तिथि कैलेंडर · सिडनी
पंचमी 2026 में कब है
2026 में पंचमी 25 बार पड़ती है। नीचे हर तिथि का दिन, आरंभ और समाप्ति का समय और वह महीना दिया है जिसमें वह आती है।
- यह तालिका सिडनी के लिए चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से इसी समय गणना की गई है — किसी छपे कैलेंडर से नकल नहीं की गई।
- हर तिथि का आरंभ और समाप्ति समय दिया गया है, ताकि आप दिन स्वयं जाँच सकें।
2026 की सभी पंचमी तिथियाँ
| तारीख | पक्ष | हिंदू माह (पूर्णिमांत) | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|---|
| गुरुवार, 8 जनवरी 2026 | कृष्ण | माघ | 7 जन, 12:23 | 8 जन, 12:04 | — |
| शनिवार, 24 जनवरी 2026 | शुक्ल | माघ | 23 जन, 07:59 | 24 जन, 07:16 | — |
| शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026 | कृष्ण | फाल्गुन | 6 फ़र, 05:52 | 7 फ़र, 06:49 | अगले दिन भी मान्य |
| रविवार, 22 फ़रवरी 2026 | शुक्ल | फाल्गुन | 21 फ़र, 18:31 | 22 फ़र, 16:40 | — |
| रविवार, 8 मार्च 2026 | कृष्ण | चैत्र | 8 मार्च, 00:48 | 9 मार्च, 02:42 | — |
| सोमवार, 23 मार्च 2026 | शुक्ल | चैत्र | 23 मार्च, 02:47 | 24 मार्च, 00:08 | — |
| मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 | कृष्ण | वैशाख | 6 अप्रै, 18:41 | 7 अप्रै, 21:05 | — |
| मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 | शुक्ल | वैशाख | 21 अप्रै, 08:45 | 22 अप्रै, 05:50 | क्षय तिथि |
| गुरुवार, 7 मई 2026 | कृष्ण | ज्येष्ठ | 6 मई, 12:21 | 7 मई, 14:44 | — |
| गुरुवार, 21 मई 2026 | शुक्ल | अधिक ज्येष्ठ | 20 मई, 15:37 | 21 मई, 12:57 | — |
| शुक्रवार, 5 जून 2026 | कृष्ण | अधिक ज्येष्ठ | 5 जून, 04:01 | 6 जून, 05:50 | — |
| शुक्रवार, 19 जून 2026 | शुक्ल | ज्येष्ठ | 18 जून, 23:29 | 19 जून, 21:30 | — |
| रविवार, 5 जुलाई 2026 | कृष्ण | आषाढ़ | 4 जुला, 17:11 | 5 जुला, 18:01 | — |
| रविवार, 19 जुलाई 2026 | शुक्ल | आषाढ़ | 18 जुला, 09:13 | 19 जुला, 08:13 | — |
| सोमवार, 3 अगस्त 2026 | कृष्ण | श्रावण | 3 अग, 03:46 | 4 अग, 03:24 | — |
| सोमवार, 17 अगस्त 2026 | शुक्ल | श्रावण | 16 अग, 21:23 | 17 अग, 21:30 | — |
| बुधवार, 2 सितंबर 2026 | कृष्ण | भाद्रपद | 1 सित, 12:12 | 2 सित, 10:43 | — |
| बुधवार, 16 सितंबर 2026 | शुक्ल | भाद्रपद | 15 सित, 12:15 | 16 सित, 13:30 | — |
| गुरुवार, 1 अक्तूबर 2026 | कृष्ण | आश्विन | 30 सित, 19:25 | 1 अक्टू, 17:05 | — |
| शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2026 | शुक्ल | आश्विन | 15 अक्टू, 06:43 | 16 अक्टू, 08:56 | — |
| शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2026 | कृष्ण | कार्तिक | 30 अक्टू, 03:41 | 31 अक्टू, 00:55 | — |
| शनिवार, 14 नवंबर 2026 | शुक्ल | कार्तिक | 14 नव, 02:13 | 15 नव, 04:54 | — |
| रविवार, 29 नवंबर 2026 | कृष्ण | मार्गशीर्ष | 28 नव, 12:10 | 29 नव, 09:28 | — |
| सोमवार, 14 दिसंबर 2026 | शुक्ल | मार्गशीर्ष | 13 दिस, 22:18 | 15 दिस, 00:46 | — |
| सोमवार, 28 दिसंबर 2026 | कृष्ण | पौष | 27 दिस, 22:43 | 28 दिस, 20:28 | — |
समय सिडनी के अनुसार हैं। जिस पंक्ति पर क्षय तिथि लिखा है, वह तिथि किसी सूर्योदय पर नहीं थी — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो गई, और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। जिस पर अगले दिन भी मान्य लिखा है, वहाँ तिथि दो सूर्योदय तक चलती है, इसलिए दो परंपराएँ दो अलग दिन लेती हैं।
पंचमी जनवरी 2026
जनवरी 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 8 जनवरी 2026 — कृष्ण पक्ष, माघ। तिथि 7 जन, 12:23 → 8 जन, 12:04
- शनिवार, 24 जनवरी 2026 — शुक्ल पक्ष, माघ। तिथि 23 जन, 07:59 → 24 जन, 07:16
पंचमी फ़रवरी 2026
फ़रवरी 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।
- शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026 — कृष्ण पक्ष, फाल्गुन। तिथि 6 फ़र, 05:52 → 7 फ़र, 06:49 (अगले दिन भी मान्य)
- रविवार, 22 फ़रवरी 2026 — शुक्ल पक्ष, फाल्गुन। तिथि 21 फ़र, 18:31 → 22 फ़र, 16:40
पंचमी मार्च 2026
मार्च 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।
- रविवार, 8 मार्च 2026 — कृष्ण पक्ष, चैत्र। तिथि 8 मार्च, 00:48 → 9 मार्च, 02:42
- सोमवार, 23 मार्च 2026 — शुक्ल पक्ष, चैत्र। तिथि 23 मार्च, 02:47 → 24 मार्च, 00:08
पंचमी अप्रैल 2026
अप्रैल 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।
- मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 — कृष्ण पक्ष, वैशाख। तिथि 6 अप्रै, 18:41 → 7 अप्रै, 21:05
- मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 — शुक्ल पक्ष, वैशाख। तिथि 21 अप्रै, 08:45 → 22 अप्रै, 05:50 (क्षय तिथि)
पंचमी मई 2026
मई 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 7 मई 2026 — कृष्ण पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 6 मई, 12:21 → 7 मई, 14:44
- गुरुवार, 21 मई 2026 — शुक्ल पक्ष, अधिक ज्येष्ठ। तिथि 20 मई, 15:37 → 21 मई, 12:57
पंचमी जून 2026
जून 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।
- शुक्रवार, 5 जून 2026 — कृष्ण पक्ष, अधिक ज्येष्ठ। तिथि 5 जून, 04:01 → 6 जून, 05:50
- शुक्रवार, 19 जून 2026 — शुक्ल पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 18 जून, 23:29 → 19 जून, 21:30
पंचमी जुलाई 2026
जुलाई 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।
- रविवार, 5 जुलाई 2026 — कृष्ण पक्ष, आषाढ़। तिथि 4 जुला, 17:11 → 5 जुला, 18:01
- रविवार, 19 जुलाई 2026 — शुक्ल पक्ष, आषाढ़। तिथि 18 जुला, 09:13 → 19 जुला, 08:13
पंचमी अगस्त 2026
अगस्त 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 3 अगस्त 2026 — कृष्ण पक्ष, श्रावण। तिथि 3 अग, 03:46 → 4 अग, 03:24
- सोमवार, 17 अगस्त 2026 — शुक्ल पक्ष, श्रावण। तिथि 16 अग, 21:23 → 17 अग, 21:30
पंचमी सितंबर 2026
सितंबर 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।
- बुधवार, 2 सितंबर 2026 — कृष्ण पक्ष, भाद्रपद। तिथि 1 सित, 12:12 → 2 सित, 10:43
- बुधवार, 16 सितंबर 2026 — शुक्ल पक्ष, भाद्रपद। तिथि 15 सित, 12:15 → 16 सित, 13:30
पंचमी अक्तूबर 2026
अक्तूबर 2026 में पंचमी 3 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 1 अक्तूबर 2026 — कृष्ण पक्ष, आश्विन। तिथि 30 सित, 19:25 → 1 अक्टू, 17:05
- शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2026 — शुक्ल पक्ष, आश्विन। तिथि 15 अक्टू, 06:43 → 16 अक्टू, 08:56
- शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2026 — कृष्ण पक्ष, कार्तिक। तिथि 30 अक्टू, 03:41 → 31 अक्टू, 00:55
पंचमी नवंबर 2026
नवंबर 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।
- शनिवार, 14 नवंबर 2026 — शुक्ल पक्ष, कार्तिक। तिथि 14 नव, 02:13 → 15 नव, 04:54
- रविवार, 29 नवंबर 2026 — कृष्ण पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 28 नव, 12:10 → 29 नव, 09:28
पंचमी दिसंबर 2026
दिसंबर 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 14 दिसंबर 2026 — शुक्ल पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 13 दिस, 22:18 → 15 दिस, 00:46
- सोमवार, 28 दिसंबर 2026 — कृष्ण पक्ष, पौष। तिथि 27 दिस, 22:43 → 28 दिस, 20:28
पंचमी का दिन कैसे तय होता है
तिथि एक चंद्रमास का तीसवाँ भाग है — चंद्रमा का सूर्य से 12° आगे बढ़ना — इसलिए यह औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, जबकि दिन 24 घंटे का। इसीलिए तिथि लगभग कभी सूर्योदय पर आरंभ नहीं होती। यह पृष्ठ सामान्य नियम मानता है: सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, दिन उसी का कहलाता है। ऊपर की तालिका में इसके दो परिणाम दिखते हैं और दोनों त्रुटि नहीं हैं। जब कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय पर चलती है, तब दोनों दिन सचमुच उसके होते हैं और परंपराएँ बँट जाती हैं। जब वह किसी सूर्योदय को नहीं छूती, तब वह क्षय तिथि है और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं; दिन उनकी व्याख्या है।
अन्य शहर
कोई तिथि किस दिन की कहलाएगी यह सूर्योदय तय करता है, और भारत में सूर्योदय एक घंटे से भी अधिक अंतर रखता है — इसलिए दो शहरों में केवल समय ही नहीं, दिन भी अलग हो सकता है।
यह तालिका आपके चुने शहर के लिए फिर से गणना होती है। ये लिंक इसी पृष्ठ के रूप हैं: हर एक ऊपर के पते पर canonical रखता है और खोज इंजनों से अनुक्रमित न करने को कहता है।
2026 की अन्य तिथियाँ
संबंधित पंचांग पृष्ठ
सामान्य प्रश्न
पंचमी कब है 2026 में?
2026 में अगली पंचमी शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2026 को है। तिथि 15 अक्टू, 06:43 → 16 अक्टू, 08:56 तक चलती है (सिडनी के समय अनुसार)। पूरे वर्ष की 25 तिथियाँ ऊपर तालिका में दी गई हैं।
2026 में पंचमी कितनी बार आती है?
25 बार — शुक्ल पक्ष में 12 और कृष्ण पक्ष में 13। संख्या हर वर्ष बदलती है क्योंकि बारह चंद्रमास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे पड़ते हैं, और अधिक मास इसे और बदल देता है।
शुक्ल पंचमी और कृष्ण पंचमी में क्या अंतर है?
दोनों एक ही तिथि संख्या हैं, अलग पक्ष की। शुक्ल पक्ष अमावस्या के बाद का उजाला पखवाड़ा है और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद का। पंचमी हर चंद्रमास में दो बार आती है, एक बार प्रत्येक पक्ष में, और ऊपर की तालिका में पक्ष का स्तंभ बताता है कि कौन-सी कौन है।
मेरे कैलेंडर में पंचमी की तारीख अलग क्यों है?
क्योंकि तिथि शायद ही कभी सूर्योदय पर आरंभ या समाप्त होती है। जब वह दो दिन के सूर्योदय पर चल रही हो, या किसी पर भी न हो, तब परंपराएँ बँट जाती हैं। ऊपर दिए आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं — दिन उनकी व्याख्या है, और यह पृष्ठ बताता है कि उसने कौन-सी व्याख्या ली।
क्या पंचमी पूरे भारत में एक ही दिन होती है?
हमेशा नहीं। दिन सूर्योदय से तय होता है और भारत में सूर्योदय एक घंटे से अधिक अंतर रखता है, इसलिए एक तिथि जो सिडनी में सूर्योदय के ठीक बाद समाप्त होती है, पश्चिम के किसी शहर में उससे पहले समाप्त हो सकती है और दिन बदल जाता है। ऊपर शहर बदलकर देखिए।
पंचमी को और किन नामों से खोजा जाता है?
पंचमी तिथि, पंचम — ये सब एक ही तिथि हैं। इस पृष्ठ का पता एक ही है ताकि उत्तर एक जगह रहे।
क्षय पंचमी क्या होती है?
2026 में 1 बार पंचमी क्षय तिथि है: मंगलवार, 21 अप्रैल 2026। क्षय तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो जाती है। व्रत फिर भी रखा जाता है, उसी दिन जिस दिन वह चली, पर सामान्य सूर्योदय नियम वहाँ लागू नहीं होता।