शतभिषा नक्षत्र

शतभिषा 27 नक्षत्रों में 24वाँ नक्षत्र है, जो कुंभ 6°40′ – कुंभ 20°00′ तक फैला है। इसके स्वामी राहु हैं, देवता वरुण, गण राक्षस, योनि अश्व (घोड़ा) और नाड़ी आदि (वात)।

चंद्रमा अगली बार बुधवार, 21 अक्तूबर 2026, रात 10:18 बजे से गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026, रात 11:19 बजे तक शतभिषा नक्षत्र में रहेगा (कुआलालंपुर का समय)।

शतभिषा नक्षत्र के स्वामी, देवता, गण, योनि और नाड़ी

अंशकुंभ 6°40′ – कुंभ 20°00′
राशिकुंभ
स्वामी ग्रह (दशा स्वामी)राहु
देवतावरुण
प्रतीकखाली वृत्त / सहस्र पुष्प
गणराक्षस
योनिअश्व (घोड़ा)
नाड़ीआदि (वात)
तत्वआकाश
मुहूर्त में स्वभावचर (चल)
गंडमूल नक्षत्रनहीं
पंचकचारों पद

चारों पद कुंभ राशि में हैं।

यहाँ तत्व नक्षत्र का अपना तत्व है, उसी पाँच-खंड क्रम में जो एस्ट्रोसेज भी छापता है (अश्विनी से मृगशिरा पृथ्वी, आर्द्रा से पूर्वा फाल्गुनी जल, उत्तरा फाल्गुनी से अनुराधा अग्नि, ज्येष्ठा से श्रवण वायु, धनिष्ठा से रेवती आकाश) — चंद्र राशि का तत्व नहीं।

शतभिषा नक्षत्र के पद, नवांश और नामाक्षर

शतभिषा नक्षत्र के नामाक्षर Go, Sa, See, Su हैं — हर पद का एक। नामकरण की परंपरा में बच्चे का नाम उस पद की ध्वनि से शुरू किया जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, इसलिए अक्षर नक्षत्र से नहीं, पद से तय होता है।

पदअंशराशिनवांश (D9)नामाक्षरवर्ण (मिलान)
1कुंभ 6°40′ – कुंभ 10°00′कुंभधनुGoशूद्र
2कुंभ 10°00′ – कुंभ 13°20′कुंभमकरSaशूद्र
3कुंभ 13°20′ – कुंभ 16°40′कुंभकुंभSeeशूद्र
4कुंभ 16°40′ – कुंभ 20°00′कुंभमीनSuशूद्र

वर्ण हर पद के लिए दिया गया है, क्योंकि अष्टकूट मिलान चंद्र राशि का वर्ण गिनता है (जल राशियाँ ब्राह्मण, अग्नि क्षत्रिय, पृथ्वी वैश्य, वायु शूद्र)। कुछ तालिकाएँ नक्षत्र को भी अलग वर्ण देती हैं; वे सूचियाँ स्रोत-दर-स्रोत अलग हैं और मिलान में उनका उपयोग नहीं होता।

कुंभ राशि के नाम

शतभिषा नक्षत्र के जातक की विशेषताएँ

शतभिषा का अर्थ है 'सौ वैद्य', और इसके देवता वरुण हैं — जल और ब्रह्मांडीय व्यवस्था के स्वामी। इसका प्रतीक खाली वृत्त है। परंपरा इसे उपचार और रहस्य का नक्षत्र मानती है: जातक को स्वतंत्र, वैज्ञानिक, दार्शनिक और निजता पसंद बताया जाता है, जो चिकित्सा, शोध और तकनीक की ओर आकर्षित होते हैं। स्वामी राहु लीक से हटकर सोच देता है। सावधानी अकेलेपन की है — ऐसा संकोच जिसमें दूसरे उन तक पहुँच ही न सकें।

नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति बताता है, जो लाखों लोगों की एक ही होती है। इसे पूरी कुंडली के साथ विचार करने वाली प्रवृत्ति के रूप में पढ़ा जाता है — किसी व्यक्ति पर अंतिम निर्णय के रूप में नहीं।

विवाह के लिए शतभिषा नक्षत्र का मिलान

नाड़ी। शतभिषा की नाड़ी आदि (वात) है। जब दोनों के जन्म नक्षत्र की नाड़ी एक हो, तो गुण मिलान का नाड़ी कूट 8 में से 0 देता है (नाड़ी दोष); इन नक्षत्रों के साथ मिलान इसी कमी से शुरू होता है: अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, पूर्व भाद्रपदा। कई परंपराएँ ऐसे अपवाद बताती हैं जिनमें दोष नहीं माना जाता; एक कूट के बजाय पूरा 36 गुण का मिलान देखें।

योनि। शतभिषा की योनि अश्व (घोड़ा) है। समान योनि — अश्विनी — पूरे 4 में से 4 अंक देती है। इसकी शत्रु योनि महिष (भैंस) है, इसलिए हस्त, स्वाति के साथ किसी भी दिशा में 4 में से 0 अंक मिलते हैं।

गण। शतभिषा का गण राक्षस है। गण कूट दिशा पर निर्भर है — अंक इस पर बदलते हैं कि वर कौन है — और ये इंजन के अपने मान हैं:

साथी का गणशतभिषा वाला वर होशतभिषा वाली वधू हो
देव1 / 60 / 6
मनुष्य0 / 60 / 6
राक्षस6 / 66 / 6

नाड़ी, योनि और गण 36 में से 18 अंक हैं; बाकी चंद्र राशियों और दोनों नक्षत्रों के बीच की गिनती से आते हैं। पूरा कुंडली मिलान · नाम से कुंडली मिलान · नक्षत्र पोरुथम

शतभिषा नक्षत्र अगली बार कब है?

सेतक
बुधवार, 21 अक्तूबर 2026, रात 10:18 बजेगुरुवार, 22 अक्तूबर 2026, रात 11:19 बजे
बुधवार, 18 नवंबर 2026, सुबह 7:04 बजेगुरुवार, 19 नवंबर 2026, सुबह 8:40 बजे
मंगलवार, 15 दिसंबर 2026, दोपहर 2:23 बजेबुधवार, 16 दिसंबर 2026, शाम 4:32 बजे

समय कुआलालंपुर का है। चंद्रमा किसी नक्षत्र में हर जगह एक ही क्षण में प्रवेश करता और निकलता है, इसलिए दूसरा शहर चुनने से केवल घड़ी का समय बदलता है। चंद्रमा लगभग 27.3 दिन में उसी नक्षत्र में लौटता है और हर बार लगभग एक दिन रहता है।

आज कौन-सा नक्षत्र चल रहा है

शतभिषा नक्षत्र से जुड़े प्रश्न

शतभिषा नक्षत्र किस राशि में है?

शतभिषा कुंभ 6°40′ – कुंभ 20°00′ तक है। चारों पद कुंभ राशि में हैं।

शतभिषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

राहु। विंशोत्तरी दशा जन्म नक्षत्र के स्वामी से शुरू होती है, इसलिए शतभिषा में चंद्रमा रहते जन्मे व्यक्ति का जन्म राहु की महादशा में होता है; उसका कितना भाग बचा है, यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे जा चुका था।

शतभिषा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?

हर पद का एक — पद 1: Go; पद 2: Sa; पद 3: See; पद 4: Su। जन्म के समय चंद्रमा जिस पद में था, वही अक्षर लागू होता है।

शतभिषा का गण, योनि और नाड़ी क्या है?

गण राक्षस, योनि अश्व (घोड़ा) और नाड़ी आदि (वात) — यही मान गुण मिलान में गिने जाते हैं।

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