शुक्ल पक्ष · द्वादशी तिथि · कार्तिक
तुलसी विवाह 2026 कब है?
2026 में तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर को है। वाराणसी में तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त 17:08 से 19:32 तक है।
तुलसी विवाह कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।
शहर बदलें
इस पेज का हर समय वाराणसी के लिए निकाला गया है।
सभी शहर देखें
भारत के बाहर
नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।
वाराणसी के लिए गणना
तुलसी विवाह 2026: तारीख और तिथि का समय
शनिवार, 21 नवंबर 2026
- तिथि
- द्वादशी, शुक्ल पक्ष
- हिंदू मास
- कार्तिक
- तिथि आरंभ
- 21 नवंबर, 06:32
- तिथि समाप्त
- 22 नवंबर, 04:57
- दिन का निर्णय
- सूर्योदय
- वाराणसी में सूर्योदय
- 21 नवंबर, 06:19
इस बार तिथि क्षय है। द्वादशी तिथि एक निर्णायक क्षण के बाद शुरू होकर अगले से पहले ख़त्म हो जाती है, यानी किसी को नहीं छूती, और सामान्य नियम दिन नहीं चुन पाता। पर्व रद्द नहीं होता: वह उस दिन मनाया जाता है जिस दिन यह तिथि चलती है, जो ऊपर की तारीख है। यह बताना ज़रूरी है — सिर्फ़ तारीख छापने का मतलब होता कि वह नियम लागू हुआ जो इस साल लागू नहीं हुआ।
ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: तुलसी विवाह का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।
मुहूर्त · वाराणसी
तुलसी विवाह 2026 तुलसी विवाह मुहूर्त
17:08 से 19:32
तुलसी विवाह का दिन सूर्योदय पर द्वादशी से तय होता है, पर विवाह शाम को किया जाता है — इसलिए मुहूर्त प्रदोष काल है, सूर्यास्त के बाद का समय, जब तक द्वादशी तिथि चल रही हो।
उस दिन के शुभ समय
| मुहूर्त | वाराणसी में समय | प्रकृति |
|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 11:22 से 12:05 | शुभ |
| अमृत काल | 03:36 से 05:09 | सर्वाधिक शुभ |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:33 से 05:26 | शुभ |
जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।
| अवधि | वाराणसी में समय |
|---|---|
| राहु काल | 09:01 से 10:22 |
| यमगण्ड काल | 13:04 से 14:26 |
| दुर्मुहूर्त (पहला) | 06:19 से 07:02 |
| दुर्मुहूर्त (दूसरा) | 07:02 से 07:45 |
| वर्ज्यम् | 18:23 से 19:55 |
ऊपर का हर समय वाराणसी के लिए शनिवार, 21 नवंबर 2026 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।
आने वाले वर्षों में तुलसी विवाह की तारीख
इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति वाराणसी के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।
| वर्ष | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| 2026 | शनिवार, 21 नवंबर 2026 | आने वाली |
| 2027 | गुरुवार, 11 नवंबर 2027 | आने वाली |
| 2028 | सोमवार, 30 अक्तूबर 2028 | आने वाली |
पंचांगों में तुलसी विवाह की तारीख अलग क्यों होती है
दो पंचांग तुलसी विवाह की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।
- तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
- महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
- दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: तुलसी विवाह का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
- शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।
आगे आने वाले त्योहार
- पितृ पक्ष — शनिवार, 26 सितंबर से शनिवार, 10 अक्तूबर 2026 तक
- शारदीय नवरात्रि — रविवार, 11 अक्तूबर से सोमवार, 19 अक्तूबर 2026 तक
- दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) — शनिवार, 17 अक्तूबर 2026
- दुर्गा अष्टमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- महा नवमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- दशहरा (विजयादशमी) — मंगलवार, 20 अक्तूबर 2026
- शरद पूर्णिमा — रविवार, 25 अक्तूबर 2026
- करवा चौथ — गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026
संबंधित पेज
तुलसी विवाह से जुड़े सामान्य प्रश्न
2026 में तुलसी विवाह कब है?
2026 में तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर को है। वाराणसी में तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त 17:08 से 19:32 तक है।
तुलसी विवाह की तिथि क्या है?
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि। वाराणसी में यह तिथि 21 नवंबर, 06:32 से 22 नवंबर, 04:57 तक है, और तुलसी विवाह का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।
इस बार तिथि को क्षय क्यों बताया गया है?
द्वादशी तिथि इस बार एक निर्णायक क्षण के बाद शुरू होकर अगले से पहले ख़त्म हो जाती है, यानी किसी को नहीं छूती — यह क्षय तिथि है। पर्व रद्द नहीं होता: वह उसी दिन मनाया जाता है जिस दिन तिथि चलती है, जो ऊपर दी गई तारीख है।
वाराणसी में तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त क्या है?
21 नवंबर को 17:08 से 19:32 तक। यह सूर्योदय और द्वादशी तिथि का मेल है, वाराणसी के लिए निकाला गया — अवधि आपके शहर के सूर्यास्त के साथ बदलती है, और तिथि उसके बीच में भी ख़त्म हो सकती है।
दूसरे कैलेंडर में तुलसी विवाह की तारीख अलग क्यों है?
मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।
अगले साल तुलसी विवाह कब है?
2027 में गुरुवार, 11 नवंबर; 2028 में सोमवार, 30 अक्तूबर।