उत्पन्ना एकादशी 2026 कब है?

2026 में उत्पन्ना एकादशी शुक्रवार, 4 दिसंबर को है। नई दिल्ली में एकादशी तिथि 3 दिसंबर, 23:04 से 4 दिसंबर, 23:45 तक रहेगी। पारण 5 दिसंबर को 06:58 से 09:04 तक है।

उत्पन्ना एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में यही तिथि मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी कहलाती है — दिन वही है, केवल महीने का नाम अलग। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय नई दिल्ली के लिए निकाला गया है।

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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

उत्पन्ना एकादशी 2026: तारीख और तिथि का समय

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026

तिथि
एकादशी, कृष्ण पक्ष
हिंदू मास
मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत) / कार्तिक (अमांत)
तिथि आरंभ
3 दिसंबर, 23:04
तिथि समाप्त
4 दिसंबर, 23:45
दिन का निर्णय
सूर्योदय
नई दिल्ली में सूर्योदय
4 दिसंबर, 06:58

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: उत्पन्ना एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

उत्पन्ना एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

उत्पन्ना एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तनई दिल्ली में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्त 11:50 से 12:32 शुभ
अमृत काल 05:02 से 06:43 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 05:09 से 06:03 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिनई दिल्ली में समय
राहु काल 10:52 से 12:11
यमगण्ड काल 14:47 से 16:05
दुर्मुहूर्त (पहला) 09:03 से 09:45
दुर्मुहूर्त (दूसरा) 12:32 से 13:13
वर्ज्यम् 18:51 से 20:33

ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

उत्पन्ना एकादशी 2026 पारण का समय

शनिवार, 5 दिसंबर 2026, 06:58 से 09:04

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 5 दिसंबर, 06:02 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

उत्पन्ना एकादशी 2026: स्मार्त और वैष्णव तारीख

उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, और दक्षिण व पश्चिम भारत की अमांत गणना में कार्तिक मास की। रात एक ही है — दोनों पद्धतियाँ कृष्ण पक्ष को अलग महीने के नाम से गिनती हैं।

इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 का अरुणोदय (4 दिस, 05:22) एकादशी में है, दशमी में नहीं।

ऊपर का हर दिन नई दिल्ली के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा और महत्व

उत्पन्ना एकादशी वह दिन है जब स्वयं एकादशी देवी का जन्म माना जाता है — उत्पन्ना यानी उत्पन्न हुई। यह देवउठनी के बाद के कृष्ण पक्ष की एकादशी है: उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में मार्गशीर्ष कृष्ण, अमांत गणना में कार्तिक कृष्ण। इसकी कथा हर एकादशी व्रत का आरंभ है, इसलिए जो लोग साल भर की एकादशी रखना शुरू करना चाहते हैं, वे प्रायः इसी से आरंभ करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के साथ एकादशी देवी की पूजा होती है।

उत्पन्ना एकादशी की कथा

संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: भविष्योत्तर पुराण, जहाँ श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि एकादशी व्रत कैसे आरंभ हुआ।

सतयुग में चंद्रावती नगरी से मुर नाम का एक दैत्य उठा और उसने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया। इंद्र और देवता पहले भगवान शिव के पास गए, जिन्होंने उन्हें विष्णु के पास भेजा, और भगवान विष्णु युद्ध के लिए निकले।

उन्होंने मुर की सेना का नाश कर दिया, पर स्वयं मुर से युद्ध बहुत लंबा चला। थककर विष्णु बदरिकाश्रम के पास हिमवती नाम की गुफा में विश्राम करने चले गए। मुर उनके पीछे-पीछे वहाँ पहुँचा, ताकि सोते हुए उन्हें मार सके।

जैसे ही दैत्य ने शस्त्र उठाया, भगवान के शरीर से एक तेजस्वी, शस्त्रधारी कन्या प्रकट हुई और उसने मुर को ललकारा। दोनों में युद्ध हुआ और उस कन्या ने उसे मार गिराया।

विष्णु जागे और मुर को मरा देखा तो पूछा कि यह किसने किया। कन्या ने कहा कि वह उन्हीं की शक्ति से उनकी रक्षा के लिए प्रकट हुई है। प्रसन्न होकर भगवान ने उसका नाम एकादशी रखा, क्योंकि वह ग्यारहवीं तिथि को जन्मी थी, और वर दिया कि जो उसके दिन श्रद्धा से व्रत रखेगा वह पापों से मुक्त होकर उनके धाम को जाएगा। पुराण कहता है कि एकादशी व्रत का आरंभ यहीं से है — इसीलिए यह उत्पन्ना एकादशी कहलाती है।

व्रत कैसे रखा जाता है

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
  • पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।

उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख

साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।

अगली एकादशी और उसका पारण · 2026 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ

आने वाले वर्षों में उत्पन्ना एकादशी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 आने वाली
2027 बुधवार, 24 नवंबर 2027 आने वाली
2028 सोमवार, 13 नवंबर 2028 आने वाली

पंचांगों में उत्पन्ना एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग उत्पन्ना एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: उत्पन्ना एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

उत्पन्ना एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2026 में उत्पन्ना एकादशी कब है?

2026 में उत्पन्ना एकादशी शुक्रवार, 4 दिसंबर को है। नई दिल्ली में एकादशी तिथि 3 दिसंबर, 23:04 से 4 दिसंबर, 23:45 तक रहेगी। पारण 5 दिसंबर को 06:58 से 09:04 तक है।

उत्पन्ना एकादशी की तिथि क्या है?

मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत) / कार्तिक (अमांत) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि। नई दिल्ली में यह तिथि 3 दिसंबर, 23:04 से 4 दिसंबर, 23:45 तक है, और उत्पन्ना एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

उत्पन्ना एकादशी का पारण कब करें?

शनिवार, 5 दिसंबर 2026 को 06:58 से 09:04 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

दूसरे कैलेंडर में उत्पन्ना एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल उत्पन्ना एकादशी कब है?

2027 में बुधवार, 24 नवंबर; 2028 में सोमवार, 13 नवंबर।

उत्पन्ना एकादशी क्यों रखी जाती है?

उत्पन्ना एकादशी वह दिन है जब स्वयं एकादशी देवी का जन्म माना जाता है — उत्पन्ना यानी उत्पन्न हुई। यह देवउठनी के बाद के कृष्ण पक्ष की एकादशी है: उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में मार्गशीर्ष कृष्ण, अमांत गणना में कार्तिक कृष्ण। इसकी कथा हर एकादशी व्रत का आरंभ है, इसलिए जो लोग साल भर की एकादशी रखना शुरू करना चाहते हैं, वे प्रायः इसी से आरंभ करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के साथ एकादशी देवी की पूजा होती है।

उत्पन्ना एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?

कथा भविष्योत्तर पुराण, जहाँ श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि एकादशी व्रत कैसे आरंभ हुआ में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

क्या स्मार्त और वैष्णव उत्पन्ना एकादशी अलग दिन है?

नहीं, इस बार दोनों शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।