27 में से 22वाँ नक्षत्र · मकर
श्रवण नक्षत्र
श्रवण 27 नक्षत्रों में 22वाँ नक्षत्र है, जो मकर 10°00′ – मकर 23°20′ तक फैला है। इसके स्वामी चंद्र हैं, देवता विष्णु, गण देव, योनि वानर (बंदर) और नाड़ी अंत्य (कफ)।
चंद्रमा अगली बार सोमवार, 19 अक्तूबर 2026, शाम 6:08 बजे से मंगलवार, 20 अक्तूबर 2026, रात 8:32 बजे तक श्रवण नक्षत्र में रहेगा (सिंगापुर का समय)।
एक नज़र में
श्रवण नक्षत्र के स्वामी, देवता, गण, योनि और नाड़ी
| अंश | मकर 10°00′ – मकर 23°20′ |
|---|---|
| राशि | मकर |
| स्वामी ग्रह (दशा स्वामी) | चंद्र |
| देवता | विष्णु |
| प्रतीक | तीन पदचिह्न / कान |
| गण | देव |
| योनि | वानर (बंदर) |
| नाड़ी | अंत्य (कफ) |
| तत्व | वायु |
| मुहूर्त में स्वभाव | चर (चल) |
| गंडमूल नक्षत्र | नहीं |
चारों पद मकर राशि में हैं।
यहाँ तत्व नक्षत्र का अपना तत्व है, उसी पाँच-खंड क्रम में जो एस्ट्रोसेज भी छापता है (अश्विनी से मृगशिरा पृथ्वी, आर्द्रा से पूर्वा फाल्गुनी जल, उत्तरा फाल्गुनी से अनुराधा अग्नि, ज्येष्ठा से श्रवण वायु, धनिष्ठा से रेवती आकाश) — चंद्र राशि का तत्व नहीं।
चार पद
श्रवण नक्षत्र के पद, नवांश और नामाक्षर
श्रवण नक्षत्र के नामाक्षर Khi / Ju, Khu / Je, Khe / Jo, Kho / So हैं — हर पद का एक। नामकरण की परंपरा में बच्चे का नाम उस पद की ध्वनि से शुरू किया जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, इसलिए अक्षर नक्षत्र से नहीं, पद से तय होता है।
| पद | अंश | राशि | नवांश (D9) | नामाक्षर | वर्ण (मिलान) |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | मकर 10°00′ – मकर 13°20′ | मकर | मेष | Khi / Ju | वैश्य |
| 2 | मकर 13°20′ – मकर 16°40′ | मकर | वृषभ | Khu / Je | वैश्य |
| 3 | मकर 16°40′ – मकर 20°00′ | मकर | मिथुन | Khe / Jo | वैश्य |
| 4 | मकर 20°00′ – मकर 23°20′ | मकर | कर्क | Kho / So | वैश्य |
जहाँ किसी पद में दो रूप दिए हैं ("Va / Ba"), दोनों क्षेत्रीय परंपराओं में चलते हैं; यह पेज आपके लिए उनमें से एक नहीं चुनता।
वर्ण हर पद के लिए दिया गया है, क्योंकि अष्टकूट मिलान चंद्र राशि का वर्ण गिनता है (जल राशियाँ ब्राह्मण, अग्नि क्षत्रिय, पृथ्वी वैश्य, वायु शूद्र)। कुछ तालिकाएँ नक्षत्र को भी अलग वर्ण देती हैं; वे सूचियाँ स्रोत-दर-स्रोत अलग हैं और मिलान में उनका उपयोग नहीं होता।
स्वभाव
श्रवण नक्षत्र के जातक की विशेषताएँ
श्रवण का अर्थ है सुनना, और इसके प्रतीक कान और विष्णु के तीन पदचिह्न हैं — विष्णु ही इसके देवता हैं। परंपरा इसे सुनने और सीखने का नक्षत्र मानती है: जातक को ध्यान देने वाला, जानकार और अच्छा शिक्षक, सलाहकार व संवादक बताया जाता है, जो धैर्य से ज्ञान जुटाते हैं और आगे बाँटते हैं। स्वामी चंद्र उन्हें दूसरों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील बनाता है। सावधानी आलोचना को दिल पर लेने की है, और प्रतिष्ठा की अधिक चिंता की।
नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति बताता है, जो लाखों लोगों की एक ही होती है। इसे पूरी कुंडली के साथ विचार करने वाली प्रवृत्ति के रूप में पढ़ा जाता है — किसी व्यक्ति पर अंतिम निर्णय के रूप में नहीं।
मिलान
विवाह के लिए श्रवण नक्षत्र का मिलान
नाड़ी। श्रवण की नाड़ी अंत्य (कफ) है। जब दोनों के जन्म नक्षत्र की नाड़ी एक हो, तो गुण मिलान का नाड़ी कूट 8 में से 0 देता है (नाड़ी दोष); इन नक्षत्रों के साथ मिलान इसी कमी से शुरू होता है: कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, रेवती। कई परंपराएँ ऐसे अपवाद बताती हैं जिनमें दोष नहीं माना जाता; एक कूट के बजाय पूरा 36 गुण का मिलान देखें।
योनि। श्रवण की योनि वानर (बंदर) है। समान योनि — पूर्वाषाढ़ा — पूरे 4 में से 4 अंक देती है। इसकी शत्रु योनि मेष (भेड़) है, इसलिए कृत्तिका, पुष्य के साथ किसी भी दिशा में 4 में से 0 अंक मिलते हैं।
गण। श्रवण का गण देव है। गण कूट दिशा पर निर्भर है — अंक इस पर बदलते हैं कि वर कौन है — और ये इंजन के अपने मान हैं:
| साथी का गण | श्रवण वाला वर हो | श्रवण वाली वधू हो |
|---|---|---|
| देव | 6 / 6 | 6 / 6 |
| मनुष्य | 6 / 6 | 5 / 6 |
| राक्षस | 0 / 6 | 1 / 6 |
नाड़ी, योनि और गण 36 में से 18 अंक हैं; बाकी चंद्र राशियों और दोनों नक्षत्रों के बीच की गिनती से आते हैं। पूरा कुंडली मिलान · नाम से कुंडली मिलान · नक्षत्र पोरुथम
पंचांग गणना से
श्रवण नक्षत्र अगली बार कब है?
| से | तक |
|---|---|
| सोमवार, 19 अक्तूबर 2026, शाम 6:08 बजे | मंगलवार, 20 अक्तूबर 2026, रात 8:32 बजे |
| सोमवार, 16 नवंबर 2026, रात 1:59 बजे | मंगलवार, 17 नवंबर 2026, सुबह 4:47 बजे |
| रविवार, 13 दिसंबर 2026, सुबह 8:42 बजे | सोमवार, 14 दिसंबर 2026, सुबह 11:42 बजे |
समय सिंगापुर का है। चंद्रमा किसी नक्षत्र में हर जगह एक ही क्षण में प्रवेश करता और निकलता है, इसलिए दूसरा शहर चुनने से केवल घड़ी का समय बदलता है। चंद्रमा लगभग 27.3 दिन में उसी नक्षत्र में लौटता है और हर बार लगभग एक दिन रहता है।
प्रश्न
श्रवण नक्षत्र से जुड़े प्रश्न
श्रवण नक्षत्र किस राशि में है?
श्रवण मकर 10°00′ – मकर 23°20′ तक है। चारों पद मकर राशि में हैं।
श्रवण नक्षत्र का स्वामी कौन है?
चंद्र। विंशोत्तरी दशा जन्म नक्षत्र के स्वामी से शुरू होती है, इसलिए श्रवण में चंद्रमा रहते जन्मे व्यक्ति का जन्म चंद्र की महादशा में होता है; उसका कितना भाग बचा है, यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे जा चुका था।
श्रवण नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
हर पद का एक — पद 1: Khi / Ju; पद 2: Khu / Je; पद 3: Khe / Jo; पद 4: Kho / So। जन्म के समय चंद्रमा जिस पद में था, वही अक्षर लागू होता है।
श्रवण का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
गण देव, योनि वानर (बंदर) और नाड़ी अंत्य (कफ) — यही मान गुण मिलान में गिने जाते हैं।
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