
शनि और राहु की जाँच
श्रापित दोष कैलकुलेटर
श्रापित दोष तब माना जाता है जब जन्म कुंडली में शनि और राहु एक ही राशि में हों; यह आधुनिक नाम है, शास्त्रीय ग्रंथों में नहीं मिलता। जन्म विवरण भरें और देखें कि आपकी कुंडली में यह युति है या नहीं, कितनी पास है, कौन-से परिहार हैं और इसका क्या अर्थ नहीं है।
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कैलकुलेटर के बारे में
श्रापित दोष कैलकुलेटर
- शनि और राहु की राशि और अंश से जाँच
- आपकी कुंडली के परिहार साफ़ दिखाता है
- जन्म विवरण केवल इस परिणाम के लिए, सहेजा नहीं जाता
राहु-केतु से जुड़े दूसरे दोष भी देखें: ग्रहण, गुरु चांडाल और काल सर्प दोष।
उदाहरण (14 फरवरी 1991, 13:45, नई दिल्ली): श्रापित दोष बनता है: शनि मकर में राहु के साथ है, 4.1° की दूरी पर।
उदाहरण: 14 फरवरी 1991, 13:45, नई दिल्ली
श्रापित दोष परिणाम
श्रापित दोष बनता है
श्रापित दोष बनता है: शनि मकर में राहु के साथ है, 4.1° की दूरी पर।
| ग्रह | राशि | भाव | राहु/केतु के साथ? |
|---|---|---|---|
| शनि | मकर | आठवें भाव | हाँ — राहु, 4.1° दूर |
| राहु | मकर | आठवें भाव | — |
इस कुंडली में परिहार की स्थितियाँ
- गुरु दूसरे भाव से शनि पर दृष्टि डालता है — गुरु की दृष्टि को परंपरा दोष का शमन मानती है।
- शनि मकर में अपनी राशि में है — बलवान ग्रह पर दोष का असर कम माना जाता है।
कुछ परंपराएँ इन्हें दोष का पूरा निवारण मानती हैं, कुछ केवल शमन। यह कैलकुलेटर इन्हें दिखाता है, घटाता नहीं।
यह योग आम है: लगभग हर सोलह में से एक कुंडली में मिलता है। इसे निजी दुर्भाग्य का प्रमाण न मानें।
यह कैलकुलेटर श्रापित दोष कैसे तय करता है
- जन्म तिथि, समय और स्थान से शनि और राहु की निरयन (लाहिड़ी) स्थिति और लग्न से संपूर्ण राशि भाव निकाले जाते हैं।
- शनि और राहु एक ही राशि में हों तो श्रापित दोष बताया जाता है।
- दोनों के बीच के अंश दिखाए जाते हैं: पास की युति अधिक प्रभावी मानी जाती है।
- ज्योतिषियों के बताए परिहार भी जाँचे जाते हैं: गुरु का शनि के साथ होना या उस पर दृष्टि, और शनि अपनी राशि (मकर, कुम्भ) में या उच्च (तुला) का।
- ऐप का दोष कार्ड यही नियम इसी इंजन से लगाता है।
श्रापित दोष पर ज्योतिषी अलग क्यों बोलते हैं
- नया नाम: श्रापित का अर्थ है शाप पाया हुआ। यह शब्द बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, फलदीपिका या जातक पारिजात में नहीं मिलता; काल सर्प की तरह यह पिछली सदी में प्रचलित हुआ।
- दृष्टि: कुछ लोग राहु पर शनि की दृष्टि (तीसरी, सातवीं या दसवीं) भी गिनते हैं। परिणाम उसे बताता है, पर गिनता नहीं।
- पिछले जन्म की कहानी: यह युति पिछले जन्म का शाप दिखाती है — यह आधुनिक व्याख्या है, शास्त्रीय नियम नहीं।
- मध्यम या स्पष्ट राहु: राहु की दो गणनाएँ लगभग 1.5° तक अलग हो सकती हैं; राशि की सीमा पर बैठी युति इससे बदल सकती है।
श्रापित दोष का क्या अर्थ नहीं है
नाम के बावजूद यह किसी शाप का प्रमाण नहीं, और न गरीबी, संतानहीनता या टूटे विवाह की भविष्यवाणी। शनि और राहु दोनों धीमे चलते हैं, इसलिए मिलने पर महीनों साथ रहते हैं, और लगभग हर सोलह में से एक कुंडली में यह युति मिलती है। इसे पढ़ना ही हो तो धैर्य और लगातार मेहनत की सीख की तरह पढ़ें — जो शनि की अपनी सीख है।
श्रापित दोष में अपनाए जाने वाले उपाय
पारंपरिक उपाय मुफ़्त हैं: शनिवार को हनुमान चालीसा या शनि मंत्र, बड़ों और मेहनत का काम करने वालों की सेवा, और ईमानदार, धैर्य भरा प्रयास। पैसे लेकर कराई जाने वाली श्रापित पूजा वैकल्पिक है, ज़रूरी नहीं।
श्रापित दोष — सामान्य प्रश्न
श्रापित दोष क्या है?
जन्म कुंडली में शनि और राहु एक ही राशि में हों तो उसे श्रापित दोष कहते हैं। नाम का अर्थ शाप पाया हुआ है, पर यह आधुनिक शब्द है जिसे शास्त्रीय ग्रंथ नहीं बताते।
कुंडली में श्रापित दोष कैसे देखें?
ऊपर जन्म तिथि, सटीक जन्म समय और जन्म स्थान भरें। कैलकुलेटर देखता है कि शनि और राहु एक राशि में हैं या नहीं, कितने पास हैं और कौन-से परिहार लागू होते हैं।
क्या श्रापित दोष शास्त्रों में है?
नहीं। यह बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, फलदीपिका और जातक पारिजात में नहीं है, और काल सर्प की तरह पिछली सदी में प्रचलित हुआ।
श्रापित दोष किससे कम होता है?
ज्योतिषी जिन स्थितियों को बताते हैं वे हैं गुरु का शनि के साथ होना या उस पर दृष्टि, और शनि का अपनी राशि मकर या कुम्भ में, या तुला में उच्च का होना।
श्रापित दोष कितना आम है?
लगभग हर सोलह में से एक कुंडली में। शनि और राहु दोनों धीमे हैं, इसलिए मिलने पर महीनों साथ रहते हैं, और उन महीनों में जन्मे सभी लोगों की कुंडली में यह युति होती है।
श्रापित दोष के उपाय क्या हैं?
पारंपरिक उपाय मुफ़्त हैं: शनिवार को हनुमान चालीसा या शनि मंत्र, बड़ों और मेहनत का काम करने वालों की सेवा, और धैर्य भरा प्रयास। पैसे वाली पूजा वैकल्पिक है।