27 में से 20वाँ नक्षत्र · धनु
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 27 नक्षत्रों में 20वाँ नक्षत्र है, जो धनु 13°20′ – धनु 26°40′ तक फैला है। इसके स्वामी शुक्र हैं, देवता आपः (जल देवता), गण मनुष्य, योनि वानर (बंदर) और नाड़ी मध्य (पित्त)।
चंद्रमा अगली बार शनिवार, 17 अक्तूबर 2026, सुबह 9:47 बजे से रविवार, 18 अक्तूबर 2026, दोपहर 12:49 बजे तक पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा (गोवा का समय)।
एक नज़र में
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी, देवता, गण, योनि और नाड़ी
| अंश | धनु 13°20′ – धनु 26°40′ |
|---|---|
| राशि | धनु |
| स्वामी ग्रह (दशा स्वामी) | शुक्र |
| देवता | आपः (जल देवता) |
| प्रतीक | पंखा / सूप |
| गण | मनुष्य |
| योनि | वानर (बंदर) |
| नाड़ी | मध्य (पित्त) |
| तत्व | वायु |
| मुहूर्त में स्वभाव | उग्र (क्रूर) |
| गंडमूल नक्षत्र | नहीं |
चारों पद धनु राशि में हैं।
यहाँ तत्व नक्षत्र का अपना तत्व है, उसी पाँच-खंड क्रम में जो एस्ट्रोसेज भी छापता है (अश्विनी से मृगशिरा पृथ्वी, आर्द्रा से पूर्वा फाल्गुनी जल, उत्तरा फाल्गुनी से अनुराधा अग्नि, ज्येष्ठा से श्रवण वायु, धनिष्ठा से रेवती आकाश) — चंद्र राशि का तत्व नहीं।
चार पद
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के पद, नवांश और नामाक्षर
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के नामाक्षर Bhu, Dha, Pha, Dha हैं — हर पद का एक। नामकरण की परंपरा में बच्चे का नाम उस पद की ध्वनि से शुरू किया जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, इसलिए अक्षर नक्षत्र से नहीं, पद से तय होता है।
| पद | अंश | राशि | नवांश (D9) | नामाक्षर | वर्ण (मिलान) |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | धनु 13°20′ – धनु 16°40′ | धनु | सिंह | Bhu | क्षत्रिय |
| 2 | धनु 16°40′ – धनु 20°00′ | धनु | कन्या | Dha | क्षत्रिय |
| 3 | धनु 20°00′ – धनु 23°20′ | धनु | तुला | Pha | क्षत्रिय |
| 4 | धनु 23°20′ – धनु 26°40′ | धनु | वृश्चिक | Dha | क्षत्रिय |
वर्ण हर पद के लिए दिया गया है, क्योंकि अष्टकूट मिलान चंद्र राशि का वर्ण गिनता है (जल राशियाँ ब्राह्मण, अग्नि क्षत्रिय, पृथ्वी वैश्य, वायु शूद्र)। कुछ तालिकाएँ नक्षत्र को भी अलग वर्ण देती हैं; वे सूचियाँ स्रोत-दर-स्रोत अलग हैं और मिलान में उनका उपयोग नहीं होता।
स्वभाव
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातक की विशेषताएँ
पूर्वाषाढ़ा 'प्रारंभिक विजय' का नक्षत्र है, और इसके देवता आपः हैं — वह जल जिसे रोका नहीं जा सकता। इसका प्रतीक सूप है, जो अनाज को भूसे से अलग करता है। परंपरा इसे दृढ़ विश्वास और प्रेरणा का नक्षत्र मानती है: जातक को आत्मविश्वासी, प्रेरक और अपने उद्देश्य के प्रति निष्ठावान बताया जाता है; स्वामी शुक्र आकर्षण और परिष्कार की रुचि जोड़ता है। सावधानी अति-आत्मविश्वास की है — काम पूरा होने से पहले जीत घोषित कर देना।
नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति बताता है, जो लाखों लोगों की एक ही होती है। इसे पूरी कुंडली के साथ विचार करने वाली प्रवृत्ति के रूप में पढ़ा जाता है — किसी व्यक्ति पर अंतिम निर्णय के रूप में नहीं।
मिलान
विवाह के लिए पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का मिलान
नाड़ी। पूर्वाषाढ़ा की नाड़ी मध्य (पित्त) है। जब दोनों के जन्म नक्षत्र की नाड़ी एक हो, तो गुण मिलान का नाड़ी कूट 8 में से 0 देता है (नाड़ी दोष); इन नक्षत्रों के साथ मिलान इसी कमी से शुरू होता है: भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, धनिष्ठा, उत्तर भाद्रपदा। कई परंपराएँ ऐसे अपवाद बताती हैं जिनमें दोष नहीं माना जाता; एक कूट के बजाय पूरा 36 गुण का मिलान देखें।
योनि। पूर्वाषाढ़ा की योनि वानर (बंदर) है। समान योनि — श्रवण — पूरे 4 में से 4 अंक देती है। इसकी शत्रु योनि मेष (भेड़) है, इसलिए कृत्तिका, पुष्य के साथ किसी भी दिशा में 4 में से 0 अंक मिलते हैं।
गण। पूर्वाषाढ़ा का गण मनुष्य है। गण कूट दिशा पर निर्भर है — अंक इस पर बदलते हैं कि वर कौन है — और ये इंजन के अपने मान हैं:
| साथी का गण | पूर्वाषाढ़ा वाला वर हो | पूर्वाषाढ़ा वाली वधू हो |
|---|---|---|
| देव | 5 / 6 | 6 / 6 |
| मनुष्य | 6 / 6 | 6 / 6 |
| राक्षस | 0 / 6 | 0 / 6 |
नाड़ी, योनि और गण 36 में से 18 अंक हैं; बाकी चंद्र राशियों और दोनों नक्षत्रों के बीच की गिनती से आते हैं। पूरा कुंडली मिलान · नाम से कुंडली मिलान · नक्षत्र पोरुथम
पंचांग गणना से
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र अगली बार कब है?
| से | तक |
|---|---|
| शनिवार, 17 अक्तूबर 2026, सुबह 9:47 बजे | रविवार, 18 अक्तूबर 2026, दोपहर 12:49 बजे |
| शुक्रवार, 13 नवंबर 2026, शाम 5:17 बजे | शनिवार, 14 नवंबर 2026, रात 8:24 बजे |
| गुरुवार, 10 दिसंबर 2026, रात 11:58 बजे | शनिवार, 12 दिसंबर 2026, रात 3:04 बजे |
समय गोवा का है। चंद्रमा किसी नक्षत्र में हर जगह एक ही क्षण में प्रवेश करता और निकलता है, इसलिए दूसरा शहर चुनने से केवल घड़ी का समय बदलता है। चंद्रमा लगभग 27.3 दिन में उसी नक्षत्र में लौटता है और हर बार लगभग एक दिन रहता है।
प्रश्न
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र से जुड़े प्रश्न
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र किस राशि में है?
पूर्वाषाढ़ा धनु 13°20′ – धनु 26°40′ तक है। चारों पद धनु राशि में हैं।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
शुक्र। विंशोत्तरी दशा जन्म नक्षत्र के स्वामी से शुरू होती है, इसलिए पूर्वाषाढ़ा में चंद्रमा रहते जन्मे व्यक्ति का जन्म शुक्र की महादशा में होता है; उसका कितना भाग बचा है, यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे जा चुका था।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
हर पद का एक — पद 1: Bhu; पद 2: Dha; पद 3: Pha; पद 4: Dha। जन्म के समय चंद्रमा जिस पद में था, वही अक्षर लागू होता है।
पूर्वाषाढ़ा का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
गण मनुष्य, योनि वानर (बंदर) और नाड़ी मध्य (पित्त) — यही मान गुण मिलान में गिने जाते हैं।
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