27 में से 5वाँ नक्षत्र · वृषभ · मिथुन
मृगशिरा नक्षत्र
मृगशिरा 27 नक्षत्रों में 5वाँ नक्षत्र है, जो वृषभ 23°20′ – मिथुन 6°40′ तक फैला है। इसके स्वामी मंगल हैं, देवता सोम (चंद्र), गण देव, योनि सर्प और नाड़ी मध्य (पित्त)।
चंद्रमा अगली बार गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026, सुबह 11:11 बजे से शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2026, सुबह 9:04 बजे तक मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा (वडोदरा का समय)।
एक नज़र में
मृगशिरा नक्षत्र के स्वामी, देवता, गण, योनि और नाड़ी
| अंश | वृषभ 23°20′ – मिथुन 6°40′ |
|---|---|
| राशि | वृषभ · मिथुन |
| स्वामी ग्रह (दशा स्वामी) | मंगल |
| देवता | सोम (चंद्र) |
| प्रतीक | हिरण का सिर |
| गण | देव |
| योनि | सर्प |
| नाड़ी | मध्य (पित्त) |
| तत्व | पृथ्वी |
| मुहूर्त में स्वभाव | मृदु (मैत्र) |
| गंडमूल नक्षत्र | नहीं |
पद 1–2 वृषभ राशि में; पद 3–4 मिथुन राशि में हैं।
यहाँ तत्व नक्षत्र का अपना तत्व है, उसी पाँच-खंड क्रम में जो एस्ट्रोसेज भी छापता है (अश्विनी से मृगशिरा पृथ्वी, आर्द्रा से पूर्वा फाल्गुनी जल, उत्तरा फाल्गुनी से अनुराधा अग्नि, ज्येष्ठा से श्रवण वायु, धनिष्ठा से रेवती आकाश) — चंद्र राशि का तत्व नहीं।
चार पद
मृगशिरा नक्षत्र के पद, नवांश और नामाक्षर
मृगशिरा नक्षत्र के नामाक्षर Ve / Be, Vo / Bo, Ka, Kee हैं — हर पद का एक। नामकरण की परंपरा में बच्चे का नाम उस पद की ध्वनि से शुरू किया जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, इसलिए अक्षर नक्षत्र से नहीं, पद से तय होता है।
| पद | अंश | राशि | नवांश (D9) | नामाक्षर | वर्ण (मिलान) |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | वृषभ 23°20′ – वृषभ 26°40′ | वृषभ | सिंह | Ve / Be | वैश्य |
| 2 | वृषभ 26°40′ – वृषभ 30°00′ | वृषभ | कन्या | Vo / Bo | वैश्य |
| 3 | मिथुन 0°00′ – मिथुन 3°20′ | मिथुन | तुला | Ka | शूद्र |
| 4 | मिथुन 3°20′ – मिथुन 6°40′ | मिथुन | वृश्चिक | Kee | शूद्र |
जहाँ किसी पद में दो रूप दिए हैं ("Va / Ba"), दोनों क्षेत्रीय परंपराओं में चलते हैं; यह पेज आपके लिए उनमें से एक नहीं चुनता।
वर्ण हर पद के लिए दिया गया है, क्योंकि अष्टकूट मिलान चंद्र राशि का वर्ण गिनता है (जल राशियाँ ब्राह्मण, अग्नि क्षत्रिय, पृथ्वी वैश्य, वायु शूद्र)। कुछ तालिकाएँ नक्षत्र को भी अलग वर्ण देती हैं; वे सूचियाँ स्रोत-दर-स्रोत अलग हैं और मिलान में उनका उपयोग नहीं होता।
स्वभाव
मृगशिरा नक्षत्र के जातक की विशेषताएँ
मृगशिरा खोज का नक्षत्र है: इसका प्रतीक हिरण का सिर है और देवता सोम, इसलिए परंपरा इसे एक कोमल प्राणी की तरह देखती है जो हमेशा अगले खुले मैदान की तलाश में रहता है। यहाँ चंद्रमा वाले लोग जिज्ञासु, बोलने में कुशल और बेचैन माने जाते हैं — शोध, यात्रा और बातचीत में अच्छे। स्वामी मंगल इस खोज में ऊर्जा जोड़ता है। सावधानी कहीं न टिकने की है — किसी जगह, योजना या व्यक्ति पर — क्योंकि अगली चीज़ हमेशा थोड़ी बेहतर लगती है।
नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति बताता है, जो लाखों लोगों की एक ही होती है। इसे पूरी कुंडली के साथ विचार करने वाली प्रवृत्ति के रूप में पढ़ा जाता है — किसी व्यक्ति पर अंतिम निर्णय के रूप में नहीं।
मिलान
विवाह के लिए मृगशिरा नक्षत्र का मिलान
नाड़ी। मृगशिरा की नाड़ी मध्य (पित्त) है। जब दोनों के जन्म नक्षत्र की नाड़ी एक हो, तो गुण मिलान का नाड़ी कूट 8 में से 0 देता है (नाड़ी दोष); इन नक्षत्रों के साथ मिलान इसी कमी से शुरू होता है: भरणी, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तर भाद्रपदा। कई परंपराएँ ऐसे अपवाद बताती हैं जिनमें दोष नहीं माना जाता; एक कूट के बजाय पूरा 36 गुण का मिलान देखें।
योनि। मृगशिरा की योनि सर्प है। समान योनि — रोहिणी — पूरे 4 में से 4 अंक देती है। इसकी शत्रु योनि नकुल (नेवला) है, इसलिए उत्तराषाढ़ा के साथ किसी भी दिशा में 4 में से 0 अंक मिलते हैं।
गण। मृगशिरा का गण देव है। गण कूट दिशा पर निर्भर है — अंक इस पर बदलते हैं कि वर कौन है — और ये इंजन के अपने मान हैं:
| साथी का गण | मृगशिरा वाला वर हो | मृगशिरा वाली वधू हो |
|---|---|---|
| देव | 6 / 6 | 6 / 6 |
| मनुष्य | 6 / 6 | 5 / 6 |
| राक्षस | 0 / 6 | 1 / 6 |
नाड़ी, योनि और गण 36 में से 18 अंक हैं; बाकी चंद्र राशियों और दोनों नक्षत्रों के बीच की गिनती से आते हैं। पूरा कुंडली मिलान · नाम से कुंडली मिलान · नक्षत्र पोरुथम
पंचांग गणना से
मृगशिरा नक्षत्र अगली बार कब है?
| से | तक |
|---|---|
| गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026, सुबह 11:11 बजे | शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2026, सुबह 9:04 बजे |
| बुधवार, 25 नवंबर 2026, रात 8:36 बजे | गुरुवार, 26 नवंबर 2026, शाम 5:47 बजे |
| बुधवार, 23 दिसंबर 2026, सुबह 7:56 बजे | गुरुवार, 24 दिसंबर 2026, सुबह 4:53 बजे |
समय वडोदरा का है। चंद्रमा किसी नक्षत्र में हर जगह एक ही क्षण में प्रवेश करता और निकलता है, इसलिए दूसरा शहर चुनने से केवल घड़ी का समय बदलता है। चंद्रमा लगभग 27.3 दिन में उसी नक्षत्र में लौटता है और हर बार लगभग एक दिन रहता है।
प्रश्न
मृगशिरा नक्षत्र से जुड़े प्रश्न
मृगशिरा नक्षत्र किस राशि में है?
मृगशिरा वृषभ 23°20′ – मिथुन 6°40′ तक है। पद 1–2 वृषभ राशि में; पद 3–4 मिथुन राशि में हैं।
मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
मंगल। विंशोत्तरी दशा जन्म नक्षत्र के स्वामी से शुरू होती है, इसलिए मृगशिरा में चंद्रमा रहते जन्मे व्यक्ति का जन्म मंगल की महादशा में होता है; उसका कितना भाग बचा है, यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे जा चुका था।
मृगशिरा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
हर पद का एक — पद 1: Ve / Be; पद 2: Vo / Bo; पद 3: Ka; पद 4: Kee। जन्म के समय चंद्रमा जिस पद में था, वही अक्षर लागू होता है।
मृगशिरा का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
गण देव, योनि सर्प और नाड़ी मध्य (पित्त) — यही मान गुण मिलान में गिने जाते हैं।
01–27