तिथि कैलेंडर · लंदन
त्रयोदशी 2027 में कब है
2027 में त्रयोदशी 25 बार पड़ती है। नीचे हर तिथि का दिन, आरंभ और समाप्ति का समय और वह महीना दिया है जिसमें वह आती है।
- यह तालिका लंदन के लिए चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से इसी समय गणना की गई है — किसी छपे कैलेंडर से नकल नहीं की गई।
- हर तिथि का आरंभ और समाप्ति समय दिया गया है, ताकि आप दिन स्वयं जाँच सकें।
2027 की सभी त्रयोदशी तिथियाँ
| तारीख | पक्ष | हिंदू माह (पूर्णिमांत) | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|---|
| मंगलवार, 5 जनवरी 2027 | कृष्ण | पौष | 4 जन, 12:46 | 5 जन, 15:10 | — |
| बुधवार, 20 जनवरी 2027 | शुक्ल | पौष | 19 जन, 23:12 | 20 जन, 19:42 | — |
| गुरुवार, 4 फ़रवरी 2027 | कृष्ण | माघ | 3 फ़र, 08:21 | 4 फ़र, 11:02 | — |
| गुरुवार, 18 फ़रवरी 2027 | शुक्ल | माघ | 18 फ़र, 08:58 | 19 फ़र, 05:44 | क्षय तिथि |
| शुक्रवार, 5 मार्च 2027 | कृष्ण | फाल्गुन | 5 मार्च, 04:24 | 6 मार्च, 06:34 | — |
| शनिवार, 20 मार्च 2027 | शुक्ल | फाल्गुन | 19 मार्च, 17:48 | 20 मार्च, 15:16 | — |
| रविवार, 4 अप्रैल 2027 | कृष्ण | चैत्र | 3 अप्रै, 23:57 | 5 अप्रै, 00:54 | — |
| रविवार, 18 अप्रैल 2027 | शुक्ल | चैत्र | 18 अप्रै, 03:12 | 19 अप्रै, 01:39 | — |
| मंगलवार, 4 मई 2027 | कृष्ण | वैशाख | 3 मई, 15:35 | 4 मई, 15:01 | — |
| मंगलवार, 18 मई 2027 | शुक्ल | वैशाख | 17 मई, 11:58 | 18 मई, 11:34 | — |
| बुधवार, 2 जून 2027 | कृष्ण | ज्येष्ठ | 2 जून, 03:59 | 3 जून, 02:05 | — |
| बुधवार, 16 जून 2027 | शुक्ल | ज्येष्ठ | 15 जून, 22:01 | 16 जून, 22:50 | — |
| शुक्रवार, 2 जुलाई 2027 | कृष्ण | आषाढ़ | 1 जुला, 13:45 | 2 जुला, 10:54 | — |
| शुक्रवार, 16 जुलाई 2027 | शुक्ल | आषाढ़ | 15 जुला, 10:11 | 16 जुला, 12:06 | — |
| शनिवार, 31 जुलाई 2027 | कृष्ण | श्रावण | 30 जुला, 21:49 | 31 जुला, 18:28 | — |
| शनिवार, 14 अगस्त 2027 | शुक्ल | श्रावण | 14 अग, 00:51 | 15 अग, 03:24 | — |
| रविवार, 29 अगस्त 2027 | कृष्ण | भाद्रपद | 29 अग, 05:06 | 30 अग, 01:43 | — |
| सोमवार, 13 सितंबर 2027 | शुक्ल | भाद्रपद | 12 सित, 17:43 | 13 सित, 20:10 | — |
| मंगलवार, 28 सितंबर 2027 | कृष्ण | आश्विन | 27 सित, 12:25 | 28 सित, 09:25 | — |
| बुधवार, 13 अक्तूबर 2027 | शुक्ल | आश्विन | 12 अक्टू, 11:44 | 13 अक्टू, 13:19 | — |
| बुधवार, 27 अक्तूबर 2027 | कृष्ण | कार्तिक | 26 अक्टू, 20:34 | 27 अक्टू, 18:20 | — |
| गुरुवार, 11 नवंबर 2027 | शुक्ल | कार्तिक | 11 नव, 04:38 | 12 नव, 04:51 | — |
| गुरुवार, 25 नवंबर 2027 | कृष्ण | मार्गशीर्ष | 25 नव, 05:21 | 26 नव, 04:18 | — |
| शनिवार, 11 दिसंबर 2027 | शुक्ल | मार्गशीर्ष | 10 दिस, 21:23 | 11 दिस, 20:13 | — |
| शनिवार, 25 दिसंबर 2027 | कृष्ण | पौष | 24 दिस, 17:39 | 25 दिस, 18:02 | — |
समय लंदन के अनुसार हैं। जिस पंक्ति पर क्षय तिथि लिखा है, वह तिथि किसी सूर्योदय पर नहीं थी — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो गई, और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। जिस पर अगले दिन भी मान्य लिखा है, वहाँ तिथि दो सूर्योदय तक चलती है, इसलिए दो परंपराएँ दो अलग दिन लेती हैं।
त्रयोदशी जनवरी 2027
जनवरी 2027 में त्रयोदशी 2 बार पड़ती है।
- मंगलवार, 5 जनवरी 2027 — कृष्ण पक्ष, पौष। तिथि 4 जन, 12:46 → 5 जन, 15:10
- बुधवार, 20 जनवरी 2027 — शुक्ल पक्ष, पौष। तिथि 19 जन, 23:12 → 20 जन, 19:42
त्रयोदशी फ़रवरी 2027
फ़रवरी 2027 में त्रयोदशी 2 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 4 फ़रवरी 2027 — कृष्ण पक्ष, माघ। तिथि 3 फ़र, 08:21 → 4 फ़र, 11:02
- गुरुवार, 18 फ़रवरी 2027 — शुक्ल पक्ष, माघ। तिथि 18 फ़र, 08:58 → 19 फ़र, 05:44 (क्षय तिथि)
त्रयोदशी मार्च 2027
मार्च 2027 में त्रयोदशी 2 बार पड़ती है।
- शुक्रवार, 5 मार्च 2027 — कृष्ण पक्ष, फाल्गुन। तिथि 5 मार्च, 04:24 → 6 मार्च, 06:34
- शनिवार, 20 मार्च 2027 — शुक्ल पक्ष, फाल्गुन। तिथि 19 मार्च, 17:48 → 20 मार्च, 15:16
त्रयोदशी अप्रैल 2027
अप्रैल 2027 में त्रयोदशी 2 बार पड़ती है।
- रविवार, 4 अप्रैल 2027 — कृष्ण पक्ष, चैत्र। तिथि 3 अप्रै, 23:57 → 5 अप्रै, 00:54
- रविवार, 18 अप्रैल 2027 — शुक्ल पक्ष, चैत्र। तिथि 18 अप्रै, 03:12 → 19 अप्रै, 01:39
त्रयोदशी मई 2027
मई 2027 में त्रयोदशी 2 बार पड़ती है।
- मंगलवार, 4 मई 2027 — कृष्ण पक्ष, वैशाख। तिथि 3 मई, 15:35 → 4 मई, 15:01
- मंगलवार, 18 मई 2027 — शुक्ल पक्ष, वैशाख। तिथि 17 मई, 11:58 → 18 मई, 11:34
त्रयोदशी जून 2027
जून 2027 में त्रयोदशी 2 बार पड़ती है।
- बुधवार, 2 जून 2027 — कृष्ण पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 2 जून, 03:59 → 3 जून, 02:05
- बुधवार, 16 जून 2027 — शुक्ल पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 15 जून, 22:01 → 16 जून, 22:50
त्रयोदशी जुलाई 2027
जुलाई 2027 में त्रयोदशी 3 बार पड़ती है।
- शुक्रवार, 2 जुलाई 2027 — कृष्ण पक्ष, आषाढ़। तिथि 1 जुला, 13:45 → 2 जुला, 10:54
- शुक्रवार, 16 जुलाई 2027 — शुक्ल पक्ष, आषाढ़। तिथि 15 जुला, 10:11 → 16 जुला, 12:06
- शनिवार, 31 जुलाई 2027 — कृष्ण पक्ष, श्रावण। तिथि 30 जुला, 21:49 → 31 जुला, 18:28
त्रयोदशी अगस्त 2027
अगस्त 2027 में त्रयोदशी 2 बार पड़ती है।
- शनिवार, 14 अगस्त 2027 — शुक्ल पक्ष, श्रावण। तिथि 14 अग, 00:51 → 15 अग, 03:24
- रविवार, 29 अगस्त 2027 — कृष्ण पक्ष, भाद्रपद। तिथि 29 अग, 05:06 → 30 अग, 01:43
त्रयोदशी सितंबर 2027
सितंबर 2027 में त्रयोदशी 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 13 सितंबर 2027 — शुक्ल पक्ष, भाद्रपद। तिथि 12 सित, 17:43 → 13 सित, 20:10
- मंगलवार, 28 सितंबर 2027 — कृष्ण पक्ष, आश्विन। तिथि 27 सित, 12:25 → 28 सित, 09:25
त्रयोदशी अक्तूबर 2027
अक्तूबर 2027 में त्रयोदशी 2 बार पड़ती है।
- बुधवार, 13 अक्तूबर 2027 — शुक्ल पक्ष, आश्विन। तिथि 12 अक्टू, 11:44 → 13 अक्टू, 13:19
- बुधवार, 27 अक्तूबर 2027 — कृष्ण पक्ष, कार्तिक। तिथि 26 अक्टू, 20:34 → 27 अक्टू, 18:20
त्रयोदशी नवंबर 2027
नवंबर 2027 में त्रयोदशी 2 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 11 नवंबर 2027 — शुक्ल पक्ष, कार्तिक। तिथि 11 नव, 04:38 → 12 नव, 04:51
- गुरुवार, 25 नवंबर 2027 — कृष्ण पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 25 नव, 05:21 → 26 नव, 04:18
त्रयोदशी दिसंबर 2027
दिसंबर 2027 में त्रयोदशी 2 बार पड़ती है।
- शनिवार, 11 दिसंबर 2027 — शुक्ल पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 10 दिस, 21:23 → 11 दिस, 20:13
- शनिवार, 25 दिसंबर 2027 — कृष्ण पक्ष, पौष। तिथि 24 दिस, 17:39 → 25 दिस, 18:02
त्रयोदशी का दिन कैसे तय होता है
तिथि एक चंद्रमास का तीसवाँ भाग है — चंद्रमा का सूर्य से 12° आगे बढ़ना — इसलिए यह औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, जबकि दिन 24 घंटे का। इसीलिए तिथि लगभग कभी सूर्योदय पर आरंभ नहीं होती। यह पृष्ठ सामान्य नियम मानता है: सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, दिन उसी का कहलाता है। ऊपर की तालिका में इसके दो परिणाम दिखते हैं और दोनों त्रुटि नहीं हैं। जब कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय पर चलती है, तब दोनों दिन सचमुच उसके होते हैं और परंपराएँ बँट जाती हैं। जब वह किसी सूर्योदय को नहीं छूती, तब वह क्षय तिथि है और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं; दिन उनकी व्याख्या है।
अन्य शहर
कोई तिथि किस दिन की कहलाएगी यह सूर्योदय तय करता है, और भारत में सूर्योदय एक घंटे से भी अधिक अंतर रखता है — इसलिए दो शहरों में केवल समय ही नहीं, दिन भी अलग हो सकता है।
यह तालिका आपके चुने शहर के लिए फिर से गणना होती है। ये लिंक इसी पृष्ठ के रूप हैं: हर एक ऊपर के पते पर canonical रखता है और खोज इंजनों से अनुक्रमित न करने को कहता है।
2027 की अन्य तिथियाँ
संबंधित पंचांग पृष्ठ
सामान्य प्रश्न
त्रयोदशी कब है 2027 में?
2027 में अगली त्रयोदशी मंगलवार, 5 जनवरी 2027 को है। तिथि 4 जन, 12:46 → 5 जन, 15:10 तक चलती है (लंदन के समय अनुसार)। पूरे वर्ष की 25 तिथियाँ ऊपर तालिका में दी गई हैं।
2027 में त्रयोदशी कितनी बार आती है?
25 बार — शुक्ल पक्ष में 12 और कृष्ण पक्ष में 13। संख्या हर वर्ष बदलती है क्योंकि बारह चंद्रमास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे पड़ते हैं, और अधिक मास इसे और बदल देता है।
शुक्ल त्रयोदशी और कृष्ण त्रयोदशी में क्या अंतर है?
दोनों एक ही तिथि संख्या हैं, अलग पक्ष की। शुक्ल पक्ष अमावस्या के बाद का उजाला पखवाड़ा है और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद का। त्रयोदशी हर चंद्रमास में दो बार आती है, एक बार प्रत्येक पक्ष में, और ऊपर की तालिका में पक्ष का स्तंभ बताता है कि कौन-सी कौन है।
मेरे कैलेंडर में त्रयोदशी की तारीख अलग क्यों है?
क्योंकि तिथि शायद ही कभी सूर्योदय पर आरंभ या समाप्त होती है। जब वह दो दिन के सूर्योदय पर चल रही हो, या किसी पर भी न हो, तब परंपराएँ बँट जाती हैं। ऊपर दिए आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं — दिन उनकी व्याख्या है, और यह पृष्ठ बताता है कि उसने कौन-सी व्याख्या ली।
क्या त्रयोदशी पूरे भारत में एक ही दिन होती है?
हमेशा नहीं। दिन सूर्योदय से तय होता है और भारत में सूर्योदय एक घंटे से अधिक अंतर रखता है, इसलिए एक तिथि जो लंदन में सूर्योदय के ठीक बाद समाप्त होती है, पश्चिम के किसी शहर में उससे पहले समाप्त हो सकती है और दिन बदल जाता है। ऊपर शहर बदलकर देखिए।
त्रयोदशी को और किन नामों से खोजा जाता है?
तेरस, त्रयोदशी तिथि — ये सब एक ही तिथि हैं। इस पृष्ठ का पता एक ही है ताकि उत्तर एक जगह रहे।
क्षय त्रयोदशी क्या होती है?
2027 में 1 बार त्रयोदशी क्षय तिथि है: गुरुवार, 18 फ़रवरी 2027। क्षय तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो जाती है। व्रत फिर भी रखा जाता है, उसी दिन जिस दिन वह चली, पर सामान्य सूर्योदय नियम वहाँ लागू नहीं होता।