भरणी नक्षत्र

भरणी 27 नक्षत्रों में 2वाँ नक्षत्र है, जो मेष 13°20′ – मेष 26°40′ तक फैला है। इसके स्वामी शुक्र हैं, देवता यम, गण मनुष्य, योनि गज (हाथी) और नाड़ी मध्य (पित्त)।

चंद्रमा अगली बार सोमवार, 26 अक्तूबर 2026, शाम 5:41 बजे से मंगलवार, 27 अक्तूबर 2026, दोपहर 3:39 बजे तक भरणी नक्षत्र में रहेगा (बेंगलुरु का समय)।

भरणी नक्षत्र के स्वामी, देवता, गण, योनि और नाड़ी

अंशमेष 13°20′ – मेष 26°40′
राशिमेष
स्वामी ग्रह (दशा स्वामी)शुक्र
देवतायम
प्रतीकयोनि (गर्भ)
गणमनुष्य
योनिगज (हाथी)
नाड़ीमध्य (पित्त)
तत्वपृथ्वी
मुहूर्त में स्वभावउग्र (क्रूर)
गंडमूल नक्षत्रनहीं

चारों पद मेष राशि में हैं।

यहाँ तत्व नक्षत्र का अपना तत्व है, उसी पाँच-खंड क्रम में जो एस्ट्रोसेज भी छापता है (अश्विनी से मृगशिरा पृथ्वी, आर्द्रा से पूर्वा फाल्गुनी जल, उत्तरा फाल्गुनी से अनुराधा अग्नि, ज्येष्ठा से श्रवण वायु, धनिष्ठा से रेवती आकाश) — चंद्र राशि का तत्व नहीं।

भरणी नक्षत्र के पद, नवांश और नामाक्षर

भरणी नक्षत्र के नामाक्षर Lee, Lu, Le, Lo हैं — हर पद का एक। नामकरण की परंपरा में बच्चे का नाम उस पद की ध्वनि से शुरू किया जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, इसलिए अक्षर नक्षत्र से नहीं, पद से तय होता है।

पदअंशराशिनवांश (D9)नामाक्षरवर्ण (मिलान)
1मेष 13°20′ – मेष 16°40′मेषसिंहLeeक्षत्रिय
2मेष 16°40′ – मेष 20°00′मेषकन्याLuक्षत्रिय
3मेष 20°00′ – मेष 23°20′मेषतुलाLeक्षत्रिय
4मेष 23°20′ – मेष 26°40′मेषवृश्चिकLoक्षत्रिय

वर्ण हर पद के लिए दिया गया है, क्योंकि अष्टकूट मिलान चंद्र राशि का वर्ण गिनता है (जल राशियाँ ब्राह्मण, अग्नि क्षत्रिय, पृथ्वी वैश्य, वायु शूद्र)। कुछ तालिकाएँ नक्षत्र को भी अलग वर्ण देती हैं; वे सूचियाँ स्रोत-दर-स्रोत अलग हैं और मिलान में उनका उपयोग नहीं होता।

मेष राशि के नाम

भरणी नक्षत्र के जातक की विशेषताएँ

भरणी धारण करने का नक्षत्र है: इसका प्रतीक योनि (गर्भ) है और देवता यम, जो जीवन के अंत पर नियम का पालन कराते हैं। परंपरा दोनों विचारों को जोड़ती है — किसी चीज़ को तब तक सँभालना जब तक वह तैयार न हो, और जो समाप्त होना है उसे स्वीकार करना। जातक को तीव्र, निष्ठावान और बिना शिकायत भारी ज़िम्मेदारी उठाने वाला माना जाता है; शुक्र के कारण जीवन के सुखों में रुचि भी गहरी होती है। सावधानी अति की है: काम, प्रेम और संयम — तीनों में सब-कुछ या कुछ नहीं।

नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति बताता है, जो लाखों लोगों की एक ही होती है। इसे पूरी कुंडली के साथ विचार करने वाली प्रवृत्ति के रूप में पढ़ा जाता है — किसी व्यक्ति पर अंतिम निर्णय के रूप में नहीं।

विवाह के लिए भरणी नक्षत्र का मिलान

नाड़ी। भरणी की नाड़ी मध्य (पित्त) है। जब दोनों के जन्म नक्षत्र की नाड़ी एक हो, तो गुण मिलान का नाड़ी कूट 8 में से 0 देता है (नाड़ी दोष); इन नक्षत्रों के साथ मिलान इसी कमी से शुरू होता है: मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तर भाद्रपदा। कई परंपराएँ ऐसे अपवाद बताती हैं जिनमें दोष नहीं माना जाता; एक कूट के बजाय पूरा 36 गुण का मिलान देखें।

योनि। भरणी की योनि गज (हाथी) है। समान योनि — रेवती — पूरे 4 में से 4 अंक देती है। इसकी शत्रु योनि सिंह है, इसलिए धनिष्ठा, पूर्व भाद्रपदा के साथ किसी भी दिशा में 4 में से 0 अंक मिलते हैं।

गण। भरणी का गण मनुष्य है। गण कूट दिशा पर निर्भर है — अंक इस पर बदलते हैं कि वर कौन है — और ये इंजन के अपने मान हैं:

साथी का गणभरणी वाला वर होभरणी वाली वधू हो
देव5 / 66 / 6
मनुष्य6 / 66 / 6
राक्षस0 / 60 / 6

नाड़ी, योनि और गण 36 में से 18 अंक हैं; बाकी चंद्र राशियों और दोनों नक्षत्रों के बीच की गिनती से आते हैं। पूरा कुंडली मिलान · नाम से कुंडली मिलान · नक्षत्र पोरुथम

भरणी नक्षत्र अगली बार कब है?

सेतक
सोमवार, 26 अक्तूबर 2026, शाम 5:41 बजेमंगलवार, 27 अक्तूबर 2026, दोपहर 3:39 बजे
सोमवार, 23 नवंबर 2026, सुबह 4:15 बजेमंगलवार, 24 नवंबर 2026, रात 2:02 बजे
रविवार, 20 दिसंबर 2026, दोपहर 2:55 बजेसोमवार, 21 दिसंबर 2026, दोपहर 1:09 बजे

समय बेंगलुरु का है। चंद्रमा किसी नक्षत्र में हर जगह एक ही क्षण में प्रवेश करता और निकलता है, इसलिए दूसरा शहर चुनने से केवल घड़ी का समय बदलता है। चंद्रमा लगभग 27.3 दिन में उसी नक्षत्र में लौटता है और हर बार लगभग एक दिन रहता है।

आज कौन-सा नक्षत्र चल रहा है

भरणी नक्षत्र से जुड़े प्रश्न

भरणी नक्षत्र किस राशि में है?

भरणी मेष 13°20′ – मेष 26°40′ तक है। चारों पद मेष राशि में हैं।

भरणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?

शुक्र। विंशोत्तरी दशा जन्म नक्षत्र के स्वामी से शुरू होती है, इसलिए भरणी में चंद्रमा रहते जन्मे व्यक्ति का जन्म शुक्र की महादशा में होता है; उसका कितना भाग बचा है, यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे जा चुका था।

भरणी नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?

हर पद का एक — पद 1: Lee; पद 2: Lu; पद 3: Le; पद 4: Lo। जन्म के समय चंद्रमा जिस पद में था, वही अक्षर लागू होता है।

भरणी का गण, योनि और नाड़ी क्या है?

गण मनुष्य, योनि गज (हाथी) और नाड़ी मध्य (पित्त) — यही मान गुण मिलान में गिने जाते हैं।

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