सिंगापुर का आज का पंचांग

सिंगापुर में आज तिथि प्रतिपदा, नक्षत्र चित्रा, योग वैधृति, करण किंस्तुघ्न और वार रविवार है।

देखें कि दिन का स्वभाव कैसा है, अभी क्या चल रहा है, और कौन-सी आम समय-अवधियाँ अनुकूल हैं या जिनसे बचना बेहतर है। नीचे का हर समय सिंगापुर के लिए निकाला गया है, किसी तय राष्ट्रीय तालिका से उठाया नहीं गया।

प्रतिपदा के लिए चंद्र कला का चित्र
शुक्ल पक्ष प्रतिपदा सूर्योदय पर · 0.1% प्रकाशित
  1. प्रतिपदा शुक्ल पक्ष 12:02 AM अगली सुबह तक इस सूर्योदय से पहले शुरू हुई अभी चल रही
  2. द्वितीया शुक्ल पक्ष 6:49 AM अगली सुबह तक अगले सूर्योदय पर भी चल रही होगी

एक तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए ज़्यादातर वैदिक दिनों में दो तिथियाँ पड़ती हैं और कुछ में तीन।

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आज Asia/Singapore
सूर्योदय
सूर्यास्त
दिन के स्वामी
रविवार
अगला सूर्योदय
चंद्रोदय
चंद्रास्त
सूर्योदय पर चंद्र कला
अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा
0.1% प्रकाशित · 0.29 दिन पुराना
बदलाव की दिशा
शुक्ल पक्ष — चंद्रमा पूर्णिमा की ओर बढ़ रहा है
अभीसिंगापुर में अभी

सिंगापुर का आज का पंचांग, 11 अक्तूबर 2026 — 8:54 AM +08 पर क्या चल रहा है

होरा बताती है कि इस घंटे में किस तरह का काम बैठता है। चौघड़िया पूरे दिन की योजना के लिए मोटा संकेत देता है।

ग्रह-घंटा

बुध होरा

इसे आमतौर पर पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार से जोड़ा जाता है।

चौघड़िया

चर

यात्रा, आवाजाही और रोज़मर्रा के कामों के लिए चलने वाली लचीली अवधि।

ज़रूरी समय-जाँच

अभी कोई बड़ी सावधानी अवधि नहीं चल रही

इस समय राहु काल, यमगण्ड और गुलिक नहीं चल रहे। कोई ज़रूरी काम शुरू करने से पहले आगे की अवधियाँ देख लें।

अभी चल रही होरा और चौघड़िया सूर्योदय-से-सूर्योदय वाले वैदिक दिन के हिसाब से हैं।

समय-रेखापूरा वैदिक दिन एक नज़र में

पंचांग की समय-रेखा · 6:49 AM से अगले दिन 6:49 AM तक

हर पंक्ति एक ही सूर्योदय-से-सूर्योदय पैमाने पर है। जो अवधियाँ एक सीध में हैं, वे उसी समय साथ चल रही हैं।

अभी चल रहा अनुकूल सावधानी रखें
वैदिक दिन
सूर्योदय दोपहर सूर्यास्त आधी रात अगला सूर्योदय
  1. चौघड़िया
    उद्वेग 6:49 AM - 8:19 AM चर 8:19 AM - 9:50 AM लाभ 9:50 AM - 11:21 AM अमृत 11:21 AM - 12:52 PM काल 12:52 PM - 2:22 PM शुभ 2:22 PM - 3:53 PM रोग 3:53 PM - 5:24 PM उद्वेग 5:24 PM - 6:54 PM शुभ 6:54 PM - 8:24 PM अमृत 8:24 PM - 9:53 PM चर 9:53 PM - 11:22 PM रोग 11:22 PM - 12:51 AM काल 12:51 AM - 2:21 AM लाभ 2:21 AM - 3:50 AM उद्वेग 3:50 AM - 5:19 AM शुभ 5:19 AM - 6:49 AM
  2. होरा
    सूर्य 6:49 AM - 7:49 AM शुक्र 7:49 AM - 8:50 AM बुध 8:50 AM - 9:50 AM चंद्र 9:50 AM - 10:51 AM शनि 10:51 AM - 11:51 AM गुरु 11:51 AM - 12:52 PM मंगल 12:52 PM - 1:52 PM सूर्य 1:52 PM - 2:52 PM शुक्र 2:52 PM - 3:53 PM बुध 3:53 PM - 4:53 PM चंद्र 4:53 PM - 5:54 PM शनि 5:54 PM - 6:54 PM गुरु 6:54 PM - 7:54 PM मंगल 7:54 PM - 8:53 PM सूर्य 8:53 PM - 9:53 PM शुक्र 9:53 PM - 10:52 PM बुध 10:52 PM - 11:52 PM चंद्र 11:52 PM - 12:51 AM शनि 12:51 AM - 1:51 AM गुरु 1:51 AM - 2:50 AM मंगल 2:50 AM - 3:50 AM सूर्य 3:50 AM - 4:49 AM शुक्र 4:49 AM - 5:49 AM बुध 5:49 AM - 6:49 AM
  3. काल / मुहूर्त
    राहु काल 5:24 PM - 6:54 PM यमगण्ड काल 12:52 PM - 2:22 PM गुलिक काल 3:53 PM - 5:24 PM अभिजित मुहूर्त 12:27 PM - 1:16 PM Durmuhurta First 5:18 PM - 6:06 PM Varjyam 8:30 AM - 10:09 AM अमृत काल 6:25 PM - 8:05 PM निशीथ काल 12:28 AM - 1:15 AM
  4. गौरी पंचांगम्
    उथि 6:49 AM - 8:19 AM अमिर्ध 8:19 AM - 9:50 AM रोगम् 9:50 AM - 11:21 AM लाभम् 11:21 AM - 12:52 PM धनम् 12:52 PM - 2:22 PM सुगम् 2:22 PM - 3:53 PM सोरम् 3:53 PM - 5:24 PM विषम् 5:24 PM - 6:54 PM धनम् 6:54 PM - 8:24 PM सुगम् 8:24 PM - 9:53 PM सोरम् 9:53 PM - 11:22 PM विषम् 11:22 PM - 12:51 AM उथि 12:51 AM - 2:21 AM अमिर्ध 2:21 AM - 3:50 AM रोगम् 3:50 AM - 5:19 AM लाभम् 5:19 AM - 6:49 AM
  5. तिथि
    Pratipada, Shukla 6:49 AM - 12:02 AM Dwitiya, Shukla 12:02 AM - 6:49 AM
  6. नक्षत्र
    चित्रा 6:49 AM - 1:03 AM स्वाति 1:03 AM - 6:49 AM
  7. योग
    वैधृति 6:49 AM - 11:36 PM विष्कम्भ 11:36 PM - 6:49 AM
  8. करण
    किंस्तुघ्न 6:49 AM - 11:52 AM बव 11:52 AM - 12:02 AM बालव 12:02 AM - 6:49 AM

कुछ होरा खंड चौड़े क्यों हैं: दिन और रात अलग-अलग बाँटे जाते हैं, इसलिए उनकी होरा की अवधि बराबर नहीं होती।

दिन की गुणवत्तादिन का मुहूर्त-निर्णय

क्या आज सिंगापुर में शुभ दिन है? 6/10

मुहूर्त का अंक कोई राय नहीं, नाम से गिने हुए नियमों का जोड़ है। जो भी नियम लगा, वह अपने भार के साथ नीचे दिया है — ताकि कम अंक को सिर्फ़ मान न लेना पड़े, पढ़ा जा सके।

दिन की कुल शक्ति

6/10

शुभ

विशेष पंचांग योग

शुभ · अनुकूल

  • रवि योग सूर्य का अनुकूल योग — दिखने वाले, सरकारी और अधिकार से जुड़े कामों के लिए उपयोगी।

दिशा शूल

पश्चिम

रविवार को पश्चिम दिशा की ओर निकलने से परंपरा में बचा जाता है। यह सिर्फ़ वार से तय होता है, ग्रहों की स्थिति से नहीं निकाला जाता — इसलिए हर शहर में एक ही रहता है।

परिहार निकलने से पहले घी ले लें।

नियमइस दिन का मानभारयह क्यों गिना जाता है
वार रविवार 0 दिन के स्वामी सूर्य हैं — प्रबल पर कठोर; अधिकार से जुड़े काम के लिए ठीक, कोमल शुरुआत के लिए नहीं
तिथि प्रतिपदा · शुक्ल +1 नंदा तिथि — कुछ गिने-चुने कामों को छोड़कर अनुकूल
नक्षत्र चित्रा +2 मृदु नक्षत्र — कला, प्रेम, वस्त्र और मित्रता के लिए अनुकूल
नित्य योग वैधृति -2 नौ त्याज्य योगों में से एक
करण किंस्तुघ्न +1 काम लायक करण

सभी भारों को जोड़कर आधा किया जाता है और 0-10 के पैमाने पर रखा जाता है, ताकि कोई एक नियम अकेले पूरा पैमाना न भर दे। यही निर्णय ऐप के महीने वाले कैलेंडर में भी इसी तारीख़ के लिए दिखता है।

दिन की योजनाआज का शुभ मुहूर्त और पूजा के समय

आज का शुभ मुहूर्त और पूजा के समय

ये पंचांग के आम संकेत हैं। निजी मुहूर्त में यह भी देखा जाता है कि काम कौन-सा है और व्यक्ति की जन्म कुंडली क्या कहती है।

अनुकूल अवधियाँ

दिन का चौघड़िया

लाभ

व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है।

रविवार

दिन का चौघड़िया

अमृत

ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि।

रविवार

अनुकूल अवधि

अभिजित मुहूर्त

दोपहर की एक आम तौर पर अनुकूल खिड़की — जब विस्तार से मुहूर्त न निकाला जा सके तो ज़रूरी काम के लिए इसे लिया जाता है।

रविवार

दिन का चौघड़िया

शुभ

सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि।

रविवार

सावधानी रखें

सावधानी की अवधि

Varjyam

A window traditionally left out of auspicious starts. Derived from the ruling nakshatra, so it moves every day.

रविवार

सावधानी की अवधि

यमगण्ड काल

यात्रा, शुभ कार्यों और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए आमतौर पर इससे बचा जाता है।

रविवार

दिन का चौघड़िया

काल

परंपरा में शुभ या बड़े दाँव वाले कामों की शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।

रविवार

दिन का चौघड़िया

रोग

परंपरा में सेहत से जुड़े काम और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।

रविवार

पाँच अंगदिन के पाँच अंग

पंचांग, सरल भाषा में

“पंचांग” का अर्थ है पाँच अंग। ये पाँचों मिलकर स्थानीय सूर्योदय के समय दिन का चंद्र और ग्रह-स्वभाव बताते हैं।

तिथि

चंद्र दिवस

प्रतिपदा — शुक्ल पक्ष

चंद्रमा शुक्ल पक्ष में है और पूर्णिमा की ओर बढ़ता जा रहा है।

वार

सप्ताह का दिन

रविवार

इस वार को परंपरा में सूर्य से जोड़ा जाता है।

नक्षत्र

चंद्रमा का नक्षत्र

चित्रा

स्थानीय सूर्योदय पर चंद्रमा जिस निरयन आकाश-खंड में होता है, वही नक्षत्र है।

योग

सूर्य-चंद्र का योग

वैधृति

सूर्य और चंद्रमा के देशांतरों को जोड़कर बनने वाला संबंध; यहाँ इसे प्रतिकूल माना गया है।

करण

तिथि का आधा भाग

किंस्तुघ्न

सूर्योदय पर चल रहा आधा तिथि-भाग; यहाँ इसे तटस्थ माना गया है।

हिंदू मास

पूर्णिमांत — पूर्णिमा पर ख़त्म

आश्विन

उत्तर भारत की गणना — दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और पंजाब में यही चलती है, और विक्रम संवत इसी के साथ चलता है।

हिंदू मास

अमांत — अमावस्या पर ख़त्म

आश्विन

दक्षिण और पश्चिम भारत की गणना — महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र और तमिलनाडु में यही चलती है।

विक्रम संवत

चंद्र वर्ष

2083 सिद्धार्थी

शुक्ल पक्ष है, इसलिए दोनों गणनाएँ मास का एक ही नाम रखती हैं। चंद्रमा के घटना शुरू होते ही ये अलग हो जाती हैं।

अयन

सूर्य का आधा वर्ष

दक्षिणायन

The Sun's southward half-year, from Karka Sankranti in mid-July to the end of Dhanu. Traditionally the half for inner work, vows and ancestral observance.

ऋतु

वैदिक ऋतु, चंद्रमास से

शरद

शरद की ऋतु। यह वैदिक ऋतु है: दो चंद्रमास की, जो कैलेंडर की तारीख़ से नहीं, ऊपर वाले मास से पढ़ी जाती है। कुछ पंचांग सूर्य की स्थिति से चलने वाली सायन ऋतु भी छापते हैं, जो इससे एक महीने तक आगे हो सकती है।

शक संवत

राष्ट्रीय संवत

1948

भारत का सरकारी चंद्र-सौर संवत — विक्रम संवत से 135 वर्ष पीछे और अमांत गणना के साथ। हर वसंत में ये दोनों करीब पंद्रह दिन तक अलग रह सकते हैं, इसीलिए इसे घटाकर नहीं, गिनकर निकाला जाता है।

सूर्य और चंद्र राशि

दोनों प्रकाश-ग्रह किस राशि में हैं

कन्या · कन्या

स्थानीय सूर्योदय पर सूर्य की और चंद्रमा की निरयन राशि। वैदिक ज्योतिष में “आपकी राशि” से मतलब चंद्रमा वाली राशि से ही होता है।

दिनमान और रात्रिमान

नापा हुआ दिन और रात

12h 05m 37s · 11h 54m 10s

इस पेज की हर अनुपात वाली अवधि इन्हीं दो अवधियों का एक हिस्सा है, किसी बारह-घंटे की मान्यता का नहीं। इसीलिए आज दिन की होरा और रात की होरा की लंबाई अलग है।

आनंदादि योग

वार × नक्षत्र

पद्म · शुभ

  • पद्म 6:49 AM - 1:03 AM · चित्रा
  • लुंब 1:03 AM - 6:49 AM · स्वाति

अट्ठाईस योगों में से एक, जो वार और चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है — इसलिए यह ठीक तभी बदलता है जब नक्षत्र बदलता है, सूर्योदय पर कभी नहीं।

तमिल योग

सिद्ध, अमृत या मरण

सिद्ध · शुभ

  • सिद्ध 6:49 AM - 1:03 AM · चित्रा
  • मरण 1:03 AM - 6:49 AM · स्वाति

वार और नक्षत्र की जोड़ी पर तमिल पंचांग का निर्णय। हर जोड़ी इन्हीं तीन में से एक पर बैठती है — न कोई तटस्थ स्थिति है, न कोई ख़ाली दिन।

दिन भरहर अंग का एक मान नहीं — एक क्रम

दिन भर नक्षत्र, योग और करण

ऊपर के कार्ड बताते हैं कि स्थानीय सूर्योदय पर क्या चल रहा था — दिन का नाम इसी परंपरा से पड़ता है। चारों अंगों में से कोई भी ठीक एक दिन नहीं चलता, इसलिए यहाँ इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक हर एक की सारी अवधियाँ दी हैं, और अभी जो चल रही है उस पर निशान है।

  1. चित्रा 1:03 AM अगली सुबह तक इस सूर्योदय से पहले शुरू हुआ अभी चल रहा
  2. स्वाति 6:49 AM अगली सुबह तक अगले सूर्योदय पर भी चल रहा होगा

चंद्रमा एक नक्षत्र लगभग 19 से 27 घंटे में पार करता है, इसलिए यह खंड दिन के साथ कम ही मिलता है।

  1. वैधृति 11:36 PM तक इस सूर्योदय से पहले शुरू हुआ अभी चल रहा
  2. विष्कम्भ 6:49 AM अगली सुबह तक अगले सूर्योदय पर भी चल रहा होगा

एक नित्य योग दिन से थोड़ा कम चलता है, इसलिए यह हर दिन अलग घंटे पर बदलता है।

  1. किंस्तुघ्न 11:52 AM तक इस सूर्योदय से पहले शुरू हुआ अभी चल रहा
  2. बव 12:02 AM अगली सुबह तक
  3. बालव 6:49 AM अगली सुबह तक अगले सूर्योदय पर भी चल रहा होगा

एक करण आधी तिथि का होता है, इसलिए हर वैदिक दिन में कम से कम दो करण पड़ते हैं।

बदलावदिन कब बदलता है

पंचांग के बदलाव का सही समय

ऊपर के कार्ड बताते हैं कि स्थानीय सूर्योदय पर क्या चल रहा है। यह तालिका सूर्योदय के बाद का पहला बदलाव दिखाती है; वार तब बदलता है जब अगला वैदिक दिन सूर्योदय पर शुरू होता है।

अंगसूर्योदय पर चल रहापहला बदलाव
तिथि
चंद्र दिवस
प्रतिपदा (शुक्ल पक्ष) प्रतिपदा (शुक्ल पक्ष) → द्वितीया (शुक्ल पक्ष)
वार
सप्ताह का दिन
रविवार रविवार → सोमवार
— अगले सूर्योदय पर
नक्षत्र
चंद्रमा का नक्षत्र
चित्रा चित्रा → स्वाति
योग
सूर्य-चंद्र का योग
वैधृति वैधृति → विष्कम्भ
करण
तिथि का आधा भाग
किंस्तुघ्न किंस्तुघ्न → बव

बदलाव के समय सिंगापुर के लिए सूर्य और चंद्रमा की निरयन स्थिति से निकाले जाते हैं — सेकंड तक गिनकर, और नज़दीकी मिनट में दिखाकर।

दिन की मुख्य अवधियाँअभिजित, राहु काल, यमगण्ड और गुलिक

अभिजित, राहु काल, यमगण्ड और गुलिक

ये अवधियाँ स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ खिसकती हैं। ये सब शहरों के लिए तय घड़ी-समय नहीं हैं।

अनुकूल अवधि

अभिजित मुहूर्त

दोपहर की एक आम तौर पर अनुकूल खिड़की — जब विस्तार से मुहूर्त न निकाला जा सके तो ज़रूरी काम के लिए इसे लिया जाता है।

अनुकूल अवधि

अमृत काल

Traditionally the most favourable window of the day, derived from the Moon's nakshatra rather than from sunrise alone.

अनुकूल अवधि

ब्रह्म मुहूर्त

The fourteenth of the night's fifteen muhurtas, ending one muhurta before sunrise. Traditionally the best window of the day for study, meditation and japa rather than for worldly beginnings.

सावधानी की अवधि

राहु काल

इस समय कोई ज़रूरी काम शुरू करने से बचा जाता है। जो काम पहले से चल रहा है, वह चलता रह सकता है।

सावधानी की अवधि

यमगण्ड काल

यात्रा, शुभ कार्यों और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए आमतौर पर इससे बचा जाता है।

सावधानी की अवधि

गुलिक काल

नए वादों और सौदों में थोड़ी और सावधानी रखें; परंपरा इसे सतर्कता की अवधि मानती है।

सावधानी की अवधि

Varjyam

A window traditionally left out of auspicious starts. Derived from the ruling nakshatra, so it moves every day.

सावधानी की अवधि

Durmuhurta First

A short inauspicious span fixed by weekday. Usually avoided for beginnings; ordinary work continues.

सावधानी की अवधि

निशीथ काल

The middle of the night, used for night observances such as Maha Shivratri rather than for daily planning.

ग्रहनौ ग्रह कहाँ हैं

सूर्योदय पर ग्रह स्थिति

लाहिड़ी अयनांश से निरयन स्थिति — ऊपर की तिथि, नक्षत्र, योग और करण इन्हीं देशांतरों से निकाले जाते हैं, और उसी क्षण पर पढ़े जाते हैं।

ग्रहराशिअंशनक्षत्रपादगति
सूर्य कन्या
स्वामी बुध
23° 24' 53" चित्रा 1 मार्गी
चंद्र कन्या
स्वामी बुध
26° 54' 02" चित्रा 2 मार्गी
मंगल कर्क
स्वामी चंद्र
13° 09' 02" पुष्य 3 मार्गी
बुध तुला
स्वामी शुक्र
18° 22' 59" स्वाति 4 मार्गी
गुरु कर्क
स्वामी चंद्र
27° 03' 57" आश्लेषा 4 मार्गी
शुक्र तुला
स्वामी शुक्र
13° 06' 15" स्वाति 2 वक्री
शनि मीन
स्वामी गुरु
16° 33' 52" उत्तर भाद्रपदा 4 वक्री
राहु कुंभ
स्वामी शनि
2° 57' 17" धनिष्ठा 3 वक्री
केतु सिंह
स्वामी सूर्य
2° 57' 17" मघा 1 वक्री

राहु और केतु चंद्र-पात हैं, कोई पिंड नहीं, और परिभाषा से ही उल्टे चलते हैं — उनका वक्री होना उनका स्वभाव है, कोई गुज़रती हुई दशा नहीं।

चौघड़ियादिन की आठ अवधियाँ, रात की आठ

चौघड़िया सारणी

जब विस्तार से निजी मुहूर्त न निकाला जा सके, तब चौघड़िया को समय का मोटा मार्गदर्शक मान लिया जाता है।

दिन · 6:49 AM से 6:54 PM तक

अवधिसमयइसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं
उद्वेग – परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है।
चर – यात्रा, आवाजाही और रोज़मर्रा के कामों के लिए चलने वाली लचीली अवधि।
लाभ – व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है।
अमृत – ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि।
काल – परंपरा में शुभ या बड़े दाँव वाले कामों की शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
शुभ – सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि।
रोग – परंपरा में सेहत से जुड़े काम और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
उद्वेग – परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है।

रात · सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक

अवधिसमयइसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं
शुभ – सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि।
अमृत – ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि।
चर – यात्रा, आवाजाही और रोज़मर्रा के कामों के लिए चलने वाली लचीली अवधि।
रोग – परंपरा में सेहत से जुड़े काम और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
काल – परंपरा में शुभ या बड़े दाँव वाले कामों की शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
लाभ – व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है।
उद्वेग – परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है।
शुभ – सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि।
गौरीनल्ल नेरम · तमिल शुभ-समय सारणी

गौरी पंचांगम्

दक्षिण भारत की पद्धति, ऊपर वाले चौघड़िया की तरह दिन के आठ और रात के आठ हिस्सों पर पढ़ी जाती है। इसकी आठ में से पाँच अवधियाँ नल्ल नेरम हैं — वही “शुभ समय” जो तमिल पंचांग छापता है — और तीन से बचा जाता है।

दिन · 6:49 AM से 6:54 PM तक

अवधिसमयइसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं
उथि – मेहनत और उद्यम। जिस काम को आगे बढ़ाना हो, उसके लिए ठीक — कोमल शुरुआत के लिए नहीं।
अमिर्ध – तमिल पद्धति का सबसे प्रबल भाग — जो काम टिकाऊ हो, उसके लिए लिया जाता है।
रोगम् – रोग। परंपरा में सेहत से जुड़े काम और नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
लाभम् – लाभ। व्यापार, वसूली और व्यावहारिक लेन-देन के लिए आमतौर पर लिया जाता है।
धनम् – धन। पैसे के काम, ख़रीदारी और जो चीज़ अपने पास रखनी हो, उसके लिए।
सुगम् – सुगमता। यात्रा, आराम, मिलने-जुलने और जो काम बिना अड़चन निपटाने हों, उनके लिए।
सोरम् – शोक। परंपरा में शुरुआत, संस्कार और उत्सव के लिए इससे बचा जाता है।
विषम् – विष — राहु का भाग। किसी भी ज़रूरी काम के लिए इससे बचा जाता है।

रात · सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक

अवधिसमयइसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं
धनम् – धन। पैसे के काम, ख़रीदारी और जो चीज़ अपने पास रखनी हो, उसके लिए।
सुगम् – सुगमता। यात्रा, आराम, मिलने-जुलने और जो काम बिना अड़चन निपटाने हों, उनके लिए।
सोरम् – शोक। परंपरा में शुरुआत, संस्कार और उत्सव के लिए इससे बचा जाता है।
विषम् – विष — राहु का भाग। किसी भी ज़रूरी काम के लिए इससे बचा जाता है।
उथि – मेहनत और उद्यम। जिस काम को आगे बढ़ाना हो, उसके लिए ठीक — कोमल शुरुआत के लिए नहीं।
अमिर्ध – तमिल पद्धति का सबसे प्रबल भाग — जो काम टिकाऊ हो, उसके लिए लिया जाता है।
रोगम् – रोग। परंपरा में सेहत से जुड़े काम और नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
लाभम् – लाभ। व्यापार, वसूली और व्यावहारिक लेन-देन के लिए आमतौर पर लिया जाता है।

गौरी पंचांगम् और चौघड़िया दिन को बिलकुल एक जैसा बाँटते हैं और हिस्सों के नाम अलग रखते हैं — इसलिए एक ही अवधि एक पद्धति में शुभ और दूसरी में नहीं हो सकती। यह दो परंपराओं का सच्चा मतभेद है, गणना की भूल नहीं — इसीलिए दोनों को मिलाया नहीं, अलग-अलग दिखाया गया है।

होराचौबीसों ग्रह-घंटे

होरा सारणी

दिन और रात, दोनों को बारह-बारह बराबर ग्रह-घंटों में बाँटा जाता है, इसलिए होरा हमेशा साठ मिनट की नहीं होती।

#होरादिन / रातसमयअक्सर किस काम के लिए
1 सूर्य होरा दिन – अधिकार, पहचान, सरकारी काम
2 शुक्र होरा दिन – रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला
3 बुध होरा दिन – पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार
4 चंद्र होरा दिन – घर, परिवार, मन को शांत करना
5 शनि होरा दिन – अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ
6 गुरु होरा दिन – शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य
7 मंगल होरा दिन – व्यायाम, शारीरिक काम, निर्णायक कदम
8 सूर्य होरा दिन – अधिकार, पहचान, सरकारी काम
9 शुक्र होरा दिन – रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला
10 बुध होरा दिन – पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार
11 चंद्र होरा दिन – घर, परिवार, मन को शांत करना
12 शनि होरा दिन – अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ
13 गुरु होरा रात – शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य
14 मंगल होरा रात – व्यायाम, शारीरिक काम, निर्णायक कदम
15 सूर्य होरा रात – अधिकार, पहचान, सरकारी काम
16 शुक्र होरा रात – रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला
17 बुध होरा रात – पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार
18 चंद्र होरा रात – घर, परिवार, मन को शांत करना
19 शनि होरा रात – अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ
20 गुरु होरा रात – शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य
21 मंगल होरा रात – व्यायाम, शारीरिक काम, निर्णायक कदम
22 सूर्य होरा रात – अधिकार, पहचान, सरकारी काम
23 शुक्र होरा रात – रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला
24 बुध होरा रात – पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार

आज के पंचांग के बारे में

सिंगापुर में आज कौन-सी तिथि है?

सिंगापुर में आज प्रतिपदा चल रही है।

सिंगापुर में आज सूर्योदय किस समय है?

सिंगापुर में आज सूर्योदय 6:49 AM और सूर्यास्त 6:54 PM पर है। इस पेज की हर अवधि उसी सूर्योदय से नापी जाती है, आधी रात से नहीं।

आज चंद्रमा किस नक्षत्र में है?

सिंगापुर में सूर्योदय पर चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में है, वैधृति योग और किंस्तुघ्न करण के साथ।

यह पंचांग कहीं और छपे पंचांग से अलग क्यों है?

पंचांग के समय स्थानीय सूर्योदय से निकाले जाते हैं, इसलिए हर शहर में अलग होते हैं — और छपा हुआ पंचांग चंद्रमास के लिए दूसरी गणना ले सकता है। यह पेज बताता है कि वह कौन-सी गणना ले रहा है, और दोनों दिखाता है।

यह पंचांग कैसे बनता है, और इसकी सीमाएँ

पहले जगह

सूर्योदय और सूर्यास्त सिंगापुर के लिए स्विस एफ़िमेरिस से निकाले जाते हैं — अक्षांश 1.3521, देशांतर 103.8198, समय-क्षेत्र Asia/Singapore।

सूर्योदय की स्थिति

पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर चल रहे मानों से शुरू होते हैं। तिथि, नक्षत्र, योग और करण का पहला बदलाव ऊपर निकाला गया है; वार अगले सूर्योदय पर बदलता है।

दिन के अनुपात वाले भाग

राहु काल, यमगण्ड और गुलिक दिन के उजाले को आठ बराबर हिस्सों में बाँटकर, वार के अनुसार तय होते हैं। अभिजित नापे हुए दिन का बीच वाला पंद्रहवाँ हिस्सा है। चौघड़िया आठ भाग लेता है और होरा बारह।

कैलेंडर की गणना मायने रखती है

हिंदू मास एक चंद्रमास है, सूर्य की राशि का नया नाम नहीं। ऊपर दोनों गणनाएँ दी गई हैं क्योंकि कृष्ण पक्ष में ये एक ही दिन को अलग नाम देती हैं: पूर्णिमांत मास पूर्णिमा पर ख़त्म होता है, अमांत मास अमावस्या पर। जिस चंद्रमास में कोई संक्रांति न पड़े, वह अधिक मास होता है और उसे वैसा ही लिखा जाता है। त्योहार और व्रत की तारीख़ें यहाँ अभी नहीं दी जातीं।

पंचांग योजना बनाने का एक पारंपरिक ढाँचा है, किसी नतीजे की गारंटी नहीं। शादी, ऑपरेशन, क़ानूनी काग़ज़ात या बड़े पैसों के फ़ैसलों के लिए काम के हिसाब से निजी मुहूर्त निकलवाएँ और योग्य पेशेवर की सलाह लें।

पाँचों अंग कैसे काम करते हैं, जानें