पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र

पूर्वा फाल्गुनी 27 नक्षत्रों में 11वाँ नक्षत्र है, जो सिंह 13°20′ – सिंह 26°40′ तक फैला है। इसके स्वामी शुक्र हैं, देवता भग, गण मनुष्य, योनि मूषक (चूहा) और नाड़ी मध्य (पित्त)।

चंद्रमा अगली बार बुधवार, 4 नवंबर 2026, रात 3:26 बजे से गुरुवार, 5 नवंबर 2026, रात 3:30 बजे तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा (अहमदाबाद का समय)।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी, देवता, गण, योनि और नाड़ी

अंशसिंह 13°20′ – सिंह 26°40′
राशिसिंह
स्वामी ग्रह (दशा स्वामी)शुक्र
देवताभग
प्रतीकपलंग के अगले पाए / झूला
गणमनुष्य
योनिमूषक (चूहा)
नाड़ीमध्य (पित्त)
तत्वजल
मुहूर्त में स्वभावउग्र (क्रूर)
गंडमूल नक्षत्रनहीं

चारों पद सिंह राशि में हैं।

यहाँ तत्व नक्षत्र का अपना तत्व है, उसी पाँच-खंड क्रम में जो एस्ट्रोसेज भी छापता है (अश्विनी से मृगशिरा पृथ्वी, आर्द्रा से पूर्वा फाल्गुनी जल, उत्तरा फाल्गुनी से अनुराधा अग्नि, ज्येष्ठा से श्रवण वायु, धनिष्ठा से रेवती आकाश) — चंद्र राशि का तत्व नहीं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के पद, नवांश और नामाक्षर

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के नामाक्षर Mo, Ta, Tee, Too हैं — हर पद का एक। नामकरण की परंपरा में बच्चे का नाम उस पद की ध्वनि से शुरू किया जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, इसलिए अक्षर नक्षत्र से नहीं, पद से तय होता है।

पदअंशराशिनवांश (D9)नामाक्षरवर्ण (मिलान)
1सिंह 13°20′ – सिंह 16°40′सिंहसिंहMoक्षत्रिय
2सिंह 16°40′ – सिंह 20°00′सिंहकन्याTaक्षत्रिय
3सिंह 20°00′ – सिंह 23°20′सिंहतुलाTeeक्षत्रिय
4सिंह 23°20′ – सिंह 26°40′सिंहवृश्चिकTooक्षत्रिय

वर्ण हर पद के लिए दिया गया है, क्योंकि अष्टकूट मिलान चंद्र राशि का वर्ण गिनता है (जल राशियाँ ब्राह्मण, अग्नि क्षत्रिय, पृथ्वी वैश्य, वायु शूद्र)। कुछ तालिकाएँ नक्षत्र को भी अलग वर्ण देती हैं; वे सूचियाँ स्रोत-दर-स्रोत अलग हैं और मिलान में उनका उपयोग नहीं होता।

सिंह राशि के नाम

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के जातक की विशेषताएँ

पूर्वा फाल्गुनी विश्राम और आनंद का नक्षत्र है: इसका प्रतीक पलंग का अगला भाग है और देवता भग, जो सौभाग्य और साझा सुख के अधिपति हैं। शुक्र के कारण जातक को आकर्षक, रचनात्मक, मिलनसार और समय व स्नेह देने में उदार माना जाता है, जो प्रायः कला, आतिथ्य और उत्सव की ओर खिंचते हैं। रिश्ते उनके लिए बहुत मायने रखते हैं। सावधानी भोग-विलास की है, और मज़ा ख़त्म होने के बाद रोज़मर्रा की मेहनत से मन हट जाने की।

नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति बताता है, जो लाखों लोगों की एक ही होती है। इसे पूरी कुंडली के साथ विचार करने वाली प्रवृत्ति के रूप में पढ़ा जाता है — किसी व्यक्ति पर अंतिम निर्णय के रूप में नहीं।

विवाह के लिए पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का मिलान

नाड़ी। पूर्वा फाल्गुनी की नाड़ी मध्य (पित्त) है। जब दोनों के जन्म नक्षत्र की नाड़ी एक हो, तो गुण मिलान का नाड़ी कूट 8 में से 0 देता है (नाड़ी दोष); इन नक्षत्रों के साथ मिलान इसी कमी से शुरू होता है: भरणी, मृगशिरा, पुष्य, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तर भाद्रपदा। कई परंपराएँ ऐसे अपवाद बताती हैं जिनमें दोष नहीं माना जाता; एक कूट के बजाय पूरा 36 गुण का मिलान देखें।

योनि। पूर्वा फाल्गुनी की योनि मूषक (चूहा) है। समान योनि — मघा — पूरे 4 में से 4 अंक देती है। इसकी शत्रु योनि मार्जार (बिल्ली) है, इसलिए पुनर्वसु, आश्लेषा के साथ किसी भी दिशा में 4 में से 0 अंक मिलते हैं।

गण। पूर्वा फाल्गुनी का गण मनुष्य है। गण कूट दिशा पर निर्भर है — अंक इस पर बदलते हैं कि वर कौन है — और ये इंजन के अपने मान हैं:

साथी का गणपूर्वा फाल्गुनी वाला वर होपूर्वा फाल्गुनी वाली वधू हो
देव5 / 66 / 6
मनुष्य6 / 66 / 6
राक्षस0 / 60 / 6

नाड़ी, योनि और गण 36 में से 18 अंक हैं; बाकी चंद्र राशियों और दोनों नक्षत्रों के बीच की गिनती से आते हैं। पूरा कुंडली मिलान · नाम से कुंडली मिलान · नक्षत्र पोरुथम

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र अगली बार कब है?

सेतक
बुधवार, 4 नवंबर 2026, रात 3:26 बजेगुरुवार, 5 नवंबर 2026, रात 3:30 बजे
मंगलवार, 1 दिसंबर 2026, सुबह 9:00 बजेबुधवार, 2 दिसंबर 2026, सुबह 8:55 बजे
सोमवार, 28 दिसंबर 2026, शाम 4:33 बजेमंगलवार, 29 दिसंबर 2026, दोपहर 3:43 बजे

समय अहमदाबाद का है। चंद्रमा किसी नक्षत्र में हर जगह एक ही क्षण में प्रवेश करता और निकलता है, इसलिए दूसरा शहर चुनने से केवल घड़ी का समय बदलता है। चंद्रमा लगभग 27.3 दिन में उसी नक्षत्र में लौटता है और हर बार लगभग एक दिन रहता है।

आज कौन-सा नक्षत्र चल रहा है

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र से जुड़े प्रश्न

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र किस राशि में है?

पूर्वा फाल्गुनी सिंह 13°20′ – सिंह 26°40′ तक है। चारों पद सिंह राशि में हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी कौन है?

शुक्र। विंशोत्तरी दशा जन्म नक्षत्र के स्वामी से शुरू होती है, इसलिए पूर्वा फाल्गुनी में चंद्रमा रहते जन्मे व्यक्ति का जन्म शुक्र की महादशा में होता है; उसका कितना भाग बचा है, यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे जा चुका था।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?

हर पद का एक — पद 1: Mo; पद 2: Ta; पद 3: Tee; पद 4: Too। जन्म के समय चंद्रमा जिस पद में था, वही अक्षर लागू होता है।

पूर्वा फाल्गुनी का गण, योनि और नाड़ी क्या है?

गण मनुष्य, योनि मूषक (चूहा) और नाड़ी मध्य (पित्त) — यही मान गुण मिलान में गिने जाते हैं।

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