तिथि कैलेंडर · काठमांडू
द्वितीया 2026 में कब है
2026 में द्वितीया 25 बार पड़ती है। नीचे हर तिथि का दिन, आरंभ और समाप्ति का समय और वह महीना दिया है जिसमें वह आती है।
- यह तालिका काठमांडू के लिए चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से इसी समय गणना की गई है — किसी छपे कैलेंडर से नकल नहीं की गई।
- हर तिथि का आरंभ और समाप्ति समय दिया गया है, ताकि आप दिन स्वयं जाँच सकें।
2026 की सभी द्वितीया तिथियाँ
| तारीख | पक्ष | हिंदू माह (पूर्णिमांत) | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|---|
| सोमवार, 5 जनवरी 2026 | कृष्ण | माघ | 4 जन, 12:45 | 5 जन, 10:12 | — |
| मंगलवार, 20 जनवरी 2026 | शुक्ल | माघ | 20 जन, 02:29 | 21 जन, 02:58 | — |
| मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026 | कृष्ण | फाल्गुन | 3 फ़र, 02:07 | 4 फ़र, 00:56 | — |
| गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026 | शुक्ल | फाल्गुन | 18 फ़र, 17:13 | 19 फ़र, 16:14 | — |
| गुरुवार, 5 मार्च 2026 | कृष्ण | चैत्र | 4 मार्च, 17:04 | 5 मार्च, 17:19 | — |
| शुक्रवार, 20 मार्च 2026 | शुक्ल | चैत्र | 20 मार्च, 05:08 | 21 मार्च, 02:46 | — |
| शनिवार, 4 अप्रैल 2026 | कृष्ण | वैशाख | 3 अप्रै, 08:57 | 4 अप्रै, 10:25 | — |
| रविवार, 19 अप्रैल 2026 | शुक्ल | वैशाख | 18 अप्रै, 14:26 | 19 अप्रै, 11:04 | — |
| रविवार, 3 मई 2026 | कृष्ण | ज्येष्ठ | 3 मई, 01:06 | 4 मई, 03:17 | — |
| सोमवार, 18 मई 2026 | शुक्ल | अधिक ज्येष्ठ | 17 मई, 21:56 | 18 मई, 18:08 | — |
| मंगलवार, 2 जून 2026 | कृष्ण | अधिक ज्येष्ठ | 1 जून, 16:52 | 2 जून, 19:16 | — |
| मंगलवार, 16 जून 2026 | शुक्ल | ज्येष्ठ | 16 जून, 04:46 | 17 जून, 01:08 | — |
| गुरुवार, 2 जुलाई 2026 | कृष्ण | आषाढ़ | 1 जुला, 07:54 | 2 जुला, 09:53 | — |
| गुरुवार, 16 जुलाई 2026 | शुक्ल | आषाढ़ | 15 जुला, 12:06 | 16 जुला, 09:08 | — |
| शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 | कृष्ण | श्रावण | 30 जुला, 21:46 | 31 जुला, 22:47 | — |
| शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 | शुक्ल | श्रावण | 13 अग, 20:57 | 14 अग, 19:02 | — |
| रविवार, 30 अगस्त 2026 | कृष्ण | भाद्रपद | 29 अग, 10:12 | 30 अग, 09:52 | — |
| रविवार, 13 सितंबर 2026 | शुक्ल | भाद्रपद | 12 सित, 08:01 | 13 सित, 07:24 | — |
| सोमवार, 28 सितंबर 2026 | कृष्ण | आश्विन | 27 सित, 21:14 | 28 सित, 19:29 | — |
| सोमवार, 12 अक्तूबर 2026 | शुक्ल | आश्विन | 11 अक्टू, 21:46 | 12 अक्टू, 22:28 | — |
| मंगलवार, 27 अक्तूबर 2026 | कृष्ण | कार्तिक | 27 अक्टू, 07:17 | 28 अक्टू, 04:22 | क्षय तिथि |
| बुधवार, 11 नवंबर 2026 | शुक्ल | कार्तिक | 10 नव, 14:15 | 11 नव, 16:09 | — |
| गुरुवार, 26 नवंबर 2026 | कृष्ण | मार्गशीर्ष | 25 नव, 17:05 | 26 नव, 13:31 | — |
| शुक्रवार, 11 दिसंबर 2026 | शुक्ल | मार्गशीर्ष | 10 दिस, 09:01 | 11 दिस, 11:39 | — |
| शुक्रवार, 25 दिसंबर 2026 | कृष्ण | पौष | 25 दिस, 03:22 | 25 दिस, 23:41 | — |
समय काठमांडू के अनुसार हैं। जिस पंक्ति पर क्षय तिथि लिखा है, वह तिथि किसी सूर्योदय पर नहीं थी — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो गई, और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। जिस पर अगले दिन भी मान्य लिखा है, वहाँ तिथि दो सूर्योदय तक चलती है, इसलिए दो परंपराएँ दो अलग दिन लेती हैं।
द्वितीया जनवरी 2026
जनवरी 2026 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 5 जनवरी 2026 — कृष्ण पक्ष, माघ। तिथि 4 जन, 12:45 → 5 जन, 10:12
- मंगलवार, 20 जनवरी 2026 — शुक्ल पक्ष, माघ। तिथि 20 जन, 02:29 → 21 जन, 02:58
द्वितीया फ़रवरी 2026
फ़रवरी 2026 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026 — कृष्ण पक्ष, फाल्गुन। तिथि 3 फ़र, 02:07 → 4 फ़र, 00:56
- गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026 — शुक्ल पक्ष, फाल्गुन। तिथि 18 फ़र, 17:13 → 19 फ़र, 16:14
द्वितीया मार्च 2026
मार्च 2026 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 5 मार्च 2026 — कृष्ण पक्ष, चैत्र। तिथि 4 मार्च, 17:04 → 5 मार्च, 17:19
- शुक्रवार, 20 मार्च 2026 — शुक्ल पक्ष, चैत्र। तिथि 20 मार्च, 05:08 → 21 मार्च, 02:46
द्वितीया अप्रैल 2026
अप्रैल 2026 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- शनिवार, 4 अप्रैल 2026 — कृष्ण पक्ष, वैशाख। तिथि 3 अप्रै, 08:57 → 4 अप्रै, 10:25
- रविवार, 19 अप्रैल 2026 — शुक्ल पक्ष, वैशाख। तिथि 18 अप्रै, 14:26 → 19 अप्रै, 11:04
द्वितीया मई 2026
मई 2026 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- रविवार, 3 मई 2026 — कृष्ण पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 3 मई, 01:06 → 4 मई, 03:17
- सोमवार, 18 मई 2026 — शुक्ल पक्ष, अधिक ज्येष्ठ। तिथि 17 मई, 21:56 → 18 मई, 18:08
द्वितीया जून 2026
जून 2026 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- मंगलवार, 2 जून 2026 — कृष्ण पक्ष, अधिक ज्येष्ठ। तिथि 1 जून, 16:52 → 2 जून, 19:16
- मंगलवार, 16 जून 2026 — शुक्ल पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 16 जून, 04:46 → 17 जून, 01:08
द्वितीया जुलाई 2026
जुलाई 2026 में द्वितीया 3 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 2 जुलाई 2026 — कृष्ण पक्ष, आषाढ़। तिथि 1 जुला, 07:54 → 2 जुला, 09:53
- गुरुवार, 16 जुलाई 2026 — शुक्ल पक्ष, आषाढ़। तिथि 15 जुला, 12:06 → 16 जुला, 09:08
- शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 — कृष्ण पक्ष, श्रावण। तिथि 30 जुला, 21:46 → 31 जुला, 22:47
द्वितीया अगस्त 2026
अगस्त 2026 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 — शुक्ल पक्ष, श्रावण। तिथि 13 अग, 20:57 → 14 अग, 19:02
- रविवार, 30 अगस्त 2026 — कृष्ण पक्ष, भाद्रपद। तिथि 29 अग, 10:12 → 30 अग, 09:52
द्वितीया सितंबर 2026
सितंबर 2026 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- रविवार, 13 सितंबर 2026 — शुक्ल पक्ष, भाद्रपद। तिथि 12 सित, 08:01 → 13 सित, 07:24
- सोमवार, 28 सितंबर 2026 — कृष्ण पक्ष, आश्विन। तिथि 27 सित, 21:14 → 28 सित, 19:29
द्वितीया अक्तूबर 2026
अक्तूबर 2026 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 12 अक्तूबर 2026 — शुक्ल पक्ष, आश्विन। तिथि 11 अक्टू, 21:46 → 12 अक्टू, 22:28
- मंगलवार, 27 अक्तूबर 2026 — कृष्ण पक्ष, कार्तिक। तिथि 27 अक्टू, 07:17 → 28 अक्टू, 04:22 (क्षय तिथि)
द्वितीया नवंबर 2026
नवंबर 2026 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- बुधवार, 11 नवंबर 2026 — शुक्ल पक्ष, कार्तिक। तिथि 10 नव, 14:15 → 11 नव, 16:09
- गुरुवार, 26 नवंबर 2026 — कृष्ण पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 25 नव, 17:05 → 26 नव, 13:31
द्वितीया दिसंबर 2026
दिसंबर 2026 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- शुक्रवार, 11 दिसंबर 2026 — शुक्ल पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 10 दिस, 09:01 → 11 दिस, 11:39
- शुक्रवार, 25 दिसंबर 2026 — कृष्ण पक्ष, पौष। तिथि 25 दिस, 03:22 → 25 दिस, 23:41
द्वितीया का दिन कैसे तय होता है
तिथि एक चंद्रमास का तीसवाँ भाग है — चंद्रमा का सूर्य से 12° आगे बढ़ना — इसलिए यह औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, जबकि दिन 24 घंटे का। इसीलिए तिथि लगभग कभी सूर्योदय पर आरंभ नहीं होती। यह पृष्ठ सामान्य नियम मानता है: सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, दिन उसी का कहलाता है। ऊपर की तालिका में इसके दो परिणाम दिखते हैं और दोनों त्रुटि नहीं हैं। जब कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय पर चलती है, तब दोनों दिन सचमुच उसके होते हैं और परंपराएँ बँट जाती हैं। जब वह किसी सूर्योदय को नहीं छूती, तब वह क्षय तिथि है और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं; दिन उनकी व्याख्या है।
अन्य शहर
कोई तिथि किस दिन की कहलाएगी यह सूर्योदय तय करता है, और भारत में सूर्योदय एक घंटे से भी अधिक अंतर रखता है — इसलिए दो शहरों में केवल समय ही नहीं, दिन भी अलग हो सकता है।
यह तालिका आपके चुने शहर के लिए फिर से गणना होती है। ये लिंक इसी पृष्ठ के रूप हैं: हर एक ऊपर के पते पर canonical रखता है और खोज इंजनों से अनुक्रमित न करने को कहता है।
2026 की अन्य तिथियाँ
संबंधित पंचांग पृष्ठ
सामान्य प्रश्न
द्वितीया कब है 2026 में?
2026 में अगली द्वितीया सोमवार, 12 अक्तूबर 2026 को है। तिथि 11 अक्टू, 21:46 → 12 अक्टू, 22:28 तक चलती है (काठमांडू के समय अनुसार)। पूरे वर्ष की 25 तिथियाँ ऊपर तालिका में दी गई हैं।
2026 में द्वितीया कितनी बार आती है?
25 बार — शुक्ल पक्ष में 12 और कृष्ण पक्ष में 13। संख्या हर वर्ष बदलती है क्योंकि बारह चंद्रमास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे पड़ते हैं, और अधिक मास इसे और बदल देता है।
शुक्ल द्वितीया और कृष्ण द्वितीया में क्या अंतर है?
दोनों एक ही तिथि संख्या हैं, अलग पक्ष की। शुक्ल पक्ष अमावस्या के बाद का उजाला पखवाड़ा है और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद का। द्वितीया हर चंद्रमास में दो बार आती है, एक बार प्रत्येक पक्ष में, और ऊपर की तालिका में पक्ष का स्तंभ बताता है कि कौन-सी कौन है।
मेरे कैलेंडर में द्वितीया की तारीख अलग क्यों है?
क्योंकि तिथि शायद ही कभी सूर्योदय पर आरंभ या समाप्त होती है। जब वह दो दिन के सूर्योदय पर चल रही हो, या किसी पर भी न हो, तब परंपराएँ बँट जाती हैं। ऊपर दिए आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं — दिन उनकी व्याख्या है, और यह पृष्ठ बताता है कि उसने कौन-सी व्याख्या ली।
क्या द्वितीया पूरे भारत में एक ही दिन होती है?
हमेशा नहीं। दिन सूर्योदय से तय होता है और भारत में सूर्योदय एक घंटे से अधिक अंतर रखता है, इसलिए एक तिथि जो काठमांडू में सूर्योदय के ठीक बाद समाप्त होती है, पश्चिम के किसी शहर में उससे पहले समाप्त हो सकती है और दिन बदल जाता है। ऊपर शहर बदलकर देखिए।
द्वितीया को और किन नामों से खोजा जाता है?
दूज, बीज — ये सब एक ही तिथि हैं। इस पृष्ठ का पता एक ही है ताकि उत्तर एक जगह रहे।
क्षय द्वितीया क्या होती है?
2026 में 1 बार द्वितीया क्षय तिथि है: मंगलवार, 27 अक्तूबर 2026। क्षय तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो जाती है। व्रत फिर भी रखा जाता है, उसी दिन जिस दिन वह चली, पर सामान्य सूर्योदय नियम वहाँ लागू नहीं होता।