
संकल्प जनरेटर · पंचांग भरा हुआ
पूजा का संकल्प मंत्र
संकल्प मंत्र पूजा से पहले बोला जाने वाला प्रण है, जिसमें स्थान और समय पंचांग के नाम से बोले जाते हैं। आज (सोमवार, 26 अक्टूबर 2026) नई दिल्ली में सूर्योदय पर: विक्रम संवत् 2083, सिद्धार्थी संवत्सर, दक्षिणायन, शरद ऋतु, आश्विन मास, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा तिथि, सोमवार, अश्विनी नक्षत्र।
अपना संकल्प भरें
आपका नाम और गोत्र केवल इसी पेज के संकल्प में लिखे जाते हैं: न सहेजे जाते हैं, न पेज के पते में जाते हैं, न कहीं भेजे जाते हैं।
आश्विन पूर्णिमा
विक्रम संवत् 2083, सिद्धार्थी संवत्सर · दक्षिणायन · शरद ऋतु
नक्षत्र: अश्विनी
नई दिल्ली में आज का संकल्प, सूर्योदय (06:28) के पंचांग से:
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः।
श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे
जम्बूद्वीपे भारतवर्षे नई दिल्ली नगरे
२०८३ वैक्रमाब्दे सिद्धार्थी नामसंवत्सरे दक्षिणायने शरदृतौ
आश्विनमासे शुक्लपक्षे पूर्णिमातिथौ सोमवासरे अश्विनीनक्षत्रे
अमुक गोत्रोत्पन्नः अमुक नामाहं
ममोपात्तदुरितक्षयद्वारा श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं अमुकदेवस्य पूजनं करिष्ये।
Om Vishnurvishnurvishnuh
Shrimadbhagavato Mahapurushasya Vishnorajnaya Pravartamanasya Brahmanohni Dvitiyaparardhe Shrishvetavarahakalpe Vaivasvatamanvantare Ashtavimshatitame Kaliyuge Kaliprathamacharane
Jambudvipe Bharatavarshe New Delhi Nagare
2083 Vaikramabde Siddharthi Namasamvatsare Dakshinayane Sharadritau
Ashvinamase Shuklapakshe Purnimatithau Somavasare Ashvininakshatre
Amuka Gotrotpannah Amuka Namaham
Mamopattaduritakshayadvara Shriparameshvaraprityartham Amukadevasya Pujanam Karishye
सुनहरे शब्द इस दिन का पंचांग हैं। जहाँ “अमुक” है वहाँ अपना शब्द बोलें: अपना गोत्र, अपना नाम, और “अमुकदेवस्य” की जगह पूजा के देवता का नाम (गणेशदेवस्य; देवी के लिए लक्ष्मीदेव्याः)।
| स्थान | संकल्प में | पंचांग का मान |
|---|---|---|
| वर्ष (संवत्) | २०८३ वैक्रमाब्दे | विक्रम संवत् 2083 |
| संवत्सर | सिद्धार्थी नामसंवत्सरे | सिद्धार्थी |
| अयन | दक्षिणायने | दक्षिणायन |
| ऋतु | शरदृतौ | शरद |
| मास | आश्विनमासे | आश्विन (पूर्णिमांत) |
| पक्ष | शुक्लपक्षे | शुक्ल |
| तिथि | पूर्णिमातिथौ | पूर्णिमा |
| वार | सोमवासरे | सोमवार |
| नक्षत्र | अश्विनीनक्षत्रे | अश्विनी |
| स्थान | नई दिल्ली नगरे | नई दिल्ली |
ऊपर के शब्द सूर्योदय 06:28 के हैं। उसी दिन बाद में:
- तिथि 09:41 पर पूर्णिमा से कृष्ण प्रतिपदा हो जाती है।
- नक्षत्र 17:41 पर अश्विनी से भरणी हो जाता है।
उस समय के बाद की पूजा में नया नाम बोला जाता है। फ़ॉर्म में पूजा का समय भरें, तो संकल्प उसी क्षण के लिए भर दिया जाएगा।
- स्नान के बाद पूजा के आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
- दाहिनी हथेली में थोड़ा जल, अक्षत (साबुत चावल) और एक फूल लें।
- संकल्प बोलें — जहाँ “अमुक” है वहाँ अपना गोत्र, अपना नाम और पूजा के देवता का नाम।
- “करिष्ये” कहकर जल भूमि पर या किसी पात्र में छोड़ दें, फिर पूजा आरंभ करें।
- “विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः” से “कलिप्रथमचरणे” तक: ब्रह्मा के दिन, श्वेतवाराह कल्प, वैवस्वत मन्वंतर और कलियुग के पहले चरण में — ब्रह्मांडीय समय में यह क्षण।
- “जम्बूद्वीपे भारतवर्षे … नगरे”: पृथ्वी पर स्थान, और आपका नगर।
- संवत्, संवत्सर, अयन, ऋतु, मास, पक्ष, तिथि, वार और नक्षत्र: पंचांग में आज का दिन।
- “… गोत्रोत्पन्नः … नामाहं”: मैं, इस गोत्र में जन्मा, इस नाम का। “ममोपात्तदुरितक्षयद्वारा श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं … पूजनं करिष्ये”: अपने किए पापों के क्षय के लिए, परमेश्वर की प्रसन्नता के लिए, मैं इस देवता का पूजन करूँगा/करूँगी।
- ढाँचा गीता प्रेस की “नित्यकर्म-पूजाप्रकाश” (पृष्ठ 171) का पूजा-संकल्प है, शब्दशः। अयन और नक्षत्र वहाँ से लिए गए हैं जहाँ गीता प्रेस उन्हें दुर्गासप्तशती के संकल्प में छापता है, और ऋतु कर्मकांड के लंबे संकल्प से। मास, तिथि और वार के शब्द उसी पुस्तक की सूची के हैं (प्रतिपद्, मंगल, बृहस्पति)।
- पुस्तक का “आर्यावर्तैकदेशे”, क्षेत्र या नदी का नाम, और “प्रातः/सायंकाले” यहाँ छोड़े गए हैं: वे क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदलते हैं। आपके परिवार में बोले जाते हों तो जोड़ लें।
- विशेष कामना से की गई पूजा में पुरोहित “श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं” से पहले कामना भी जोड़ते हैं।
- हर तिथि-शब्द इस साइट के पंचांग इंजन से आता है — वही जो पंचांग पेज छापता है: स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश, और चुने गए शहर का सूर्योदय।
- पूजा का समय न दें तो सूर्योदय के समय का पंचांग भरा जाता है; दें तो उसी क्षण की तिथि, नक्षत्र और मास।
- ऋतु चुने गए पंचांग के मास से ली जाती है, दो मास की एक ऋतु। कुछ पंचांग ऋतु सूर्य की राशि से गिनते हैं; ऐसे में आपके पंचांग का नाम अलग हो सकता है।
संकल्प मंत्र: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संकल्प मंत्र क्या है?
संकल्प पूजा से पहले लिया गया प्रण है। उसमें बोला जाता है कि पूजा कौन कर रहा है, कहाँ और कब — संवत्सर, अयन, ऋतु, मास, पक्ष, तिथि, वार और नक्षत्र के नाम से — और किस उद्देश्य से।
संकल्प कैसे लिया जाता है?
दाहिने हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प बोलें, और अंत में जल भूमि पर या किसी पात्र में छोड़ दें। कई परिवार इसके साथ पान का पत्ता या सुपारी भी रखते हैं; अपने परिवार की रीति मानें।
तिथि सूर्योदय की बोलें या पूजा के समय की?
पंचांग में दिन की तिथि वह होती है जो सूर्योदय पर चल रही हो। पर पूजा के समय तक तिथि बदल गई हो, तो अधिकतर पंडित उसी समय चल रही तिथि बोलते हैं। इसीलिए यह पेज बताता है कि दिन में तिथि कब बदलती है, और पूजा का समय भरने पर उसी क्षण का संकल्प देता है।
गोत्र न पता हो तो क्या बोलें?
प्रचलित परंपरा में जिसका गोत्र ज्ञात न हो, वह कश्यप गोत्र बोलता है। अपने परिवार के बड़ों या पुरोहित से पूछ लेना सबसे अच्छा है।
उत्तर और दक्षिण भारत के संकल्प में क्या अंतर है?
उत्तर भारत में मास पूर्णिमा पर पूरा होता है और वर्ष विक्रम संवत् से गिना जाता है; दक्षिण और पश्चिम भारत में मास अमावस्या पर पूरा होता है और शक संवत् चलता है, जिसके संवत्सर का नाम भी अलग होता है। फ़ॉर्म में अपना पंचांग चुनें।
क्या मेरा नाम और गोत्र सहेजा जाता है?
नहीं। वे केवल उस एक उत्तर में लिखे जाते हैं जो आपको लौटाया जाता है; न सहेजे जाते हैं, न पेज के पते में जाते हैं।