अगली एकादशी कब है?

अगली एकादशी गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026 को है। कुआलालंपुर में एकादशी तिथि 21 अक्तूबर, 16:42 से 22 अक्तूबर, 17:18 तक रहेगी। व्रत का पारण शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026 को 06:56 से 09:20 तक है।

अगली एकादशी: तारीख और तिथि का समय

गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026

पापांकुशा एकादशी · 14 दिन बाद · चंद्रोदय 15:57

तिथि आरंभ
21 अक्तूबर, 16:42
तिथि समाप्त
22 अक्तूबर, 17:18
पक्ष
शुक्ल
हिंदू मास
आश्विन

पारण — व्रत खोलने का समय

शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026, 06:56 से 09:20

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 22 अक्तूबर, 23:15 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है, इसलिए यह हर चंद्र मास में दो बार आती है। नीचे की तारीख आपके शहर के सूर्योदय और चंद्रमा-सूर्य की स्थिति से निकाली गई है, और तिथि का आरंभ और समाप्ति समय भी साथ दिया है — वे क्षण खगोल हैं, और दिन उनकी व्याख्या।

इस पेज का हर समय कुआलालंपुर के लिए निकाला गया है।

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कोई तिथि किस दिन की कहलाएगी यह सूर्योदय तय करता है, और भारत में सूर्योदय एक घंटे से भी अधिक अंतर रखता है — इसलिए दो शहरों में केवल समय ही नहीं, दिन भी अलग हो सकता है।

एकादशी 2026: सभी तारीखें

2026 में कुआलालंपुर के लिए 24 एकादशी हैं। यह संख्या हर साल बदलती है: बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, और अधिक मास वाले साल में संख्या बढ़ जाती है।

तारीख पक्ष मास (पूर्णिमांत) तिथि आरंभ तिथि समाप्त पारण पर्व
14 जनवरी, बुधवार कृष्ण माघ 13 जनवरी, 17:48 14 जनवरी, 20:23 15 जनवरी, 07:23–09:47 —
29 जनवरी, गुरुवार शुक्ल माघ 28 जनवरी, 19:06 29 जनवरी, 16:25 30 जनवरी, 07:26–09:50 —
13 फ़रवरी, शुक्रवार कृष्ण फाल्गुन 12 फ़रवरी, 14:52 13 फ़रवरी, 16:57 14 फ़रवरी, 07:26–09:50 —
27 फ़रवरी, शुक्रवार शुक्ल फाल्गुन 27 फ़रवरी, 03:04 28 फ़रवरी, 01:03 28 फ़रवरी, 07:24–09:48 —
15 मार्च, रविवार कृष्ण चैत्र 14 मार्च, 10:41 15 मार्च, 11:47 16 मार्च, 07:18–09:44 —
29 मार्च, रविवार शुक्ल चैत्र 28 मार्च, 11:16 29 मार्च, 10:17 30 मार्च, 07:13–09:39 —
13 अप्रैल, सोमवार कृष्ण वैशाख 13 अप्रैल, 03:47 14 अप्रैल, 03:39 14 अप्रैल, 09:25–09:34 —
27 अप्रैल, सोमवार शुक्ल वैशाख 26 अप्रैल, 20:37 27 अप्रैल, 20:46 28 अप्रैल, 07:04–09:30 —
13 मई, बुधवार कृष्ण ज्येष्ठ 12 मई, 17:23 13 मई, 16:01 14 मई, 07:01–09:28 —
27 मई, बुधवार शुक्ल अधिक ज्येष्ठ 26 मई, 07:41 27 मई, 08:52 28 मई, 07:01–09:29 —
11 जून, गुरुवार कृष्ण अधिक ज्येष्ठ 11 जून, 03:28 12 जून, 01:07 12 जून, 07:03–09:31 —
25 जून, गुरुवार शुक्ल ज्येष्ठ 24 जून, 20:42 25 जून, 22:39 26 जून, 07:06–09:34 —
11 जुलाई, शनिवार कृष्ण आषाढ़ 10 जुलाई, 10:47 11 जुलाई, 07:53 — —
25 जुलाई, शनिवार शुक्ल आषाढ़ 24 जुलाई, 11:43 25 जुलाई, 14:05 26 जुलाई, 07:11–09:38 चातुर्मास
9 अगस्त, रविवार कृष्ण श्रावण 8 अगस्त, 16:29 9 अगस्त, 13:36 10 अगस्त, 07:11–09:38 —
23 अगस्त, रविवार शुक्ल श्रावण 23 अगस्त, 04:31 24 अगस्त, 06:49 24 अगस्त, 14:28–16:55 —
7 सितंबर, सोमवार कृष्ण भाद्रपद 6 सितंबर, 22:00 7 सितंबर, 19:34 8 सितंबर, 07:06–09:32 —
22 सितंबर, मंगलवार शुक्ल भाद्रपद 21 सितंबर, 22:32 23 सितंबर, 00:14 23 सितंबर, 07:02–09:27 —
6 अक्तूबर, मंगलवार कृष्ण आश्विन 6 अक्तूबर, 04:38 7 अक्तूबर, 03:05 7 अक्तूबर, 08:45–09:23 —
22 अक्तूबर, गुरुवार शुक्ल आश्विन 21 अक्तूबर, 16:42 22 अक्तूबर, 17:18 23 अक्तूबर, 06:56–09:20 —
5 नवंबर, गुरुवार कृष्ण कार्तिक 4 नवंबर, 13:34 5 नवंबर, 13:06 6 नवंबर, 06:56–09:20 —
21 नवंबर, शनिवार शुक्ल कार्तिक 20 नवंबर, 09:46 21 नवंबर, 09:02 22 नवंबर, 07:00–07:27 देवउठनी एकादशी
4 दिसंबर, शुक्रवार कृष्ण मार्गशीर्ष 4 दिसंबर, 01:34 5 दिसंबर, 02:15 5 दिसंबर, 08:32–09:28 —
20 दिसंबर, रविवार शुक्ल मार्गशीर्ष 20 दिसंबर, 00:40 20 दिसंबर, 22:45 21 दिसंबर, 07:12–09:36 —

समय कुआलालंपुर के अनुसार हैं। क्षय तिथि वाली पंक्ति की तिथि किसी सूर्योदय पर नहीं थी — वह एक सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले से पहले समाप्त हो गई, और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। अगले दिन भी मान्य वाली पंक्ति में तिथि दो सूर्योदय तक चलती है, इसलिए दो परंपराएँ दो अलग दिन लेती हैं।

पर्व वाले कॉलम के बारे में: नाम केवल उन पंक्तियों पर है जिन पर हमारी गणना का कोई पर्व — जैसे देवउठनी एकादशी — उसी तिथि पर पड़ता है। हर एकादशी का अपना पारंपरिक नाम होता है, पर वे नाम अभी हमारी गणना के नियमों में दर्ज नहीं हैं, और बिना नियम के नाम हम अनुमान से नहीं लिखते।

पंचांगों में एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

तिथि चंद्र मास का तीसवाँ भाग है — चंद्रमा का सूर्य से 12° आगे बढ़ना — इसलिए यह औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है और लगभग कभी सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। यह पेज सामान्य नियम मानता है: सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, दिन उसी का है। इसके दो परिणाम ऊपर की तालिका में दिखते हैं, और दोनों भूल नहीं हैं।

  1. दो सूर्योदय पर तिथि। जब कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय पर चलती है, तब दोनों दिन सचमुच उसके होते हैं और परंपराएँ बँट जाती हैं।
  2. क्षय तिथि। जब तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती, तब वह क्षय है, और व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली।
  3. शहर। सूर्योदय भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा बदलता है, इसलिए एक शहर में जो तिथि सूर्योदय के ठीक बाद ख़त्म होती है, वह दूसरे में ठीक पहले ख़त्म हो सकती है — और दिन बदल जाता है।

आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं; दिन उनकी व्याख्या है। यह पेज बताता है कि उसने कौन-सा नियम माना, ताकि आप अपने पंचांग से मिलान कर सकें।

एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

अगली एकादशी कब है?

अगली एकादशी गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026 को है। कुआलालंपुर में एकादशी तिथि 21 अक्तूबर, 16:42 से 22 अक्तूबर, 17:18 तक रहेगी। व्रत का पारण शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026 को 06:56 से 09:20 तक है।

2026 में कितनी एकादशी हैं?

कुआलालंपुर के लिए 2026 में 24। यह संख्या हर साल बदलती है, क्योंकि बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, और अधिक मास वाले साल में एक-दो और जुड़ जाती हैं।

मेरे कैलेंडर में एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

क्योंकि तिथि बहुत कम ही सूर्योदय पर शुरू या ख़त्म होती है। जब वह दो दिन सूर्योदय पर चलती है, या किसी दिन नहीं, तब परंपराएँ बँट जाती हैं: कुछ सूर्योदय वाला दिन लेती हैं, कुछ वह दिन जब तिथि शुरू हुई। ऊपर दिए आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं — दिन उनकी व्याख्या है, और यह पेज बताता है कि उसने कौन-सा नियम माना।

एकादशी का व्रत कब खोलें (पारण कब करें)?

द्वादशी को, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीत जाने के बाद। सामान्यतः पारण प्रातःकाल में होता है; अगर हरि वासर उससे आगे तक चले तो मध्याह्न के बाद। अगली एकादशी का पारण शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026 को 06:56 से 09:20 तक है।

2026 में एकादशी पर कौन-से पर्व पड़ते हैं?

चातुर्मास (25 जुलाई), देवउठनी एकादशी (21 नवंबर)। तारीखें कुआलालंपुर के लिए हैं; हर पर्व का अपना पेज उसका मुहूर्त और निर्णय का नियम बताता है।