शुक्ल पक्ष · पूर्णिमा तिथि · भाद्रपद
पितृ पक्ष 2026 कब है?
2026 में पितृ पक्ष शनिवार, 26 सितंबर से शनिवार, 10 अक्तूबर तक है — 15 दिन। पूर्णिमा श्राद्ध शनिवार, 26 सितंबर को है; कृष्ण पक्ष प्रतिपदा श्राद्ध से रविवार, 27 सितंबर को शुरू होकर सर्वपितृ अमावस्या पर समाप्त होता है। आज इसका 13वाँ दिन है।
पितृ पक्ष कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।
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इस पेज का हर समय मुंबई के लिए निकाला गया है।
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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।
मुंबई के लिए गणना
पितृ पक्ष 2026: तारीख और तिथि का समय
शनिवार, 26 सितंबर से शनिवार, 10 अक्तूबर 2026 तक
- पहला दिन
- शनिवार, 26 सितंबर 2026
- अंतिम दिन
- शनिवार, 10 अक्तूबर 2026
- अवधि
- 15 दिन
- आरंभ की तिथि
- पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
पहला और अंतिम दिन दोनों मुंबई के लिए चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से निकाले गए हैं, इसलिए अवधि की लंबाई भी गणना का नतीजा है, कोई तय संख्या नहीं।
आने वाले वर्षों में पितृ पक्ष की तारीख
इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति मुंबई के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।
| वर्ष | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| 2026 | शनिवार, 26 सितंबर से शनिवार, 10 अक्तूबर 2026 तक | आने वाली |
| 2027 | बुधवार, 15 सितंबर से गुरुवार, 30 सितंबर 2027 तक | आने वाली |
| 2028 | रविवार, 3 सितंबर से सोमवार, 18 सितंबर 2028 तक | आने वाली |
पंचांगों में पितृ पक्ष की तारीख अलग क्यों होती है
दो पंचांग पितृ पक्ष की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।
- तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
- महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
- दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: पितृ पक्ष का निर्णय अपराह्न से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
- शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।
आगे आने वाले त्योहार
- शारदीय नवरात्रि — रविवार, 11 अक्तूबर से सोमवार, 19 अक्तूबर 2026 तक
- दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) — शनिवार, 17 अक्तूबर 2026
- दुर्गा अष्टमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- महा नवमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- दशहरा (विजयादशमी) — मंगलवार, 20 अक्तूबर 2026
- शरद पूर्णिमा — रविवार, 25 अक्तूबर 2026
- करवा चौथ — गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026
- धनतेरस — शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
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पितृ पक्ष से जुड़े सामान्य प्रश्न
2026 में पितृ पक्ष कब है?
2026 में पितृ पक्ष शनिवार, 26 सितंबर से शनिवार, 10 अक्तूबर तक है — 15 दिन। पूर्णिमा श्राद्ध शनिवार, 26 सितंबर को है; कृष्ण पक्ष प्रतिपदा श्राद्ध से रविवार, 27 सितंबर को शुरू होकर सर्वपितृ अमावस्या पर समाप्त होता है। आज इसका 13वाँ दिन है।
पितृ पक्ष कितने दिन का होता है?
इस बार 15 दिन — शनिवार, 26 सितंबर से शनिवार, 10 अक्तूबर 2026 तक। दोनों छोर हर साल चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से निकाले जाते हैं, इसलिए दिनों की गिनती भी साल-दर-साल बदल सकती है।
अगले साल पितृ पक्ष कब है?
2027 में बुधवार, 15 सितंबर; 2028 में रविवार, 3 सितंबर।