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मंगल · पंचम भाव (संतान/विद्या)

मंगल पांचवें भाव में

  • त्रिकोण

संतान और बुद्धि के भाव में मंगल तीक्ष्ण, प्रतिस्पर्धी बुद्धि और जोखिम का स्वाद देता है — और शास्त्रीय ग्रंथ दोनों पर सावधान हैं: संतान या प्रसव से जुड़ी चिंताएँ, जल्दबाज़ी का सट्टा और पेट की गर्मी।

भाव
पंचम भाव (संतान/विद्या) — संतान, बुद्धि, रोमांस, रचनात्मकता, सट्टा, पूर्व जन्म के कर्म (पूर्व पुण्य)।
ग्रह
मंगल: नैसर्गिक पाप ग्रह — साहस, ऊर्जा, भाई-बहन, भूमि, तकनीकी कौशल और संघर्ष का कारक
भाव का प्रकार
त्रिकोण भाव
दिग्बल
आंशिक — सबसे बली दसवें भाव में
यहाँ से दृष्टि
आठवाँ, ग्यारहवाँ, बारहवाँ भाव (अपने से चौथा, सातवाँ, आठवाँ)
इसकी महादशा
7 वर्ष

शास्त्रीय ग्रंथ क्या कहते हैं

यही ऊर्जा रणनीति, प्रतियोगी परीक्षाओं, खेल और इंजीनियरिंग में काम आती है।

आवेग में सट्टे से बचें और प्रतिस्पर्धा की भावना को पढ़ाई या खेल में लगाएँ; पारिवारिक विषयों में धैर्य ही व्यावहारिक उत्तर है।

राशि से कैसे बदलता है — हर लग्न के लिए

पांचवें भाव की राशि लग्न पर निर्भर है, और उसी से मंगल का बल बदलता है। कन्या लग्न में यहाँ मकर आती है, जहाँ मंगल उच्च है; मीन लग्न में कर्क, जहाँ यह नीच है। योगकारक: कर्क, सिंह लग्न।

हर लग्न में मंगल पांचवें भाव में
लग्नइस भाव की राशिबलकिन भावों का स्वामीयोग और भूमिका
मेषसिंहमित्र राशि1 (व्यक्तित्व और स्वास्थ्य), 8 (आयु और अचानक बदलाव)लग्नेश
वृषभकन्याशत्रु राशि7 (विवाह और जीवनसाथी), 12 (व्यय और विदेश)—
मिथुनतुलासम राशि6 (शत्रु, ऋण और रोग), 11 (आय और लाभ)—
कर्कवृश्चिकस्वराशि5 (संतान और बुद्धि), 10 (करियर और प्रतिष्ठा)योगकारक — केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामी
सिंहधनुमित्र राशि4 (घर, माता और संपत्ति), 9 (भाग्य और पिता)योगकारक — केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामी
कन्यामकरउच्च3 (पराक्रम और भाई-बहन), 8 (आयु और अचानक बदलाव)—
तुलाकुंभसम राशि2 (धन, वाणी और परिवार), 7 (विवाह और जीवनसाथी)—
वृश्चिकमीनमित्र राशि1 (व्यक्तित्व और स्वास्थ्य), 6 (शत्रु, ऋण और रोग)लग्नेश
धनुमेषस्वराशि5 (संतान और बुद्धि), 12 (व्यय और विदेश)—
मकरवृषभसम राशि4 (घर, माता और संपत्ति), 11 (आय और लाभ)—
कुंभमिथुनशत्रु राशि3 (पराक्रम और भाई-बहन), 10 (करियर और प्रतिष्ठा)—
मीनकर्कनीच2 (धन, वाणी और परिवार), 9 (भाग्य और पिता)नीच — नीचभंग देखें

फल कब मिलता है

मंगल की महादशा 7 वर्ष चलती है। यह स्थिति सबसे स्पष्ट तब बोलती है — मंगल की महादशा में, दूसरी महादशाओं के भीतर इसकी अंतर्दशा में, और पांचवें भाव के स्वामी की दशा में। शनि और गुरु का गोचर जब इस भाव या जन्म के ग्रह पर से गुज़रता है, तब भी यह जागती है।

मंगल की महादशा · अपनी दशा देखें — दशा कैलकुलेटर

उपाय

  • मंगल का मंत्र जपें: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — मंगलवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 3 माला (324 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 10,000 जप पूरे होते हैं।
  • मंगल का दान करें. मसूर दाल, गुड़, ताँबा का दान मंगलवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी सैनिक, खिलाड़ी या छोटे भाई को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • मंगल के लिए दैनिक आचरण. नीम का पौधा लगाएँ; भाई-बहनों की सेवा करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

नौ ग्रहों के उपाय · मंगल का पूरा मंत्र

अपनी कुंडली में देखें

कुंडली बनाएँ और भावों वाले कार्ड में पांचवें भाव का कार्ड देखें: वह बताता है कि वहाँ कौन-सी राशि है, उसका स्वामी कहाँ है और कौन से ग्रह बैठे हैं — यानी मंगल सचमुच इस भाव में है या नहीं, और किस राशि में। ऊपर की तालिका की वह पंक्ति आपके लग्न की है।

अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँनमूना कुंडली पर इंटरैक्टिव कुंडली देखें

पांचवें भाव में दूसरे ग्रह

दूसरे भावों में मंगल

सामान्य प्रश्न

क्या पांचवें भाव में मंगल शुभ है या अशुभ?

अकेले इससे कोई फ़ैसला नहीं होता। आवेग में सट्टे से बचें और प्रतिस्पर्धा की भावना को पढ़ाई या खेल में लगाएँ; पारिवारिक विषयों में धैर्य ही व्यावहारिक उत्तर है। कन्या लग्न में यहाँ यह उच्च है। मीन लग्न में नीच।

किस लग्न में पांचवें भाव का मंगल सबसे अच्छा फल देता है?

कर्क (स्वराशि, योगकारक); सिंह (योगकारक); कन्या (उच्च); धनु (स्वराशि) लग्न। पूरी तालिका ऊपर है।

पांचवें भाव का मंगल फल कब देता है?

मंगल की महादशा (7 वर्ष) में, दूसरी दशाओं में इसकी अंतर्दशा में, और इस भाव के स्वामी की दशा में।

पांचवें भाव के मंगल के उपाय क्या हैं?

मंगल के मुफ़्त अभ्यास — बीज मंत्र, उसके दिन का दान और एक दैनिक आचरण — ऊपर दिए हैं। केवल एक स्थिति देखकर कोई रत्न नहीं सुझाया जाता।