कृष्ण पक्ष · अमावस्या तिथि · ज्येष्ठ (पूर्णिमांत) / वैशाख (अमांत)
वट सावित्री व्रत 2027 कब है?
2027 में वट सावित्री व्रत शुक्रवार, 4 जून को है। पुणे में अमावस्या तिथि 4 जून, 04:05 से 5 जून, 01:10 तक रहेगी।
वट सावित्री व्रत कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह पूर्णिमांत गणना में ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। दक्षिण और पश्चिम भारत की अमांत गणना में यही तिथि वैशाख कृष्ण अमावस्या कहलाती है — दिन वही है, केवल महीने का नाम अलग। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।
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इस पेज का हर समय पुणे के लिए निकाला गया है।
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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।
पुणे के लिए गणना
वट सावित्री व्रत 2027: तारीख और तिथि का समय
शुक्रवार, 4 जून 2027
- तिथि
- अमावस्या, कृष्ण पक्ष
- हिंदू मास
- ज्येष्ठ (पूर्णिमांत) / वैशाख (अमांत)
- तिथि आरंभ
- 4 जून, 04:05
- तिथि समाप्त
- 5 जून, 01:10
- दिन का निर्णय
- सूर्योदय
- पुणे में सूर्योदय
- 4 जून, 05:57
ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: वट सावित्री व्रत का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।
मुहूर्त · पुणे
वट सावित्री व्रत 2027 शुभ मुहूर्त
वट सावित्री व्रत का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।
उस दिन के शुभ समय
| मुहूर्त | पुणे में समय | प्रकृति |
|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:06 से 12:59 | शुभ |
| अमृत काल | 07:00 से 08:29 | सर्वाधिक शुभ |
| अमृत काल (दूसरा) | 04:07 से 05:35 | सर्वाधिक शुभ |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:30 से 05:13 | शुभ |
जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।
| अवधि | पुणे में समय |
|---|---|
| राहु काल | 10:53 से 12:32 |
| यमगण्ड काल | 15:50 से 17:29 |
| दुर्मुहूर्त (पहला) | 08:35 से 09:28 |
| दुर्मुहूर्त (दूसरा) | 12:59 से 13:52 |
| वर्ज्यम् | 23:46 से 01:13 |
ऊपर का हर समय पुणे के लिए शुक्रवार, 4 जून 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।
आने वाले वर्षों में वट सावित्री व्रत की तारीख
इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति पुणे के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।
| वर्ष | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| 2026 | शनिवार, 16 मई 2026 | बीत गई |
| 2027 | शुक्रवार, 4 जून 2027 | आने वाली |
| 2028 | बुधवार, 24 मई 2028 | आने वाली |
पंचांगों में वट सावित्री व्रत की तारीख अलग क्यों होती है
दो पंचांग वट सावित्री व्रत की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।
- तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
- महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
- दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: वट सावित्री व्रत का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
- शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।
आगे आने वाले त्योहार
- पितृ पक्ष — शनिवार, 26 सितंबर से शनिवार, 10 अक्तूबर 2026 तक
- शारदीय नवरात्रि — रविवार, 11 अक्तूबर से सोमवार, 19 अक्तूबर 2026 तक
- दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) — शनिवार, 17 अक्तूबर 2026
- दुर्गा अष्टमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- महा नवमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- दशहरा (विजयादशमी) — मंगलवार, 20 अक्तूबर 2026
- शरद पूर्णिमा — रविवार, 25 अक्तूबर 2026
- करवा चौथ — गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026
संबंधित पेज
वट सावित्री व्रत से जुड़े सामान्य प्रश्न
2027 में वट सावित्री व्रत कब है?
2027 में वट सावित्री व्रत शुक्रवार, 4 जून को है। पुणे में अमावस्या तिथि 4 जून, 04:05 से 5 जून, 01:10 तक रहेगी।
वट सावित्री व्रत की तिथि क्या है?
ज्येष्ठ (पूर्णिमांत) / वैशाख (अमांत) मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि। पुणे में यह तिथि 4 जून, 04:05 से 5 जून, 01:10 तक है, और वट सावित्री व्रत का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।
दूसरे कैलेंडर में वट सावित्री व्रत की तारीख अलग क्यों है?
मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।
अगले साल वट सावित्री व्रत कब है?
2028 में बुधवार, 24 मई।