.994 वर्ष 5 माह 27 दिन
मंगल – केतु4 माह 27 दिन0.414 वर्ष 10 माह 24 दिन
मंगल – शुक्र1 वर्ष 2 माह1.176 वर्ष 24 दिन
मंगल – सूर्य4 माह 6 दिन0.356 वर्ष 5 माह
मंगल – चंद्र7 माह0.587 वर्ष

हर लग्न के लिए यह क्या जगाती है

महादशा उन भावों के विषय लाती है जिनका उसका स्वामी है। कौन से भाव, यह लग्न पर निर्भर है:

बारह लग्नों के लिए मंगल की महादशा
लग्नकिन भावों का स्वामीशास्त्रीय भूमिकाकिन विषयों को आगे लाती है
मेष1, 8लग्नेश — जहाँ भी हो, शुभव्यक्तित्व और स्वास्थ्य; आयु और अचानक बदलाव
वृषभ7, 12दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेविवाह और जीवनसाथी; व्यय और विदेश
मिथुन6, 11दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेशत्रु, ऋण और रोग; आय और लाभ
कर्क5, 10योगकारक — केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामीसंतान और बुद्धि; करियर और प्रतिष्ठा
सिंह4, 9योगकारक — केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामीघर, माता और संपत्ति; भाग्य और पिता
कन्या3, 8दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेपराक्रम और भाई-बहन; आयु और अचानक बदलाव
तुला2, 7केंद्रेश — स्थिति के अनुसार फलधन, वाणी और परिवार; विवाह और जीवनसाथी
वृश्चिक1, 6लग्नेश — जहाँ भी हो, शुभव्यक्तित्व और स्वास्थ्य; शत्रु, ऋण और रोग
धनु5, 12त्रिकोणेश — शुभसंतान और बुद्धि; व्यय और विदेश
मकर4, 11तीसरे या ग्यारहवें का स्वामी — मिश्रितघर, माता और संपत्ति; आय और लाभ
कुंभ3, 10तीसरे या ग्यारहवें का स्वामी — मिश्रितपराक्रम और भाई-बहन; करियर और प्रतिष्ठा
मीन2, 9त्रिकोणेश — शुभधन, वाणी और परिवार; भाग्य और पिता

जिस भाव में यह बैठा है

मंगल महादशा में उपाय

  • मंगल का मंत्र जपें: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — मंगलवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 3 माला (324 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 10,000 जप पूरे होते हैं।
  • मंगल का दान करें. मसूर दाल, गुड़, ताँबा का दान मंगलवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी सैनिक, खिलाड़ी या छोटे भाई को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • मंगल के लिए दैनिक आचरण. नीम का पौधा लगाएँ; भाई-बहनों की सेवा करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

नौ ग्रहों के उपाय · मंगल का पूरा मंत्र

अपनी दशा देखें

आप किस महादशा में हैं, और मंगल की महादशा आपके लिए कब शुरू या ख़त्म होती है, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र पर निर्भर है। दशा कैलकुलेटर हर अवधि तारीख़ों के साथ देता है।

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दूसरी महादशाएँ

सामान्य प्रश्न

मंगल की महादशा कितने साल की होती है?

7 वर्ष, विंशोत्तरी दशा के 120 वर्ष के चक्र में।

मंगल की महादशा में अंतर्दशाओं का क्रम क्या है?

मंगल → राहु → गुरु → शनि → बुध → केतु → शुक्र → सूर्य → चंद्र। पहली अंतर्दशा मंगल की अपनी होती है (4 माह 27 दिन)।

क्या मंगल की महादशा शुभ है या अशुभ?

यह कुंडली में मंगल की स्थिति पर निर्भर है — किस भाव में है, किस राशि में, किस लग्न के लिए किन भावों का स्वामी है। ऊपर की तालिकाएँ यही दिखाती हैं।

कैसे जानें कि मंगल की महादशा चल रही है?

दशा कैलकुलेटर में जन्म तिथि, समय और स्थान डालें; वह हर महादशा और अंतर्दशा तारीख़ों के साथ देता है।