27 में से 19वाँ नक्षत्र · धनु
मूल नक्षत्र
मूल 27 नक्षत्रों में 19वाँ नक्षत्र है, जो धनु 0°00′ – धनु 13°20′ तक फैला है। इसके स्वामी केतु हैं, देवता निऋति, गण राक्षस, योनि श्वान (कुत्ता) और नाड़ी आदि (वात)।
चंद्रमा अगली बार शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2026, सुबह 6:47 बजे से शनिवार, 17 अक्तूबर 2026, सुबह 9:47 बजे तक मूल नक्षत्र में रहेगा (वाराणसी का समय)।
एक नज़र में
मूल नक्षत्र के स्वामी, देवता, गण, योनि और नाड़ी
| अंश | धनु 0°00′ – धनु 13°20′ |
|---|---|
| राशि | धनु |
| स्वामी ग्रह (दशा स्वामी) | केतु |
| देवता | निऋति |
| प्रतीक | बँधी जड़ों का गुच्छा |
| गण | राक्षस |
| योनि | श्वान (कुत्ता) |
| नाड़ी | आदि (वात) |
| तत्व | वायु |
| मुहूर्त में स्वभाव | तीक्ष्ण (दारुण) |
| गंडमूल नक्षत्र | हाँ |
चारों पद धनु राशि में हैं।
यहाँ तत्व नक्षत्र का अपना तत्व है, उसी पाँच-खंड क्रम में जो एस्ट्रोसेज भी छापता है (अश्विनी से मृगशिरा पृथ्वी, आर्द्रा से पूर्वा फाल्गुनी जल, उत्तरा फाल्गुनी से अनुराधा अग्नि, ज्येष्ठा से श्रवण वायु, धनिष्ठा से रेवती आकाश) — चंद्र राशि का तत्व नहीं।
चार पद
मूल नक्षत्र के पद, नवांश और नामाक्षर
मूल नक्षत्र के नामाक्षर Ye, Yo, Bha, Bhee हैं — हर पद का एक। नामकरण की परंपरा में बच्चे का नाम उस पद की ध्वनि से शुरू किया जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, इसलिए अक्षर नक्षत्र से नहीं, पद से तय होता है।
| पद | अंश | राशि | नवांश (D9) | नामाक्षर | वर्ण (मिलान) |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | धनु 0°00′ – धनु 3°20′ | धनु | मेष | Ye | क्षत्रिय |
| 2 | धनु 3°20′ – धनु 6°40′ | धनु | वृषभ | Yo | क्षत्रिय |
| 3 | धनु 6°40′ – धनु 10°00′ | धनु | मिथुन | Bha | क्षत्रिय |
| 4 | धनु 10°00′ – धनु 13°20′ | धनु | कर्क | Bhee | क्षत्रिय |
वर्ण हर पद के लिए दिया गया है, क्योंकि अष्टकूट मिलान चंद्र राशि का वर्ण गिनता है (जल राशियाँ ब्राह्मण, अग्नि क्षत्रिय, पृथ्वी वैश्य, वायु शूद्र)। कुछ तालिकाएँ नक्षत्र को भी अलग वर्ण देती हैं; वे सूचियाँ स्रोत-दर-स्रोत अलग हैं और मिलान में उनका उपयोग नहीं होता।
स्वभाव
मूल नक्षत्र के जातक की विशेषताएँ
मूल का अर्थ है जड़, और इसका प्रतीक बँधी हुई जड़ों का गुच्छा है; इसकी देवी निऋति हैं, जो विघटन की अधिष्ठात्री हैं। परंपरा इसे चीज़ों की तह तक जाने वाला नक्षत्र मानती है — खोज, दर्शन, मूल कारण तक पहुँचना, और जो काम नहीं कर रहा उसे जड़ से उखाड़ने का साहस। जातक को स्पष्टवादी, खोजी और स्वतंत्र बताया जाता है। स्वामी केतु विरक्ति जोड़ता है। सावधानी बेचैनी और अचानक नाता तोड़ने की है — सुधारने के बजाय समाप्त कर देना।
नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति बताता है, जो लाखों लोगों की एक ही होती है। इसे पूरी कुंडली के साथ विचार करने वाली प्रवृत्ति के रूप में पढ़ा जाता है — किसी व्यक्ति पर अंतिम निर्णय के रूप में नहीं।
मिलान
विवाह के लिए मूल नक्षत्र का मिलान
नाड़ी। मूल की नाड़ी आदि (वात) है। जब दोनों के जन्म नक्षत्र की नाड़ी एक हो, तो गुण मिलान का नाड़ी कूट 8 में से 0 देता है (नाड़ी दोष); इन नक्षत्रों के साथ मिलान इसी कमी से शुरू होता है: अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, शतभिषा, पूर्व भाद्रपदा। कई परंपराएँ ऐसे अपवाद बताती हैं जिनमें दोष नहीं माना जाता; एक कूट के बजाय पूरा 36 गुण का मिलान देखें।
योनि। मूल की योनि श्वान (कुत्ता) है। समान योनि — आर्द्रा — पूरे 4 में से 4 अंक देती है। इसकी शत्रु योनि मृग (हिरण) है, इसलिए अनुराधा, ज्येष्ठा के साथ किसी भी दिशा में 4 में से 0 अंक मिलते हैं।
गण। मूल का गण राक्षस है। गण कूट दिशा पर निर्भर है — अंक इस पर बदलते हैं कि वर कौन है — और ये इंजन के अपने मान हैं:
| साथी का गण | मूल वाला वर हो | मूल वाली वधू हो |
|---|---|---|
| देव | 1 / 6 | 0 / 6 |
| मनुष्य | 0 / 6 | 0 / 6 |
| राक्षस | 6 / 6 | 6 / 6 |
नाड़ी, योनि और गण 36 में से 18 अंक हैं; बाकी चंद्र राशियों और दोनों नक्षत्रों के बीच की गिनती से आते हैं। पूरा कुंडली मिलान · नाम से कुंडली मिलान · नक्षत्र पोरुथम
गंडमूल
क्या मूल गंडमूल नक्षत्र है?
मूल छह गंडमूल नक्षत्रों में से एक है — अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती — वे नक्षत्र जो उन तीन संधियों पर हैं जहाँ एक जल राशि समाप्त होकर अग्नि राशि शुरू होती है। इनमें से किसी नक्षत्र में चंद्रमा रहते जन्मे बच्चे के लिए कई परिवार गंडमूल शांति कराते हैं, परंपरा से उस दिन जब लगभग 27 दिन बाद चंद्रमा फिर उसी नक्षत्र में आता है। यह एक धार्मिक अनुष्ठान है, भविष्यवाणी नहीं: इन नक्षत्रों में बहुत बड़ी संख्या में लोग जन्म लेते हैं और सामान्य जीवन जीते हैं।
पंचांग गणना से
मूल नक्षत्र अगली बार कब है?
| से | तक |
|---|---|
| शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2026, सुबह 6:47 बजे | शनिवार, 17 अक्तूबर 2026, सुबह 9:47 बजे |
| गुरुवार, 12 नवंबर 2026, दोपहर 2:19 बजे | शुक्रवार, 13 नवंबर 2026, शाम 5:17 बजे |
| बुधवार, 9 दिसंबर 2026, रात 9:00 बजे | गुरुवार, 10 दिसंबर 2026, रात 11:58 बजे |
समय वाराणसी का है। चंद्रमा किसी नक्षत्र में हर जगह एक ही क्षण में प्रवेश करता और निकलता है, इसलिए दूसरा शहर चुनने से केवल घड़ी का समय बदलता है। चंद्रमा लगभग 27.3 दिन में उसी नक्षत्र में लौटता है और हर बार लगभग एक दिन रहता है।
प्रश्न
मूल नक्षत्र से जुड़े प्रश्न
मूल नक्षत्र किस राशि में है?
मूल धनु 0°00′ – धनु 13°20′ तक है। चारों पद धनु राशि में हैं।
मूल नक्षत्र का स्वामी कौन है?
केतु। विंशोत्तरी दशा जन्म नक्षत्र के स्वामी से शुरू होती है, इसलिए मूल में चंद्रमा रहते जन्मे व्यक्ति का जन्म केतु की महादशा में होता है; उसका कितना भाग बचा है, यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे जा चुका था।
मूल नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
हर पद का एक — पद 1: Ye; पद 2: Yo; पद 3: Bha; पद 4: Bhee। जन्म के समय चंद्रमा जिस पद में था, वही अक्षर लागू होता है।
मूल का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
गण राक्षस, योनि श्वान (कुत्ता) और नाड़ी आदि (वात) — यही मान गुण मिलान में गिने जाते हैं।
क्या मूल गंडमूल नक्षत्र है?
हाँ। यह उन छह में से एक है — अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती — जिनमें जन्म होने पर कई परिवार गंडमूल शांति कराते हैं। यह एक अनुष्ठान है, भविष्यवाणी नहीं।
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