तिथि कैलेंडर · टोरंटो
द्वितीया 2027 में कब है
2027 में द्वितीया 25 बार पड़ती है। नीचे हर तिथि का दिन, आरंभ और समाप्ति का समय और वह महीना दिया है जिसमें वह आती है।
- यह तालिका टोरंटो के लिए चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से इसी समय गणना की गई है — किसी छपे कैलेंडर से नकल नहीं की गई।
- हर तिथि का आरंभ और समाप्ति समय दिया गया है, ताकि आप दिन स्वयं जाँच सकें।
2027 की सभी द्वितीया तिथियाँ
| तारीख | पक्ष | हिंदू माह (पूर्णिमांत) | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|---|
| शनिवार, 9 जनवरी 2027 | शुक्ल | पौष | 8 जन, 18:04 | 9 जन, 20:37 | — |
| शनिवार, 23 जनवरी 2027 | कृष्ण | माघ | 23 जन, 03:43 | 24 जन, 00:28 | — |
| सोमवार, 8 फ़रवरी 2027 | शुक्ल | माघ | 7 फ़र, 12:58 | 8 फ़र, 14:37 | — |
| सोमवार, 22 फ़रवरी 2027 | कृष्ण | फाल्गुन | 21 फ़र, 15:34 | 22 फ़र, 13:09 | — |
| मंगलवार, 9 मार्च 2027 | शुक्ल | फाल्गुन | 9 मार्च, 05:11 | 10 मार्च, 05:23 | — |
| मंगलवार, 23 मार्च 2027 | कृष्ण | चैत्र | 23 मार्च, 04:58 | 24 मार्च, 03:45 | — |
| गुरुवार, 8 अप्रैल 2027 | शुक्ल | चैत्र | 7 अप्रै, 18:59 | 8 अप्रै, 17:40 | — |
| गुरुवार, 22 अप्रैल 2027 | कृष्ण | वैशाख | 21 अप्रै, 18:00 | 22 अप्रै, 18:07 | — |
| शुक्रवार, 7 मई 2027 | शुक्ल | वैशाख | 7 मई, 04:44 | 8 मई, 02:13 | — |
| शनिवार, 22 मई 2027 | कृष्ण | ज्येष्ठ | 21 मई, 07:54 | 22 मई, 09:18 | — |
| रविवार, 6 जून 2027 | शुक्ल | ज्येष्ठ | 5 जून, 12:29 | 6 जून, 09:11 | — |
| रविवार, 20 जून 2027 | कृष्ण | आषाढ़ | 19 जून, 22:46 | 21 जून, 01:06 | — |
| सोमवार, 5 जुलाई 2027 | शुक्ल | आषाढ़ | 4 जुला, 19:21 | 5 जुला, 15:44 | — |
| मंगलवार, 20 जुलाई 2027 | कृष्ण | श्रावण | 19 जुला, 14:18 | 20 जुला, 16:52 | — |
| मंगलवार, 3 अगस्त 2027 | शुक्ल | श्रावण | 3 अग, 02:22 | 3 अग, 22:50 | — |
| बुधवार, 18 अगस्त 2027 | कृष्ण | भाद्रपद | 18 अग, 05:46 | 19 अग, 07:46 | अगले दिन भी मान्य |
| गुरुवार, 2 सितंबर 2027 | शुक्ल | भाद्रपद | 1 सित, 10:21 | 2 सित, 07:20 | — |
| शुक्रवार, 17 सितंबर 2027 | कृष्ण | आश्विन | 16 सित, 20:22 | 17 सित, 21:14 | — |
| शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2027 | शुक्ल | आश्विन | 30 सित, 20:05 | 1 अक्टू, 18:04 | — |
| रविवार, 17 अक्तूबर 2027 | कृष्ण | कार्तिक | 16 अक्टू, 09:43 | 17 अक्टू, 09:14 | — |
| शनिवार, 30 अक्तूबर 2027 | शुक्ल | कार्तिक | 30 अक्टू, 08:22 | 31 अक्टू, 07:44 | क्षय तिथि |
| सोमवार, 15 नवंबर 2027 | कृष्ण | मार्गशीर्ष | 14 नव, 20:59 | 15 नव, 19:12 | — |
| सोमवार, 29 नवंबर 2027 | शुक्ल | मार्गशीर्ष | 28 नव, 22:43 | 29 नव, 23:39 | — |
| मंगलवार, 14 दिसंबर 2027 | कृष्ण | पौष | 14 दिस, 08:32 | 15 दिस, 05:43 | क्षय तिथि |
| बुधवार, 29 दिसंबर 2027 | शुक्ल | पौष | 28 दिस, 16:59 | 29 दिस, 19:10 | — |
समय टोरंटो के अनुसार हैं। जिस पंक्ति पर क्षय तिथि लिखा है, वह तिथि किसी सूर्योदय पर नहीं थी — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो गई, और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। जिस पर अगले दिन भी मान्य लिखा है, वहाँ तिथि दो सूर्योदय तक चलती है, इसलिए दो परंपराएँ दो अलग दिन लेती हैं।
द्वितीया जनवरी 2027
जनवरी 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- शनिवार, 9 जनवरी 2027 — शुक्ल पक्ष, पौष। तिथि 8 जन, 18:04 → 9 जन, 20:37
- शनिवार, 23 जनवरी 2027 — कृष्ण पक्ष, माघ। तिथि 23 जन, 03:43 → 24 जन, 00:28
द्वितीया फ़रवरी 2027
फ़रवरी 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 8 फ़रवरी 2027 — शुक्ल पक्ष, माघ। तिथि 7 फ़र, 12:58 → 8 फ़र, 14:37
- सोमवार, 22 फ़रवरी 2027 — कृष्ण पक्ष, फाल्गुन। तिथि 21 फ़र, 15:34 → 22 फ़र, 13:09
द्वितीया मार्च 2027
मार्च 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- मंगलवार, 9 मार्च 2027 — शुक्ल पक्ष, फाल्गुन। तिथि 9 मार्च, 05:11 → 10 मार्च, 05:23
- मंगलवार, 23 मार्च 2027 — कृष्ण पक्ष, चैत्र। तिथि 23 मार्च, 04:58 → 24 मार्च, 03:45
द्वितीया अप्रैल 2027
अप्रैल 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 8 अप्रैल 2027 — शुक्ल पक्ष, चैत्र। तिथि 7 अप्रै, 18:59 → 8 अप्रै, 17:40
- गुरुवार, 22 अप्रैल 2027 — कृष्ण पक्ष, वैशाख। तिथि 21 अप्रै, 18:00 → 22 अप्रै, 18:07
द्वितीया मई 2027
मई 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- शुक्रवार, 7 मई 2027 — शुक्ल पक्ष, वैशाख। तिथि 7 मई, 04:44 → 8 मई, 02:13
- शनिवार, 22 मई 2027 — कृष्ण पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 21 मई, 07:54 → 22 मई, 09:18
द्वितीया जून 2027
जून 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- रविवार, 6 जून 2027 — शुक्ल पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 5 जून, 12:29 → 6 जून, 09:11
- रविवार, 20 जून 2027 — कृष्ण पक्ष, आषाढ़। तिथि 19 जून, 22:46 → 21 जून, 01:06
द्वितीया जुलाई 2027
जुलाई 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 5 जुलाई 2027 — शुक्ल पक्ष, आषाढ़। तिथि 4 जुला, 19:21 → 5 जुला, 15:44
- मंगलवार, 20 जुलाई 2027 — कृष्ण पक्ष, श्रावण। तिथि 19 जुला, 14:18 → 20 जुला, 16:52
द्वितीया अगस्त 2027
अगस्त 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- मंगलवार, 3 अगस्त 2027 — शुक्ल पक्ष, श्रावण। तिथि 3 अग, 02:22 → 3 अग, 22:50
- बुधवार, 18 अगस्त 2027 — कृष्ण पक्ष, भाद्रपद। तिथि 18 अग, 05:46 → 19 अग, 07:46 (अगले दिन भी मान्य)
द्वितीया सितंबर 2027
सितंबर 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 2 सितंबर 2027 — शुक्ल पक्ष, भाद्रपद। तिथि 1 सित, 10:21 → 2 सित, 07:20
- शुक्रवार, 17 सितंबर 2027 — कृष्ण पक्ष, आश्विन। तिथि 16 सित, 20:22 → 17 सित, 21:14
द्वितीया अक्तूबर 2027
अक्तूबर 2027 में द्वितीया 3 बार पड़ती है।
- शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2027 — शुक्ल पक्ष, आश्विन। तिथि 30 सित, 20:05 → 1 अक्टू, 18:04
- रविवार, 17 अक्तूबर 2027 — कृष्ण पक्ष, कार्तिक। तिथि 16 अक्टू, 09:43 → 17 अक्टू, 09:14
- शनिवार, 30 अक्तूबर 2027 — शुक्ल पक्ष, कार्तिक। तिथि 30 अक्टू, 08:22 → 31 अक्टू, 07:44 (क्षय तिथि)
द्वितीया नवंबर 2027
नवंबर 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 15 नवंबर 2027 — कृष्ण पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 14 नव, 20:59 → 15 नव, 19:12
- सोमवार, 29 नवंबर 2027 — शुक्ल पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 28 नव, 22:43 → 29 नव, 23:39
द्वितीया दिसंबर 2027
दिसंबर 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- मंगलवार, 14 दिसंबर 2027 — कृष्ण पक्ष, पौष। तिथि 14 दिस, 08:32 → 15 दिस, 05:43 (क्षय तिथि)
- बुधवार, 29 दिसंबर 2027 — शुक्ल पक्ष, पौष। तिथि 28 दिस, 16:59 → 29 दिस, 19:10
द्वितीया का दिन कैसे तय होता है
तिथि एक चंद्रमास का तीसवाँ भाग है — चंद्रमा का सूर्य से 12° आगे बढ़ना — इसलिए यह औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, जबकि दिन 24 घंटे का। इसीलिए तिथि लगभग कभी सूर्योदय पर आरंभ नहीं होती। यह पृष्ठ सामान्य नियम मानता है: सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, दिन उसी का कहलाता है। ऊपर की तालिका में इसके दो परिणाम दिखते हैं और दोनों त्रुटि नहीं हैं। जब कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय पर चलती है, तब दोनों दिन सचमुच उसके होते हैं और परंपराएँ बँट जाती हैं। जब वह किसी सूर्योदय को नहीं छूती, तब वह क्षय तिथि है और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं; दिन उनकी व्याख्या है।
अन्य शहर
कोई तिथि किस दिन की कहलाएगी यह सूर्योदय तय करता है, और भारत में सूर्योदय एक घंटे से भी अधिक अंतर रखता है — इसलिए दो शहरों में केवल समय ही नहीं, दिन भी अलग हो सकता है।
यह तालिका आपके चुने शहर के लिए फिर से गणना होती है। ये लिंक इसी पृष्ठ के रूप हैं: हर एक ऊपर के पते पर canonical रखता है और खोज इंजनों से अनुक्रमित न करने को कहता है।
2027 की अन्य तिथियाँ
संबंधित पंचांग पृष्ठ
सामान्य प्रश्न
द्वितीया कब है 2027 में?
2027 में अगली द्वितीया शनिवार, 9 जनवरी 2027 को है। तिथि 8 जन, 18:04 → 9 जन, 20:37 तक चलती है (टोरंटो के समय अनुसार)। पूरे वर्ष की 25 तिथियाँ ऊपर तालिका में दी गई हैं।
2027 में द्वितीया कितनी बार आती है?
25 बार — शुक्ल पक्ष में 13 और कृष्ण पक्ष में 12। संख्या हर वर्ष बदलती है क्योंकि बारह चंद्रमास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे पड़ते हैं, और अधिक मास इसे और बदल देता है।
शुक्ल द्वितीया और कृष्ण द्वितीया में क्या अंतर है?
दोनों एक ही तिथि संख्या हैं, अलग पक्ष की। शुक्ल पक्ष अमावस्या के बाद का उजाला पखवाड़ा है और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद का। द्वितीया हर चंद्रमास में दो बार आती है, एक बार प्रत्येक पक्ष में, और ऊपर की तालिका में पक्ष का स्तंभ बताता है कि कौन-सी कौन है।
मेरे कैलेंडर में द्वितीया की तारीख अलग क्यों है?
क्योंकि तिथि शायद ही कभी सूर्योदय पर आरंभ या समाप्त होती है। जब वह दो दिन के सूर्योदय पर चल रही हो, या किसी पर भी न हो, तब परंपराएँ बँट जाती हैं। ऊपर दिए आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं — दिन उनकी व्याख्या है, और यह पृष्ठ बताता है कि उसने कौन-सी व्याख्या ली।
क्या द्वितीया पूरे भारत में एक ही दिन होती है?
हमेशा नहीं। दिन सूर्योदय से तय होता है और भारत में सूर्योदय एक घंटे से अधिक अंतर रखता है, इसलिए एक तिथि जो टोरंटो में सूर्योदय के ठीक बाद समाप्त होती है, पश्चिम के किसी शहर में उससे पहले समाप्त हो सकती है और दिन बदल जाता है। ऊपर शहर बदलकर देखिए।
द्वितीया को और किन नामों से खोजा जाता है?
दूज, बीज — ये सब एक ही तिथि हैं। इस पृष्ठ का पता एक ही है ताकि उत्तर एक जगह रहे।
क्षय द्वितीया क्या होती है?
2027 में 2 बार द्वितीया क्षय तिथि है: शनिवार, 30 अक्तूबर 2027; मंगलवार, 14 दिसंबर 2027। क्षय तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो जाती है। व्रत फिर भी रखा जाता है, उसी दिन जिस दिन वह चली, पर सामान्य सूर्योदय नियम वहाँ लागू नहीं होता।