होलिका दहन 2027 कब है?

2027 में होलिका दहन सोमवार, 22 मार्च को है। जयपुर में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 18:39 से 21:00 तक है।

होलिका दहन कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय जयपुर के लिए निकाला गया है।

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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

होलिका दहन 2027: तारीख और तिथि का समय

सोमवार, 22 मार्च 2027

तिथि
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
फाल्गुन
तिथि आरंभ
21 मार्च, 18:22
तिथि समाप्त
22 मार्च, 16:14
दिन का निर्णय
प्रदोष काल
जयपुर में प्रदोष काल
18:39 से 21:03

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: होलिका दहन का निर्णय सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके प्रदोष काल पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

होलिका दहन 2027 होलिका दहन मुहूर्त

18:39 से 21:00

यह अवधि प्रदोष काल और पूर्णिमा तिथि का मेल है — वह क्षण जिस पर यह पर्व तय होता है, और वह तिथि जो इसे परिभाषित करती है। अकेला कोई एक हिस्सा उत्तर नहीं है: केवल प्रदोष काल ऐसा समय भी दे सकता है जब तिथि ख़त्म हो चुकी हो, और केवल तिथि लगभग पूरा दिन दे देती।

प्रदोष काल
18:39 से 21:03
पूर्णिमा तिथि
21 मार्च, 18:22 से 22 मार्च, 16:14

प्रदोष काल सूर्यास्त से शुरू होकर तीन मुहूर्त — लगभग 2 घंटे 24 मिनट — तक रहता है। जो पर्व प्रदोष में मनाया जाता है, उसकी पूजा इसी अवधि के भीतर होती है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तजयपुर में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्त 12:09 से 12:58 शुभ
अमृत काल 13:58 से 15:29 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 04:54 से 05:41 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिजयपुर में समय
राहु काल 08:00 से 09:31
यमगण्ड काल 11:02 से 12:34
दुर्मुहूर्त (पहला) 12:58 से 13:47
दुर्मुहूर्त (दूसरा) 15:24 से 16:13
वर्ज्यम् 04:50 से 06:22

ऊपर का हर समय जयपुर के लिए सोमवार, 22 मार्च 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

आने वाले वर्षों में होलिका दहन की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति जयपुर के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 मंगलवार, 3 मार्च 2026 बीत गई
2027 सोमवार, 22 मार्च 2027 आने वाली
2028 शुक्रवार, 10 मार्च 2028 आने वाली

पंचांगों में होलिका दहन की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग होलिका दहन की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: होलिका दहन का निर्णय प्रदोष काल से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

होलिका दहन से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में होलिका दहन कब है?

2027 में होलिका दहन सोमवार, 22 मार्च को है। जयपुर में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 18:39 से 21:00 तक है।

होलिका दहन पूर्णिमा शुरू होने वाली शाम को क्यों नहीं है?

भद्रा के कारण। पूर्णिमा का पहला आधा भाग विष्टि करण (भद्रा) है, और होलिका दहन भद्रा में नहीं होता। इस बार भद्रा पहली शाम के पूरे प्रदोष में रहती है और आधी रात के बाद तक चलती है, जबकि पूर्णिमा अगले दिन के उजाले के अंतिम पाँचवें भाग तक रहती है — इसलिए दहन अगली शाम के प्रदोष में होता है, जैसा एस्ट्रोसेज प्रकाशित करता है।

होलिका दहन की तिथि क्या है?

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि। जयपुर में यह तिथि 21 मार्च, 18:22 से 22 मार्च, 16:14 तक है, और होलिका दहन का दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में चल रही तिथि से तय होता है।

जयपुर में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है?

22 मार्च को 18:39 से 21:00 तक। यह प्रदोष काल और पूर्णिमा तिथि का मेल है, जयपुर के लिए निकाला गया — अवधि आपके शहर के सूर्यास्त के साथ बदलती है, और तिथि उसके बीच में भी ख़त्म हो सकती है।

दूसरे कैलेंडर में होलिका दहन की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल होलिका दहन कब है?

2028 में शुक्रवार, 10 मार्च।