तिथि कैलेंडर · भोपाल
द्वादशी 2027 में कब है
2027 में द्वादशी 25 बार पड़ती है। नीचे हर तिथि का दिन, आरंभ और समाप्ति का समय और वह महीना दिया है जिसमें वह आती है।
- यह तालिका भोपाल के लिए चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से इसी समय गणना की गई है — किसी छपे कैलेंडर से नकल नहीं की गई।
- हर तिथि का आरंभ और समाप्ति समय दिया गया है, ताकि आप दिन स्वयं जाँच सकें।
2027 की सभी द्वादशी तिथियाँ
| तारीख | पक्ष | हिंदू माह (पूर्णिमांत) | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|---|
| सोमवार, 4 जनवरी 2027 | कृष्ण | पौष | 3 जन, 16:08 | 4 जन, 18:16 | — |
| मंगलवार, 19 जनवरी 2027 | शुक्ल | पौष | 19 जन, 07:50 | 20 जन, 04:42 | क्षय तिथि |
| बुधवार, 3 फ़रवरी 2027 | कृष्ण | माघ | 2 फ़र, 11:11 | 3 फ़र, 13:50 | — |
| गुरुवार, 18 फ़रवरी 2027 | शुक्ल | माघ | 17 फ़र, 17:32 | 18 फ़र, 14:28 | — |
| शुक्रवार, 5 मार्च 2027 | कृष्ण | फाल्गुन | 4 मार्च, 07:25 | 5 मार्च, 09:55 | — |
| शुक्रवार, 19 मार्च 2027 | शुक्ल | फाल्गुन | 19 मार्च, 01:52 | 19 मार्च, 23:18 | — |
| शनिवार, 3 अप्रैल 2027 | कृष्ण | चैत्र | 3 अप्रै, 02:52 | 4 अप्रै, 04:27 | — |
| रविवार, 18 अप्रैल 2027 | शुक्ल | चैत्र | 17 अप्रै, 09:29 | 18 अप्रै, 07:42 | — |
| सोमवार, 3 मई 2027 | कृष्ण | वैशाख | 2 मई, 19:52 | 3 मई, 20:04 | — |
| सोमवार, 17 मई 2027 | शुक्ल | वैशाख | 16 मई, 17:14 | 17 मई, 16:29 | — |
| बुधवार, 2 जून 2027 | कृष्ण | ज्येष्ठ | 1 जून, 09:40 | 2 जून, 08:29 | — |
| मंगलवार, 15 जून 2027 | शुक्ल | ज्येष्ठ | 15 जून, 02:08 | 16 जून, 02:31 | — |
| गुरुवार, 1 जुलाई 2027 | कृष्ण | आषाढ़ | 30 जून, 20:31 | 1 जुला, 18:15 | — |
| गुरुवार, 15 जुलाई 2027 | शुक्ल | आषाढ़ | 14 जुला, 13:11 | 15 जुला, 14:41 | — |
| शुक्रवार, 30 जुलाई 2027 | कृष्ण | श्रावण | 30 जुला, 05:13 | 31 जुला, 02:19 | — |
| शुक्रवार, 13 अगस्त 2027 | शुक्ल | श्रावण | 13 अग, 03:00 | 14 अग, 05:22 | — |
| रविवार, 29 अगस्त 2027 | कृष्ण | भाद्रपद | 28 अग, 12:42 | 29 अग, 09:36 | — |
| रविवार, 12 सितंबर 2027 | शुक्ल | भाद्रपद | 11 सित, 19:36 | 12 सित, 22:13 | — |
| सोमवार, 27 सितंबर 2027 | कृष्ण | आश्विन | 26 सित, 19:50 | 27 सित, 16:55 | — |
| मंगलवार, 12 अक्तूबर 2027 | शुक्ल | आश्विन | 11 अक्टू, 14:09 | 12 अक्टू, 16:14 | — |
| मंगलवार, 26 अक्तूबर 2027 | कृष्ण | कार्तिक | 26 अक्टू, 03:22 | 27 अक्टू, 01:04 | — |
| गुरुवार, 11 नवंबर 2027 | शुक्ल | कार्तिक | 10 नव, 09:12 | 11 नव, 10:08 | — |
| गुरुवार, 25 नवंबर 2027 | कृष्ण | मार्गशीर्ष | 24 नव, 12:12 | 25 नव, 10:52 | — |
| शुक्रवार, 10 दिसंबर 2027 | शुक्ल | मार्गशीर्ष | 10 दिस, 03:20 | 11 दिस, 02:54 | — |
| शुक्रवार, 24 दिसंबर 2027 | कृष्ण | पौष | 23 दिस, 23:12 | 24 दिस, 23:09 | — |
समय भोपाल के अनुसार हैं। जिस पंक्ति पर क्षय तिथि लिखा है, वह तिथि किसी सूर्योदय पर नहीं थी — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो गई, और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। जिस पर अगले दिन भी मान्य लिखा है, वहाँ तिथि दो सूर्योदय तक चलती है, इसलिए दो परंपराएँ दो अलग दिन लेती हैं।
द्वादशी जनवरी 2027
जनवरी 2027 में द्वादशी 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 4 जनवरी 2027 — कृष्ण पक्ष, पौष। तिथि 3 जन, 16:08 → 4 जन, 18:16
- मंगलवार, 19 जनवरी 2027 — शुक्ल पक्ष, पौष। तिथि 19 जन, 07:50 → 20 जन, 04:42 (क्षय तिथि)
द्वादशी फ़रवरी 2027
फ़रवरी 2027 में द्वादशी 2 बार पड़ती है।
- बुधवार, 3 फ़रवरी 2027 — कृष्ण पक्ष, माघ। तिथि 2 फ़र, 11:11 → 3 फ़र, 13:50
- गुरुवार, 18 फ़रवरी 2027 — शुक्ल पक्ष, माघ। तिथि 17 फ़र, 17:32 → 18 फ़र, 14:28
द्वादशी मार्च 2027
मार्च 2027 में द्वादशी 2 बार पड़ती है।
- शुक्रवार, 5 मार्च 2027 — कृष्ण पक्ष, फाल्गुन। तिथि 4 मार्च, 07:25 → 5 मार्च, 09:55
- शुक्रवार, 19 मार्च 2027 — शुक्ल पक्ष, फाल्गुन। तिथि 19 मार्च, 01:52 → 19 मार्च, 23:18
द्वादशी अप्रैल 2027
अप्रैल 2027 में द्वादशी 2 बार पड़ती है।
- शनिवार, 3 अप्रैल 2027 — कृष्ण पक्ष, चैत्र। तिथि 3 अप्रै, 02:52 → 4 अप्रै, 04:27
- रविवार, 18 अप्रैल 2027 — शुक्ल पक्ष, चैत्र। तिथि 17 अप्रै, 09:29 → 18 अप्रै, 07:42
द्वादशी मई 2027
मई 2027 में द्वादशी 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 3 मई 2027 — कृष्ण पक्ष, वैशाख। तिथि 2 मई, 19:52 → 3 मई, 20:04
- सोमवार, 17 मई 2027 — शुक्ल पक्ष, वैशाख। तिथि 16 मई, 17:14 → 17 मई, 16:29
द्वादशी जून 2027
जून 2027 में द्वादशी 2 बार पड़ती है।
- बुधवार, 2 जून 2027 — कृष्ण पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 1 जून, 09:40 → 2 जून, 08:29
- मंगलवार, 15 जून 2027 — शुक्ल पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 15 जून, 02:08 → 16 जून, 02:31
द्वादशी जुलाई 2027
जुलाई 2027 में द्वादशी 3 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 1 जुलाई 2027 — कृष्ण पक्ष, आषाढ़। तिथि 30 जून, 20:31 → 1 जुला, 18:15
- गुरुवार, 15 जुलाई 2027 — शुक्ल पक्ष, आषाढ़। तिथि 14 जुला, 13:11 → 15 जुला, 14:41
- शुक्रवार, 30 जुलाई 2027 — कृष्ण पक्ष, श्रावण। तिथि 30 जुला, 05:13 → 31 जुला, 02:19
द्वादशी अगस्त 2027
अगस्त 2027 में द्वादशी 2 बार पड़ती है।
- शुक्रवार, 13 अगस्त 2027 — शुक्ल पक्ष, श्रावण। तिथि 13 अग, 03:00 → 14 अग, 05:22
- रविवार, 29 अगस्त 2027 — कृष्ण पक्ष, भाद्रपद। तिथि 28 अग, 12:42 → 29 अग, 09:36
द्वादशी सितंबर 2027
सितंबर 2027 में द्वादशी 2 बार पड़ती है।
- रविवार, 12 सितंबर 2027 — शुक्ल पक्ष, भाद्रपद। तिथि 11 सित, 19:36 → 12 सित, 22:13
- सोमवार, 27 सितंबर 2027 — कृष्ण पक्ष, आश्विन। तिथि 26 सित, 19:50 → 27 सित, 16:55
द्वादशी अक्तूबर 2027
अक्तूबर 2027 में द्वादशी 2 बार पड़ती है।
- मंगलवार, 12 अक्तूबर 2027 — शुक्ल पक्ष, आश्विन। तिथि 11 अक्टू, 14:09 → 12 अक्टू, 16:14
- मंगलवार, 26 अक्तूबर 2027 — कृष्ण पक्ष, कार्तिक। तिथि 26 अक्टू, 03:22 → 27 अक्टू, 01:04
द्वादशी नवंबर 2027
नवंबर 2027 में द्वादशी 2 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 11 नवंबर 2027 — शुक्ल पक्ष, कार्तिक। तिथि 10 नव, 09:12 → 11 नव, 10:08
- गुरुवार, 25 नवंबर 2027 — कृष्ण पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 24 नव, 12:12 → 25 नव, 10:52
द्वादशी दिसंबर 2027
दिसंबर 2027 में द्वादशी 2 बार पड़ती है।
- शुक्रवार, 10 दिसंबर 2027 — शुक्ल पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 10 दिस, 03:20 → 11 दिस, 02:54
- शुक्रवार, 24 दिसंबर 2027 — कृष्ण पक्ष, पौष। तिथि 23 दिस, 23:12 → 24 दिस, 23:09
द्वादशी का दिन कैसे तय होता है
तिथि एक चंद्रमास का तीसवाँ भाग है — चंद्रमा का सूर्य से 12° आगे बढ़ना — इसलिए यह औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, जबकि दिन 24 घंटे का। इसीलिए तिथि लगभग कभी सूर्योदय पर आरंभ नहीं होती। यह पृष्ठ सामान्य नियम मानता है: सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, दिन उसी का कहलाता है। ऊपर की तालिका में इसके दो परिणाम दिखते हैं और दोनों त्रुटि नहीं हैं। जब कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय पर चलती है, तब दोनों दिन सचमुच उसके होते हैं और परंपराएँ बँट जाती हैं। जब वह किसी सूर्योदय को नहीं छूती, तब वह क्षय तिथि है और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं; दिन उनकी व्याख्या है।
अन्य शहर
कोई तिथि किस दिन की कहलाएगी यह सूर्योदय तय करता है, और भारत में सूर्योदय एक घंटे से भी अधिक अंतर रखता है — इसलिए दो शहरों में केवल समय ही नहीं, दिन भी अलग हो सकता है।
यह तालिका आपके चुने शहर के लिए फिर से गणना होती है। ये लिंक इसी पृष्ठ के रूप हैं: हर एक ऊपर के पते पर canonical रखता है और खोज इंजनों से अनुक्रमित न करने को कहता है।
2027 की अन्य तिथियाँ
संबंधित पंचांग पृष्ठ
सामान्य प्रश्न
द्वादशी कब है 2027 में?
2027 में अगली द्वादशी सोमवार, 4 जनवरी 2027 को है। तिथि 3 जन, 16:08 → 4 जन, 18:16 तक चलती है (भोपाल के समय अनुसार)। पूरे वर्ष की 25 तिथियाँ ऊपर तालिका में दी गई हैं।
2027 में द्वादशी कितनी बार आती है?
25 बार — शुक्ल पक्ष में 12 और कृष्ण पक्ष में 13। संख्या हर वर्ष बदलती है क्योंकि बारह चंद्रमास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे पड़ते हैं, और अधिक मास इसे और बदल देता है।
शुक्ल द्वादशी और कृष्ण द्वादशी में क्या अंतर है?
दोनों एक ही तिथि संख्या हैं, अलग पक्ष की। शुक्ल पक्ष अमावस्या के बाद का उजाला पखवाड़ा है और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद का। द्वादशी हर चंद्रमास में दो बार आती है, एक बार प्रत्येक पक्ष में, और ऊपर की तालिका में पक्ष का स्तंभ बताता है कि कौन-सी कौन है।
मेरे कैलेंडर में द्वादशी की तारीख अलग क्यों है?
क्योंकि तिथि शायद ही कभी सूर्योदय पर आरंभ या समाप्त होती है। जब वह दो दिन के सूर्योदय पर चल रही हो, या किसी पर भी न हो, तब परंपराएँ बँट जाती हैं। ऊपर दिए आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं — दिन उनकी व्याख्या है, और यह पृष्ठ बताता है कि उसने कौन-सी व्याख्या ली।
क्या द्वादशी पूरे भारत में एक ही दिन होती है?
हमेशा नहीं। दिन सूर्योदय से तय होता है और भारत में सूर्योदय एक घंटे से अधिक अंतर रखता है, इसलिए एक तिथि जो भोपाल में सूर्योदय के ठीक बाद समाप्त होती है, पश्चिम के किसी शहर में उससे पहले समाप्त हो सकती है और दिन बदल जाता है। ऊपर शहर बदलकर देखिए।
द्वादशी को और किन नामों से खोजा जाता है?
द्वादशी तिथि, बारस — ये सब एक ही तिथि हैं। इस पृष्ठ का पता एक ही है ताकि उत्तर एक जगह रहे।
क्षय द्वादशी क्या होती है?
2027 में 1 बार द्वादशी क्षय तिथि है: मंगलवार, 19 जनवरी 2027। क्षय तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो जाती है। व्रत फिर भी रखा जाता है, उसी दिन जिस दिन वह चली, पर सामान्य सूर्योदय नियम वहाँ लागू नहीं होता।