पंचमी 2026 में कब है

2026 में पंचमी 25 बार पड़ती है। नीचे हर तिथि का दिन, आरंभ और समाप्ति का समय और वह महीना दिया है जिसमें वह आती है।

  • यह तालिका वाराणसी के लिए चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से इसी समय गणना की गई है — किसी छपे कैलेंडर से नकल नहीं की गई।
  • हर तिथि का आरंभ और समाप्ति समय दिया गया है, ताकि आप दिन स्वयं जाँच सकें।

2026 की सभी पंचमी तिथियाँ

तारीखपक्षहिंदू माह (पूर्णिमांत)तिथि आरंभतिथि समाप्तटिप्पणी
बुधवार, 7 जनवरी 2026कृष्णमाघ7 जन, 06:538 जन, 06:34क्षय तिथि
शुक्रवार, 23 जनवरी 2026शुक्लमाघ23 जन, 02:2824 जन, 01:46—
शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026कृष्णफाल्गुन6 फ़र, 00:237 फ़र, 01:19—
रविवार, 22 फ़रवरी 2026शुक्लफाल्गुन21 फ़र, 13:0122 फ़र, 11:10—
रविवार, 8 मार्च 2026कृष्णचैत्र7 मार्च, 19:188 मार्च, 21:11—
सोमवार, 23 मार्च 2026शुक्लचैत्र22 मार्च, 21:1723 मार्च, 18:39—
मंगलवार, 7 अप्रैल 2026कृष्णवैशाख6 अप्रै, 14:117 अप्रै, 16:35—
मंगलवार, 21 अप्रैल 2026शुक्लवैशाख21 अप्रै, 04:1522 अप्रै, 01:20—
गुरुवार, 7 मई 2026कृष्णज्येष्ठ6 मई, 07:517 मई, 10:14—
गुरुवार, 21 मई 2026शुक्लअधिक ज्येष्ठ20 मई, 11:0721 मई, 08:27—
शुक्रवार, 5 जून 2026कृष्णअधिक ज्येष्ठ4 जून, 23:316 जून, 01:21—
शुक्रवार, 19 जून 2026शुक्लज्येष्ठ18 जून, 18:5919 जून, 17:00—
रविवार, 5 जुलाई 2026कृष्णआषाढ़4 जुला, 12:405 जुला, 13:31—
शनिवार, 18 जुलाई 2026शुक्लआषाढ़18 जुला, 04:4319 जुला, 03:43—
सोमवार, 3 अगस्त 2026कृष्णश्रावण2 अग, 23:153 अग, 22:55—
सोमवार, 17 अगस्त 2026शुक्लश्रावण16 अग, 16:5317 अग, 17:00—
बुधवार, 2 सितंबर 2026कृष्णभाद्रपद1 सित, 07:422 सित, 06:13—
बुधवार, 16 सितंबर 2026शुक्लभाद्रपद15 सित, 07:4516 सित, 09:00—
गुरुवार, 1 अक्तूबर 2026कृष्णआश्विन30 सित, 14:561 अक्टू, 12:36—
गुरुवार, 15 अक्तूबर 2026शुक्लआश्विन15 अक्टू, 01:1416 अक्टू, 03:25—
शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2026कृष्णकार्तिक29 अक्टू, 22:1130 अक्टू, 19:25—
शनिवार, 14 नवंबर 2026शुक्लकार्तिक13 नव, 20:4314 नव, 23:24—
शनिवार, 28 नवंबर 2026कृष्णमार्गशीर्ष28 नव, 06:4029 नव, 03:58क्षय तिथि
सोमवार, 14 दिसंबर 2026शुक्लमार्गशीर्ष13 दिस, 16:4814 दिस, 19:17—
सोमवार, 28 दिसंबर 2026कृष्णपौष27 दिस, 17:1428 दिस, 14:59—

समय वाराणसी के अनुसार हैं। जिस पंक्ति पर क्षय तिथि लिखा है, वह तिथि किसी सूर्योदय पर नहीं थी — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो गई, और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। जिस पर अगले दिन भी मान्य लिखा है, वहाँ तिथि दो सूर्योदय तक चलती है, इसलिए दो परंपराएँ दो अलग दिन लेती हैं।

पंचमी जनवरी 2026

जनवरी 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।

  • बुधवार, 7 जनवरी 2026 — कृष्ण पक्ष, माघ। तिथि 7 जन, 06:53 → 8 जन, 06:34 (क्षय तिथि)
  • शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 — शुक्ल पक्ष, माघ। तिथि 23 जन, 02:28 → 24 जन, 01:46

पंचमी फ़रवरी 2026

फ़रवरी 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।

  • शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026 — कृष्ण पक्ष, फाल्गुन। तिथि 6 फ़र, 00:23 → 7 फ़र, 01:19
  • रविवार, 22 फ़रवरी 2026 — शुक्ल पक्ष, फाल्गुन। तिथि 21 फ़र, 13:01 → 22 फ़र, 11:10

पंचमी मार्च 2026

मार्च 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।

  • रविवार, 8 मार्च 2026 — कृष्ण पक्ष, चैत्र। तिथि 7 मार्च, 19:18 → 8 मार्च, 21:11
  • सोमवार, 23 मार्च 2026 — शुक्ल पक्ष, चैत्र। तिथि 22 मार्च, 21:17 → 23 मार्च, 18:39

पंचमी अप्रैल 2026

अप्रैल 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।

  • मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 — कृष्ण पक्ष, वैशाख। तिथि 6 अप्रै, 14:11 → 7 अप्रै, 16:35
  • मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 — शुक्ल पक्ष, वैशाख। तिथि 21 अप्रै, 04:15 → 22 अप्रै, 01:20

पंचमी मई 2026

मई 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।

  • गुरुवार, 7 मई 2026 — कृष्ण पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 6 मई, 07:51 → 7 मई, 10:14
  • गुरुवार, 21 मई 2026 — शुक्ल पक्ष, अधिक ज्येष्ठ। तिथि 20 मई, 11:07 → 21 मई, 08:27

पंचमी जून 2026

जून 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।

  • शुक्रवार, 5 जून 2026 — कृष्ण पक्ष, अधिक ज्येष्ठ। तिथि 4 जून, 23:31 → 6 जून, 01:21
  • शुक्रवार, 19 जून 2026 — शुक्ल पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 18 जून, 18:59 → 19 जून, 17:00

पंचमी जुलाई 2026

जुलाई 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।

  • रविवार, 5 जुलाई 2026 — कृष्ण पक्ष, आषाढ़। तिथि 4 जुला, 12:40 → 5 जुला, 13:31
  • शनिवार, 18 जुलाई 2026 — शुक्ल पक्ष, आषाढ़। तिथि 18 जुला, 04:43 → 19 जुला, 03:43

पंचमी अगस्त 2026

अगस्त 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।

  • सोमवार, 3 अगस्त 2026 — कृष्ण पक्ष, श्रावण। तिथि 2 अग, 23:15 → 3 अग, 22:55
  • सोमवार, 17 अगस्त 2026 — शुक्ल पक्ष, श्रावण। तिथि 16 अग, 16:53 → 17 अग, 17:00

पंचमी सितंबर 2026

सितंबर 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।

  • बुधवार, 2 सितंबर 2026 — कृष्ण पक्ष, भाद्रपद। तिथि 1 सित, 07:42 → 2 सित, 06:13
  • बुधवार, 16 सितंबर 2026 — शुक्ल पक्ष, भाद्रपद। तिथि 15 सित, 07:45 → 16 सित, 09:00

पंचमी अक्तूबर 2026

अक्तूबर 2026 में पंचमी 3 बार पड़ती है।

  • गुरुवार, 1 अक्तूबर 2026 — कृष्ण पक्ष, आश्विन। तिथि 30 सित, 14:56 → 1 अक्टू, 12:36
  • गुरुवार, 15 अक्तूबर 2026 — शुक्ल पक्ष, आश्विन। तिथि 15 अक्टू, 01:14 → 16 अक्टू, 03:25
  • शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2026 — कृष्ण पक्ष, कार्तिक। तिथि 29 अक्टू, 22:11 → 30 अक्टू, 19:25

पंचमी नवंबर 2026

नवंबर 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।

  • शनिवार, 14 नवंबर 2026 — शुक्ल पक्ष, कार्तिक। तिथि 13 नव, 20:43 → 14 नव, 23:24
  • शनिवार, 28 नवंबर 2026 — कृष्ण पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 28 नव, 06:40 → 29 नव, 03:58 (क्षय तिथि)

पंचमी दिसंबर 2026

दिसंबर 2026 में पंचमी 2 बार पड़ती है।

  • सोमवार, 14 दिसंबर 2026 — शुक्ल पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 13 दिस, 16:48 → 14 दिस, 19:17
  • सोमवार, 28 दिसंबर 2026 — कृष्ण पक्ष, पौष। तिथि 27 दिस, 17:14 → 28 दिस, 14:59

पंचमी का दिन कैसे तय होता है

तिथि एक चंद्रमास का तीसवाँ भाग है — चंद्रमा का सूर्य से 12° आगे बढ़ना — इसलिए यह औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, जबकि दिन 24 घंटे का। इसीलिए तिथि लगभग कभी सूर्योदय पर आरंभ नहीं होती। यह पृष्ठ सामान्य नियम मानता है: सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, दिन उसी का कहलाता है। ऊपर की तालिका में इसके दो परिणाम दिखते हैं और दोनों त्रुटि नहीं हैं। जब कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय पर चलती है, तब दोनों दिन सचमुच उसके होते हैं और परंपराएँ बँट जाती हैं। जब वह किसी सूर्योदय को नहीं छूती, तब वह क्षय तिथि है और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं; दिन उनकी व्याख्या है।

अन्य शहर

कोई तिथि किस दिन की कहलाएगी यह सूर्योदय तय करता है, और भारत में सूर्योदय एक घंटे से भी अधिक अंतर रखता है — इसलिए दो शहरों में केवल समय ही नहीं, दिन भी अलग हो सकता है।

यह तालिका आपके चुने शहर के लिए फिर से गणना होती है। ये लिंक इसी पृष्ठ के रूप हैं: हर एक ऊपर के पते पर canonical रखता है और खोज इंजनों से अनुक्रमित न करने को कहता है।

2026 की अन्य तिथियाँ

संबंधित पंचांग पृष्ठ

सामान्य प्रश्न

पंचमी कब है 2026 में?

2026 में अगली पंचमी गुरुवार, 15 अक्तूबर 2026 को है। तिथि 15 अक्टू, 01:14 → 16 अक्टू, 03:25 तक चलती है (वाराणसी के समय अनुसार)। पूरे वर्ष की 25 तिथियाँ ऊपर तालिका में दी गई हैं।

2026 में पंचमी कितनी बार आती है?

25 बार — शुक्ल पक्ष में 12 और कृष्ण पक्ष में 13। संख्या हर वर्ष बदलती है क्योंकि बारह चंद्रमास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे पड़ते हैं, और अधिक मास इसे और बदल देता है।

शुक्ल पंचमी और कृष्ण पंचमी में क्या अंतर है?

दोनों एक ही तिथि संख्या हैं, अलग पक्ष की। शुक्ल पक्ष अमावस्या के बाद का उजाला पखवाड़ा है और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद का। पंचमी हर चंद्रमास में दो बार आती है, एक बार प्रत्येक पक्ष में, और ऊपर की तालिका में पक्ष का स्तंभ बताता है कि कौन-सी कौन है।

मेरे कैलेंडर में पंचमी की तारीख अलग क्यों है?

क्योंकि तिथि शायद ही कभी सूर्योदय पर आरंभ या समाप्त होती है। जब वह दो दिन के सूर्योदय पर चल रही हो, या किसी पर भी न हो, तब परंपराएँ बँट जाती हैं। ऊपर दिए आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं — दिन उनकी व्याख्या है, और यह पृष्ठ बताता है कि उसने कौन-सी व्याख्या ली।

क्या पंचमी पूरे भारत में एक ही दिन होती है?

हमेशा नहीं। दिन सूर्योदय से तय होता है और भारत में सूर्योदय एक घंटे से अधिक अंतर रखता है, इसलिए एक तिथि जो वाराणसी में सूर्योदय के ठीक बाद समाप्त होती है, पश्चिम के किसी शहर में उससे पहले समाप्त हो सकती है और दिन बदल जाता है। ऊपर शहर बदलकर देखिए।

पंचमी को और किन नामों से खोजा जाता है?

पंचमी तिथि, पंचम — ये सब एक ही तिथि हैं। इस पृष्ठ का पता एक ही है ताकि उत्तर एक जगह रहे।

क्षय पंचमी क्या होती है?

2026 में 2 बार पंचमी क्षय तिथि है: बुधवार, 7 जनवरी 2026; शनिवार, 28 नवंबर 2026। क्षय तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो जाती है। व्रत फिर भी रखा जाता है, उसी दिन जिस दिन वह चली, पर सामान्य सूर्योदय नियम वहाँ लागू नहीं होता।