ग्रह-घंटा
बुध होरा
इसे आमतौर पर पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार से जोड़ा जाता है।
रोज़ का वैदिक पंचांग · जयपुर
देखें कि दिन का स्वभाव कैसा है, अभी क्या चल रहा है, और कौन-सी आम समय-अवधियाँ अनुकूल हैं या जिनसे बचना बेहतर है। नीचे का हर समय जयपुर के लिए निकाला गया है, किसी तय राष्ट्रीय तालिका से उठाया नहीं गया।
दिन भर की तिथि
इस दिन को त्रयोदशी कहा जाता है क्योंकि सूर्योदय पर वही तिथि चल रही थी, और वैदिक दिन का नाम इसी से पड़ता है। अभी चतुर्दशी चल रही है। दोनों सही हैं — ये अलग-अलग सवालों के जवाब हैं।
भारत के बाहर
जयपुर में अभी
होरा बताती है कि इस घंटे में किस तरह का काम बैठता है। चौघड़िया पूरे दिन की योजना के लिए मोटा संकेत देता है।
ग्रह-घंटा
इसे आमतौर पर पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार से जोड़ा जाता है।
चौघड़िया
व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है।
ज़रूरी समय-जाँच
इस समय राहु काल, यमगण्ड और गुलिक नहीं चल रहे। कोई ज़रूरी काम शुरू करने से पहले आगे की अवधियाँ देख लें।
अभी चल रही होरा और चौघड़िया सूर्योदय-से-सूर्योदय वाले वैदिक दिन के हिसाब से हैं।
पूरा वैदिक दिन एक नज़र में
हर पंक्ति एक ही सूर्योदय-से-सूर्योदय पैमाने पर है। जो अवधियाँ एक सीध में हैं, वे उसी समय साथ चल रही हैं।
कुछ होरा खंड चौड़े क्यों हैं: दिन और रात अलग-अलग बाँटे जाते हैं, इसलिए उनकी होरा की अवधि बराबर नहीं होती।
दिन का मुहूर्त-निर्णय
मुहूर्त का अंक कोई राय नहीं, नाम से गिने हुए नियमों का जोड़ है। जो भी नियम लगा, वह अपने भार के साथ नीचे दिया है — ताकि कम अंक को सिर्फ़ मान न लेना पड़े, पढ़ा जा सके।
दिन की कुल शक्ति
7/10
शुभ
विशेष पंचांग योग
दिशा शूल
बुधवार को उत्तर दिशा की ओर निकलने से परंपरा में बचा जाता है। यह सिर्फ़ वार से तय होता है, ग्रहों की स्थिति से नहीं निकाला जाता — इसलिए हर शहर में एक ही रहता है।
परिहार निकलने से पहले धनिया ले लें।
| नियम | इस दिन का मान | भार | यह क्यों गिना जाता है |
|---|---|---|---|
| वार | बुधवार | +1 | दिन के स्वामी बुध हैं — नई शुरुआत के लिए अनुकूल |
| तिथि | त्रयोदशी · शुक्ल | +2 | जया तिथि — प्रतिस्पर्धा, दावे और शुरुआत के लिए अनुकूल |
| नक्षत्र | श्रवण | +1 | चर नक्षत्र — यात्रा, वाहन और जगह बदलने के लिए अनुकूल |
| नित्य योग | सौभाग्य | +1 | अनुकूल योग |
| करण | तैतिल | +1 | काम लायक करण |
सभी भारों को जोड़कर आधा किया जाता है और 0-10 के पैमाने पर रखा जाता है, ताकि कोई एक नियम अकेले पूरा पैमाना न भर दे। यही निर्णय ऐप के महीने वाले कैलेंडर में भी इसी तारीख़ के लिए दिखता है।
दिन की योजना बनाएँ
ये पंचांग के आम संकेत हैं। निजी मुहूर्त में यह भी देखा जाता है कि काम कौन-सा है और व्यक्ति की जन्म कुंडली क्या कहती है।
व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है।
गुरुवार
सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि।
गुरुवार
दोपहर की एक आम तौर पर अनुकूल खिड़की — जब विस्तार से मुहूर्त न निकाला जा सके तो ज़रूरी काम के लिए इसे लिया जाता है।
गुरुवार
व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है।
गुरुवार
परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है।
गुरुवार
A window traditionally left out of auspicious starts. Derived from the ruling nakshatra, so it moves every day.
गुरुवार
यात्रा, शुभ कार्यों और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए आमतौर पर इससे बचा जाता है।
गुरुवार
परंपरा में सेहत से जुड़े काम और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
गुरुवार
दिन के पाँच अंग
“पंचांग” का अर्थ है पाँच अंग। ये पाँचों मिलकर स्थानीय सूर्योदय के समय दिन का चंद्र और ग्रह-स्वभाव बताते हैं।
तिथि
चंद्र दिवस
चंद्रमा शुक्ल पक्ष में है और पूर्णिमा की ओर बढ़ता जा रहा है।
वार
सप्ताह का दिन
इस वार को परंपरा में बुध से जोड़ा जाता है।
नक्षत्र
चंद्रमा का नक्षत्र
स्थानीय सूर्योदय पर चंद्रमा जिस निरयन आकाश-खंड में होता है, वही नक्षत्र है।
योग
सूर्य-चंद्र का योग
सूर्य और चंद्रमा के देशांतरों को जोड़कर बनने वाला संबंध; यहाँ इसे अनुकूल माना गया है।
करण
तिथि का आधा भाग
सूर्योदय पर चल रहा आधा तिथि-भाग; यहाँ इसे अनुकूल माना गया है।
हिंदू मास
पूर्णिमांत — पूर्णिमा पर ख़त्म
उत्तर भारत की गणना — दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और पंजाब में यही चलती है, और विक्रम संवत इसी के साथ चलता है।
हिंदू मास
अमांत — अमावस्या पर ख़त्म
दक्षिण और पश्चिम भारत की गणना — महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र और तमिलनाडु में यही चलती है।
विक्रम संवत
चंद्र वर्ष
शुक्ल पक्ष है, इसलिए दोनों गणनाएँ मास का एक ही नाम रखती हैं। चंद्रमा के घटना शुरू होते ही ये अलग हो जाती हैं।
अयन
सूर्य का आधा वर्ष
The Sun's southward half-year, from Karka Sankranti in mid-July to the end of Dhanu. Traditionally the half for inner work, vows and ancestral observance.
ऋतु
मौसम
बरसात की ऋतु। एक ऋतु दो चंद्रमास की होती है, इसलिए इसे कैलेंडर की तारीख़ से नहीं, ऊपर वाले मास से पढ़ा जाता है — इसी वजह से यह मौसम विभाग की ऋतु से एक-दो हफ़्ते अलग पड़ सकती है।
शक संवत
राष्ट्रीय संवत
भारत का सरकारी चंद्र-सौर संवत — विक्रम संवत से 135 वर्ष पीछे और अमांत गणना के साथ। हर वसंत में ये दोनों करीब पंद्रह दिन तक अलग रह सकते हैं, इसीलिए इसे घटाकर नहीं, गिनकर निकाला जाता है।
सूर्य और चंद्र राशि
दोनों प्रकाश-ग्रह किस राशि में हैं
स्थानीय सूर्योदय पर सूर्य की और चंद्रमा की निरयन राशि। वैदिक ज्योतिष में “आपकी राशि” से मतलब चंद्रमा वाली राशि से ही होता है।
दिनमान और रात्रिमान
नापा हुआ दिन और रात
इस पेज की हर अनुपात वाली अवधि इन्हीं दो अवधियों का एक हिस्सा है, किसी बारह-घंटे की मान्यता का नहीं। इसीलिए आज दिन की होरा और रात की होरा की लंबाई अलग है।
आनंदादि योग
वार × नक्षत्र
अट्ठाईस योगों में से एक, जो वार और चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है — इसलिए यह ठीक तभी बदलता है जब नक्षत्र बदलता है, सूर्योदय पर कभी नहीं।
तमिल योग
सिद्ध, अमृत या मरण
वार और नक्षत्र की जोड़ी पर तमिल पंचांग का निर्णय। हर जोड़ी इन्हीं तीन में से एक पर बैठती है — न कोई तटस्थ स्थिति है, न कोई ख़ाली दिन।
हर अंग का एक मान नहीं — एक क्रम
ऊपर के कार्ड बताते हैं कि स्थानीय सूर्योदय पर क्या चल रहा था — दिन का नाम इसी परंपरा से पड़ता है। चारों अंगों में से कोई भी ठीक एक दिन नहीं चलता, इसलिए यहाँ इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक हर एक की सारी अवधियाँ दी हैं, और अभी जो चल रही है उस पर निशान है।
दिन भर का नक्षत्र
दिन का नक्षत्र श्रवण लिखा जाता है, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय पर वही चल रहा था। अभी धनिष्ठा चल रहा है। चंद्रमा एक नक्षत्र लगभग 19 से 27 घंटे में पार करता है, इसलिए यह खंड दिन के साथ कम ही मिलता है।
दिन भर का योग
दिन का योग सौभाग्य लिखा जाता है, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय पर वही चल रहा था। अभी शोभन चल रहा है। एक नित्य योग दिन से थोड़ा कम चलता है, इसलिए यह हर दिन अलग घंटे पर बदलता है।
दिन भर का करण
दिन का करण तैतिल लिखा जाता है, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय पर वही चल रहा था। अभी वणिज चल रहा है। एक करण आधी तिथि का होता है, इसलिए हर वैदिक दिन में कम से कम दो करण पड़ते हैं।
दिन कब बदलता है
ऊपर के कार्ड बताते हैं कि स्थानीय सूर्योदय पर क्या चल रहा है। यह तालिका सूर्योदय के बाद का पहला बदलाव दिखाती है; वार तब बदलता है जब अगला वैदिक दिन सूर्योदय पर शुरू होता है।
| अंग | सूर्योदय पर चल रहा | पहला बदलाव |
|---|---|---|
| तिथि चंद्र दिवस |
त्रयोदशी (शुक्ल पक्ष) |
त्रयोदशी (शुक्ल पक्ष) → चतुर्दशी (शुक्ल पक्ष) |
| वार सप्ताह का दिन |
बुधवार |
बुधवार → गुरुवार — अगले सूर्योदय पर |
| नक्षत्र चंद्रमा का नक्षत्र |
श्रवण |
श्रवण → धनिष्ठा |
| योग सूर्य-चंद्र का योग |
सौभाग्य |
सौभाग्य → शोभन |
| करण तिथि का आधा भाग |
तैतिल |
तैतिल → गरज |
बदलाव के समय जयपुर के लिए सूर्य और चंद्रमा की निरयन स्थिति से निकाले जाते हैं — सेकंड तक गिनकर, और नज़दीकी मिनट में दिखाकर।
दिन की मुख्य अवधियाँ
ये अवधियाँ स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ खिसकती हैं। ये सब शहरों के लिए तय घड़ी-समय नहीं हैं।
Traditionally the most favourable window of the day, derived from the Moon's nakshatra rather than from sunrise alone.
इस समय कोई ज़रूरी काम शुरू करने से बचा जाता है। जो काम पहले से चल रहा है, वह चलता रह सकता है।
यात्रा, शुभ कार्यों और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए आमतौर पर इससे बचा जाता है।
नए वादों और सौदों में थोड़ी और सावधानी रखें; परंपरा इसे सतर्कता की अवधि मानती है।
A window traditionally left out of auspicious starts. Derived from the ruling nakshatra, so it moves every day.
A short inauspicious span fixed by weekday. Usually avoided for beginnings; ordinary work continues.
The middle of the night, used for night observances such as Maha Shivratri rather than for daily planning.
नौ ग्रह कहाँ हैं
लाहिड़ी अयनांश से निरयन स्थिति — ऊपर की तिथि, नक्षत्र, योग और करण इन्हीं देशांतरों से निकाले जाते हैं, और उसी क्षण पर पढ़े जाते हैं।
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र | पाद | गति |
|---|---|---|---|---|---|
| सूर्य | सिंह स्वामी सूर्य |
8° 35' 21" | मघा | 3 | मार्गी |
| चंद्र | मकर स्वामी शनि |
13° 40' 27" | श्रवण | 2 | मार्गी |
| मंगल | मिथुन स्वामी बुध |
15° 20' 43" | आर्द्रा | 3 | मार्गी |
| बुध | सिंह स्वामी सूर्य |
6° 53' 08" | मघा | 3 | मार्गी |
| गुरु | कर्क स्वामी चंद्र |
18° 12' 03" | आश्लेषा | 1 | मार्गी |
| शुक्र | कन्या स्वामी बुध |
23° 57' 29" | चित्रा | 1 | मार्गी |
| शनि | मीन स्वामी गुरु |
19° 45' 43" | रेवती | 1 | वक्री |
| राहु | कुंभ स्वामी शनि |
5° 23' 19" | धनिष्ठा | 4 | वक्री |
| केतु | सिंह स्वामी सूर्य |
5° 23' 19" | मघा | 2 | वक्री |
राहु और केतु चंद्र-पात हैं, कोई पिंड नहीं, और परिभाषा से ही उल्टे चलते हैं — उनका वक्री होना उनका स्वभाव है, कोई गुज़रती हुई दशा नहीं।
दिन की आठ अवधियाँ, रात की आठ
जब विस्तार से निजी मुहूर्त न निकाला जा सके, तब चौघड़िया को समय का मोटा मार्गदर्शक मान लिया जाता है।
| अवधि | समय | इसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं |
|---|---|---|
| लाभ | – | व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है। |
| अमृत | – | ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि। |
| काल | – | परंपरा में शुभ या बड़े दाँव वाले कामों की शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है। |
| शुभ | – | सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि। |
| रोग | – | परंपरा में सेहत से जुड़े काम और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है। |
| उद्वेग | – | परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है। |
| चर | – | यात्रा, आवाजाही और रोज़मर्रा के कामों के लिए चलने वाली लचीली अवधि। |
| लाभ | – | व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है। |
| अवधि | समय | इसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं |
|---|---|---|
| उद्वेग | – | परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है। |
| शुभ | – | सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि। |
| अमृत | – | ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि। |
| चर | – | यात्रा, आवाजाही और रोज़मर्रा के कामों के लिए चलने वाली लचीली अवधि। |
| रोग | – | परंपरा में सेहत से जुड़े काम और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है। |
| काल | – | परंपरा में शुभ या बड़े दाँव वाले कामों की शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है। |
| लाभ | – | व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है। |
| उद्वेग | – | परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है। |
नल्ल नेरम · तमिल शुभ-समय सारणी
दक्षिण भारत की पद्धति, ऊपर वाले चौघड़िया की तरह दिन के आठ और रात के आठ हिस्सों पर पढ़ी जाती है। इसकी आठ में से पाँच अवधियाँ नल्ल नेरम हैं — वही “शुभ समय” जो तमिल पंचांग छापता है — और तीन से बचा जाता है।
| अवधि | समय | इसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं |
|---|---|---|
| लाभम् | – | लाभ। व्यापार, वसूली और व्यावहारिक लेन-देन के लिए आमतौर पर लिया जाता है। |
| धनम् | – | धन। पैसे के काम, ख़रीदारी और जो चीज़ अपने पास रखनी हो, उसके लिए। |
| सुगम् | – | सुगमता। यात्रा, आराम, मिलने-जुलने और जो काम बिना अड़चन निपटाने हों, उनके लिए। |
| सोरम् | – | शोक। परंपरा में शुरुआत, संस्कार और उत्सव के लिए इससे बचा जाता है। |
| विषम् | – | विष — राहु का भाग। किसी भी ज़रूरी काम के लिए इससे बचा जाता है। |
| उथि | – | मेहनत और उद्यम। जिस काम को आगे बढ़ाना हो, उसके लिए ठीक — कोमल शुरुआत के लिए नहीं। |
| अमिर्ध | – | तमिल पद्धति का सबसे प्रबल भाग — जो काम टिकाऊ हो, उसके लिए लिया जाता है। |
| रोगम् | – | रोग। परंपरा में सेहत से जुड़े काम और नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है। |
| अवधि | समय | इसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं |
|---|---|---|
| उथि | – | मेहनत और उद्यम। जिस काम को आगे बढ़ाना हो, उसके लिए ठीक — कोमल शुरुआत के लिए नहीं। |
| अमिर्ध | – | तमिल पद्धति का सबसे प्रबल भाग — जो काम टिकाऊ हो, उसके लिए लिया जाता है। |
| रोगम् | – | रोग। परंपरा में सेहत से जुड़े काम और नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है। |
| लाभम् | – | लाभ। व्यापार, वसूली और व्यावहारिक लेन-देन के लिए आमतौर पर लिया जाता है। |
| धनम् | – | धन। पैसे के काम, ख़रीदारी और जो चीज़ अपने पास रखनी हो, उसके लिए। |
| सुगम् | – | सुगमता। यात्रा, आराम, मिलने-जुलने और जो काम बिना अड़चन निपटाने हों, उनके लिए। |
| सोरम् | – | शोक। परंपरा में शुरुआत, संस्कार और उत्सव के लिए इससे बचा जाता है। |
| विषम् | – | विष — राहु का भाग। किसी भी ज़रूरी काम के लिए इससे बचा जाता है। |
गौरी पंचांगम् और चौघड़िया दिन को बिलकुल एक जैसा बाँटते हैं और हिस्सों के नाम अलग रखते हैं — इसलिए एक ही अवधि एक पद्धति में शुभ और दूसरी में नहीं हो सकती। यह दो परंपराओं का सच्चा मतभेद है, गणना की भूल नहीं — इसीलिए दोनों को मिलाया नहीं, अलग-अलग दिखाया गया है।
चौबीसों ग्रह-घंटे
दिन और रात, दोनों को बारह-बारह बराबर ग्रह-घंटों में बाँटा जाता है, इसलिए होरा हमेशा साठ मिनट की नहीं होती।
| # | होरा | दिन / रात | समय | अक्सर किस काम के लिए |
|---|---|---|---|---|
| 1 | बुध होरा | दिन | – | पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार |
| 2 | चंद्र होरा | दिन | – | घर, परिवार, मन को शांत करना |
| 3 | शनि होरा | दिन | – | अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ |
| 4 | गुरु होरा | दिन | – | शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य |
| 5 | मंगल होरा | दिन | – | व्यायाम, शारीरिक काम, निर्णायक कदम |
| 6 | सूर्य होरा | दिन | – | अधिकार, पहचान, सरकारी काम |
| 7 | शुक्र होरा | दिन | – | रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला |
| 8 | बुध होरा | दिन | – | पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार |
| 9 | चंद्र होरा | दिन | – | घर, परिवार, मन को शांत करना |
| 10 | शनि होरा | दिन | – | अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ |
| 11 | गुरु होरा | दिन | – | शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य |
| 12 | मंगल होरा | दिन | – | व्यायाम, शारीरिक काम, निर्णायक कदम |
| 13 | सूर्य होरा | रात | – | अधिकार, पहचान, सरकारी काम |
| 14 | शुक्र होरा | रात | – | रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला |
| 15 | बुध होरा | रात | – | पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार |
| 16 | चंद्र होरा | रात | – | घर, परिवार, मन को शांत करना |
| 17 | शनि होरा | रात | – | अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ |
| 18 | गुरु होरा | रात | – | शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य |
| 19 | मंगल होरा | रात | – | व्यायाम, शारीरिक काम, निर्णायक कदम |
| 20 | सूर्य होरा | रात | – | अधिकार, पहचान, सरकारी काम |
| 21 | शुक्र होरा | रात | – | रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला |
| 22 | बुध होरा | रात | – | पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार |
| 23 | चंद्र होरा | रात | – | घर, परिवार, मन को शांत करना |
| 24 | शनि होरा | रात | – | अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ |
आम सवाल
सूर्योदय पर त्रयोदशी चल रही थी, और वैदिक दिन का नाम इसी से पड़ता है। अभी चतुर्दशी चल रही है।
जयपुर में आज सूर्योदय 6:03 AM और सूर्यास्त 6:53 PM पर है। इस पेज की हर अवधि उसी सूर्योदय से नापी जाती है, आधी रात से नहीं।
जयपुर में सूर्योदय पर चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में है, सौभाग्य योग और तैतिल करण के साथ।
पंचांग के समय स्थानीय सूर्योदय से निकाले जाते हैं, इसलिए हर शहर में अलग होते हैं — और छपा हुआ पंचांग चंद्रमास के लिए दूसरी गणना ले सकता है। यह पेज बताता है कि वह कौन-सी गणना ले रहा है, और दोनों दिखाता है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
सूर्योदय और सूर्यास्त जयपुर के लिए स्विस एफ़िमेरिस से निकाले जाते हैं — अक्षांश 26.9124, देशांतर 75.7873, समय-क्षेत्र Asia/Kolkata।
पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर चल रहे मानों से शुरू होते हैं। तिथि, नक्षत्र, योग और करण का पहला बदलाव ऊपर निकाला गया है; वार अगले सूर्योदय पर बदलता है।
राहु काल, यमगण्ड और गुलिक दिन के उजाले को आठ बराबर हिस्सों में बाँटकर, वार के अनुसार तय होते हैं। अभिजित नापे हुए दिन का बीच वाला पंद्रहवाँ हिस्सा है। चौघड़िया आठ भाग लेता है और होरा बारह।
हिंदू मास एक चंद्रमास है, सूर्य की राशि का नया नाम नहीं। ऊपर दोनों गणनाएँ दी गई हैं क्योंकि कृष्ण पक्ष में ये एक ही दिन को अलग नाम देती हैं: पूर्णिमांत मास पूर्णिमा पर ख़त्म होता है, अमांत मास अमावस्या पर। जिस चंद्रमास में कोई संक्रांति न पड़े, वह अधिक मास होता है और उसे वैसा ही लिखा जाता है। त्योहार और व्रत की तारीख़ें यहाँ अभी नहीं दी जातीं।
पंचांग योजना बनाने का एक पारंपरिक ढाँचा है, किसी नतीजे की गारंटी नहीं। शादी, ऑपरेशन, क़ानूनी काग़ज़ात या बड़े पैसों के फ़ैसलों के लिए काम के हिसाब से निजी मुहूर्त निकलवाएँ और योग्य पेशेवर की सलाह लें।