स्वाति नक्षत्र

स्वाति 27 नक्षत्रों में 15वाँ नक्षत्र है, जो तुला 6°40′ – तुला 20°00′ तक फैला है। इसके स्वामी राहु हैं, देवता वायु, गण देव, योनि महिष (भैंस) और नाड़ी अंत्य (कफ)।

चंद्रमा अगली बार सोमवार, 12 अक्तूबर 2026, सुबह 4:02 बजे से मंगलवार, 13 अक्तूबर 2026, सुबह 5:22 बजे तक स्वाति नक्षत्र में रहेगा (सिडनी का समय)।

स्वाति नक्षत्र के स्वामी, देवता, गण, योनि और नाड़ी

अंशतुला 6°40′ – तुला 20°00′
राशितुला
स्वामी ग्रह (दशा स्वामी)राहु
देवतावायु
प्रतीकमूँगा / कोमल अंकुर
गणदेव
योनिमहिष (भैंस)
नाड़ीअंत्य (कफ)
तत्वअग्नि
मुहूर्त में स्वभावचर (चल)
गंडमूल नक्षत्रनहीं

चारों पद तुला राशि में हैं।

यहाँ तत्व नक्षत्र का अपना तत्व है, उसी पाँच-खंड क्रम में जो एस्ट्रोसेज भी छापता है (अश्विनी से मृगशिरा पृथ्वी, आर्द्रा से पूर्वा फाल्गुनी जल, उत्तरा फाल्गुनी से अनुराधा अग्नि, ज्येष्ठा से श्रवण वायु, धनिष्ठा से रेवती आकाश) — चंद्र राशि का तत्व नहीं।

स्वाति नक्षत्र के पद, नवांश और नामाक्षर

स्वाति नक्षत्र के नामाक्षर Ru, Re, Ro, Ta हैं — हर पद का एक। नामकरण की परंपरा में बच्चे का नाम उस पद की ध्वनि से शुरू किया जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, इसलिए अक्षर नक्षत्र से नहीं, पद से तय होता है।

पदअंशराशिनवांश (D9)नामाक्षरवर्ण (मिलान)
1तुला 6°40′ – तुला 10°00′तुलाधनुRuशूद्र
2तुला 10°00′ – तुला 13°20′तुलामकरReशूद्र
3तुला 13°20′ – तुला 16°40′तुलाकुंभRoशूद्र
4तुला 16°40′ – तुला 20°00′तुलामीनTaशूद्र

वर्ण हर पद के लिए दिया गया है, क्योंकि अष्टकूट मिलान चंद्र राशि का वर्ण गिनता है (जल राशियाँ ब्राह्मण, अग्नि क्षत्रिय, पृथ्वी वैश्य, वायु शूद्र)। कुछ तालिकाएँ नक्षत्र को भी अलग वर्ण देती हैं; वे सूचियाँ स्रोत-दर-स्रोत अलग हैं और मिलान में उनका उपयोग नहीं होता।

तुला राशि के नाम

स्वाति नक्षत्र के जातक की विशेषताएँ

स्वाति वायु देवता का नक्षत्र है और इसका प्रतीक कोमल अंकुर है, जो झुकता है पर टूटता नहीं। परंपरा इसे स्वतंत्रता और गतिशीलता का नक्षत्र मानती है: जातक को परिस्थिति के अनुसार ढलने वाला, कूटनीतिक, न्यायप्रिय और व्यापार, यात्रा तथा बातचीत में कुशल बताया जाता है, जिन्हें अपना रास्ता बनाने की जगह चाहिए। स्वामी राहु महत्वाकांक्षा जोड़ता है। सावधानी अनिर्णय की है — हर विकल्प तौलते-तौलते मौक़ा निकल जाना — और बंधन से अरुचि की।

नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति बताता है, जो लाखों लोगों की एक ही होती है। इसे पूरी कुंडली के साथ विचार करने वाली प्रवृत्ति के रूप में पढ़ा जाता है — किसी व्यक्ति पर अंतिम निर्णय के रूप में नहीं।

विवाह के लिए स्वाति नक्षत्र का मिलान

नाड़ी। स्वाति की नाड़ी अंत्य (कफ) है। जब दोनों के जन्म नक्षत्र की नाड़ी एक हो, तो गुण मिलान का नाड़ी कूट 8 में से 0 देता है (नाड़ी दोष); इन नक्षत्रों के साथ मिलान इसी कमी से शुरू होता है: कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती। कई परंपराएँ ऐसे अपवाद बताती हैं जिनमें दोष नहीं माना जाता; एक कूट के बजाय पूरा 36 गुण का मिलान देखें।

योनि। स्वाति की योनि महिष (भैंस) है। समान योनि — हस्त — पूरे 4 में से 4 अंक देती है। इसकी शत्रु योनि अश्व (घोड़ा) है, इसलिए अश्विनी, शतभिषा के साथ किसी भी दिशा में 4 में से 0 अंक मिलते हैं।

गण। स्वाति का गण देव है। गण कूट दिशा पर निर्भर है — अंक इस पर बदलते हैं कि वर कौन है — और ये इंजन के अपने मान हैं:

साथी का गणस्वाति वाला वर होस्वाति वाली वधू हो
देव6 / 66 / 6
मनुष्य6 / 65 / 6
राक्षस0 / 61 / 6

नाड़ी, योनि और गण 36 में से 18 अंक हैं; बाकी चंद्र राशियों और दोनों नक्षत्रों के बीच की गिनती से आते हैं। पूरा कुंडली मिलान · नाम से कुंडली मिलान · नक्षत्र पोरुथम

स्वाति नक्षत्र अगली बार कब है?

सेतक
सोमवार, 12 अक्तूबर 2026, सुबह 4:02 बजेमंगलवार, 13 अक्तूबर 2026, सुबह 5:22 बजे
रविवार, 8 नवंबर 2026, सुबह 11:22 बजेसोमवार, 9 नवंबर 2026, दोपहर 12:54 बजे
शनिवार, 5 दिसंबर 2026, शाम 5:19 बजेरविवार, 6 दिसंबर 2026, रात 7:08 बजे

समय सिडनी का है। चंद्रमा किसी नक्षत्र में हर जगह एक ही क्षण में प्रवेश करता और निकलता है, इसलिए दूसरा शहर चुनने से केवल घड़ी का समय बदलता है। चंद्रमा लगभग 27.3 दिन में उसी नक्षत्र में लौटता है और हर बार लगभग एक दिन रहता है।

आज कौन-सा नक्षत्र चल रहा है

स्वाति नक्षत्र से जुड़े प्रश्न

स्वाति नक्षत्र किस राशि में है?

स्वाति तुला 6°40′ – तुला 20°00′ तक है। चारों पद तुला राशि में हैं।

स्वाति नक्षत्र का स्वामी कौन है?

राहु। विंशोत्तरी दशा जन्म नक्षत्र के स्वामी से शुरू होती है, इसलिए स्वाति में चंद्रमा रहते जन्मे व्यक्ति का जन्म राहु की महादशा में होता है; उसका कितना भाग बचा है, यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे जा चुका था।

स्वाति नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?

हर पद का एक — पद 1: Ru; पद 2: Re; पद 3: Ro; पद 4: Ta। जन्म के समय चंद्रमा जिस पद में था, वही अक्षर लागू होता है।

स्वाति का गण, योनि और नाड़ी क्या है?

गण देव, योनि महिष (भैंस) और नाड़ी अंत्य (कफ) — यही मान गुण मिलान में गिने जाते हैं।

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