व्रत कैलेंडर · सिडनी
अगला प्रदोष व्रत कब है?
अगला प्रदोष व्रत — गुरु प्रदोष — गुरुवार, 8 अक्तूबर 2026 को है; प्रदोष पूजा 19:03 से 21:27 तक।
- यह तालिका सिडनी के लिए चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से इसी समय गणना की गई है — किसी छपे कैलेंडर से नकल नहीं की गई।
- हर तिथि का आरंभ और समाप्ति समय दिया गया है, ताकि आप दिन स्वयं जाँच सकें।
आने वाले बारह महीनों के प्रदोष व्रत
| तारीख | नाम | पक्ष | हिंदू माह (पूर्णिमांत) | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | प्रदोष पूजा का समय | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| गुरुवार, 8 अक्तूबर 2026 | गुरु प्रदोष | कृष्ण | आश्विन · अमांत भाद्रपद | 8 अक्टू, 04:47 | 9 अक्टू, 03:47 | 8 अक्टू, 19:03 → 21:27 | — |
| शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026 | शुक्र प्रदोष | शुक्ल | आश्विन | 23 अक्टू, 20:07 | 24 अक्टू, 19:07 | 23 अक्टू, 20:07 → 21:39 | — |
| शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | शुक्र प्रदोष | कृष्ण | कार्तिक · अमांत आश्विन | 6 नव, 16:01 | 7 नव, 16:18 | 6 नव, 19:27 → 21:51 | — |
| रविवार, 22 नवंबर 2026 | रवि प्रदोष | शुक्ल | कार्तिक | 22 नव, 10:27 | 23 नव, 08:07 | 22 नव, 19:42 → 22:06 | — |
| रविवार, 6 दिसंबर 2026 | रवि प्रदोष | कृष्ण | मार्गशीर्ष · अमांत कार्तिक | 6 दिस, 06:23 | 7 दिस, 07:53 | 6 दिस, 19:55 → 22:19 | — |
| सोमवार, 21 दिसंबर 2026 | सोम प्रदोष | शुक्ल | मार्गशीर्ष | 21 दिस, 23:07 | 22 दिस, 19:54 | — | त्रयोदशी दोनों शाम प्रदोष के मध्य बिंदु पर नहीं है; जिस शाम आरंभ होती है उसी शाम व्रत |
| मंगलवार, 5 जनवरी 2027 | भौम प्रदोष | कृष्ण | पौष · अमांत मार्गशीर्ष | 4 जन, 23:46 | 6 जन, 02:10 | 5 जन, 20:10 → 22:34 | — |
| बुधवार, 20 जनवरी 2027 | बुध प्रदोष | शुक्ल | पौष | 20 जन, 10:12 | 21 जन, 06:42 | 20 जन, 20:07 → 22:31 | — |
| गुरुवार, 4 फ़रवरी 2027 | गुरु प्रदोष | कृष्ण | माघ · अमांत पौष | 3 फ़र, 19:21 | 4 फ़र, 22:02 | 4 फ़र, 19:58 → 22:02 | त्रयोदशी बुधवार, 3 फ़रवरी 2027 के प्रदोष में भी है; व्रत दूसरी शाम दिया गया है, जब वह सूर्यास्त से ही चल रही हो |
| गुरुवार, 18 फ़रवरी 2027 | गुरु प्रदोष | शुक्ल | माघ | 18 फ़र, 19:58 | 19 फ़र, 16:44 | 18 फ़र, 19:58 → 22:09 | — |
| शुक्रवार, 5 मार्च 2027 | शुक्र प्रदोष | कृष्ण | फाल्गुन · अमांत माघ | 5 मार्च, 15:24 | 6 मार्च, 17:34 | 5 मार्च, 19:27 → 21:51 | — |
| शनिवार, 20 मार्च 2027 | शनि प्रदोष | शुक्ल | फाल्गुन | 20 मार्च, 04:48 | 21 मार्च, 02:16 | 20 मार्च, 19:07 → 21:31 | — |
| रविवार, 4 अप्रैल 2027 | रवि प्रदोष | कृष्ण | चैत्र · अमांत फाल्गुन | 4 अप्रै, 08:57 | 5 अप्रै, 09:53 | 4 अप्रै, 17:47 → 20:11 | — |
| रविवार, 18 अप्रैल 2027 | रवि प्रदोष | शुक्ल | चैत्र | 18 अप्रै, 12:13 | 19 अप्रै, 10:39 | 18 अप्रै, 17:29 → 19:53 | — |
| मंगलवार, 4 मई 2027 | भौम प्रदोष | कृष्ण | वैशाख · अमांत चैत्र | 4 मई, 00:34 | 5 मई, 00:01 | 4 मई, 17:12 → 19:36 | — |
| मंगलवार, 18 मई 2027 | भौम प्रदोष | शुक्ल | वैशाख | 17 मई, 20:58 | 18 मई, 20:34 | 18 मई, 17:01 → 19:25 | — |
| बुधवार, 2 जून 2027 | बुध प्रदोष | कृष्ण | ज्येष्ठ · अमांत वैशाख | 2 जून, 12:59 | 3 जून, 11:05 | 2 जून, 16:54 → 19:18 | — |
| बुधवार, 16 जून 2027 | बुध प्रदोष | शुक्ल | ज्येष्ठ | 16 जून, 07:02 | 17 जून, 07:50 | 16 जून, 16:53 → 19:17 | — |
| शुक्रवार, 2 जुलाई 2027 | शुक्र प्रदोष | कृष्ण | आषाढ़ · अमांत ज्येष्ठ | 1 जुला, 22:45 | 2 जुला, 19:53 | 2 जुला, 16:57 → 19:21 | — |
| शुक्रवार, 16 जुलाई 2027 | शुक्र प्रदोष | शुक्ल | आषाढ़ | 15 जुला, 19:11 | 16 जुला, 21:05 | 16 जुला, 17:04 → 19:28 | — |
| शनिवार, 31 जुलाई 2027 | शनि प्रदोष | कृष्ण | श्रावण · अमांत आषाढ़ | 31 जुला, 06:48 | 1 अग, 03:28 | 31 जुला, 17:14 → 19:38 | — |
| शनिवार, 14 अगस्त 2027 | शनि प्रदोष | शुक्ल | श्रावण | 14 अग, 09:52 | 15 अग, 12:24 | 14 अग, 17:24 → 19:48 | — |
| रविवार, 29 अगस्त 2027 | रवि प्रदोष | कृष्ण | भाद्रपद · अमांत श्रावण | 29 अग, 14:06 | 30 अग, 10:43 | 29 अग, 17:35 → 19:59 | — |
| सोमवार, 13 सितंबर 2027 | सोम प्रदोष | शुक्ल | भाद्रपद | 13 सित, 02:43 | 14 सित, 05:10 | 13 सित, 17:45 → 20:09 | — |
| सोमवार, 27 सितंबर 2027 | सोम प्रदोष | कृष्ण | आश्विन · अमांत भाद्रपद | 27 सित, 21:26 | 28 सित, 18:25 | — | त्रयोदशी दोनों शाम प्रदोष के मध्य बिंदु पर नहीं है; जिस शाम आरंभ होती है उसी शाम व्रत |
समय सिडनी के अनुसार हैं। टिप्पणी के स्तंभ में उन दिनों का उल्लेख है जब सामान्य नियम से दिन अपने आप तय नहीं हुआ — जब तिथि दो दिन अपने निर्णायक समय पर रही, या किसी भी दिन नहीं — और यह भी कि इस पृष्ठ ने कौन-सा दिन लिया।
वर्ष के अनुसार प्रदोष व्रत
सोम, भौम और शनि प्रदोष
- सोम प्रदोष — सोमवार, 21 दिसंबर 2026; सोमवार, 13 सितंबर 2027; सोमवार, 27 सितंबर 2027
- भौम प्रदोष — मंगलवार, 5 जनवरी 2027; मंगलवार, 4 मई 2027; मंगलवार, 18 मई 2027
- शनि प्रदोष — शनिवार, 20 मार्च 2027; शनिवार, 31 जुलाई 2027; शनिवार, 14 अगस्त 2027
प्रदोष व्रत की तिथि कैसे तय होती है
प्रदोष व्रत दोनों पक्षों की त्रयोदशी को रखा जाता है — पर उसका दिन सूर्योदय से नहीं, शाम से तय होता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का संध्या समय है; यह पृष्ठ उसे सूर्यास्त से तीन मुहूर्त (2 घंटे 24 मिनट) मानता है और देखता है कि उसके मध्य में त्रयोदशी चल रही है या नहीं। इसीलिए प्रदोष अक्सर उस दिन से एक दिन पहले पड़ता है जिस दिन त्रयोदशी सूर्योदय पर होती है। जब त्रयोदशी दो शाम प्रदोष काल में हो, तो व्रत दूसरी शाम दिया गया है, जब वह सूर्यास्त से ही चल रही हो; जब वह दोनों शाम मध्य बिंदु पर न हो, तो व्रत उस शाम रखा जाता है जिस शाम वह आरंभ होती है। हर प्रदोष का नाम उसके वार से है; सोम, भौम (मंगल) और शनि प्रदोष का विशेष महत्व माना जाता है। दिया गया पूजा समय प्रदोष काल का वही भाग है जिसमें त्रयोदशी सचमुच चल रही हो, इसलिए वह 2 घंटे 24 मिनट से छोटा भी हो सकता है।
दूसरे शहरों में प्रदोष व्रत
दिन तय करने वाला समय — सूर्योदय, शाम का प्रदोष या चंद्रोदय — भारत में एक घंटे से भी अधिक बदलता है, इसलिए दो शहरों में केवल समय ही नहीं, दिन भी अलग हो सकता है।
यह तालिका आपके चुने शहर के लिए फिर से गणना होती है। ये लिंक इसी पृष्ठ के रूप हैं: हर एक ऊपर के पते पर canonical रखता है और खोज इंजनों से अनुक्रमित न करने को कहता है।
प्रदोष व्रत: सामान्य प्रश्न
अगला प्रदोष व्रत कब है?
गुरुवार, 8 अक्तूबर 2026 — गुरु प्रदोष; प्रदोष पूजा 19:03 से 21:27 तक।
सोम प्रदोष कब है?
सोमवार, 21 दिसंबर 2026; सोमवार, 13 सितंबर 2027; सोमवार, 27 सितंबर 2027।
शनि प्रदोष कब है?
शनिवार, 20 मार्च 2027; शनिवार, 31 जुलाई 2027; शनिवार, 14 अगस्त 2027।
प्रदोष काल क्या है?
सूर्यास्त के बाद का संध्या समय, जिसे यहाँ सूर्यास्त से तीन मुहूर्त (2 घंटे 24 मिनट) माना गया है। व्रत उस दिन होता है जिस दिन इसके मध्य में त्रयोदशी चल रही हो, और पूजा का समय इसी काल का वह भाग है जिसमें त्रयोदशी हो।
प्रदोष त्रयोदशी से एक दिन पहले क्यों पड़ता है?
क्योंकि प्रदोष शाम से तय होता है, सूर्योदय से नहीं। त्रयोदशी अक्सर दोपहर या शाम को आरंभ होती है, इसलिए उस शाम प्रदोष में वही चल रही होती है, जबकि सूर्योदय वाला पंचांग अगले दिन को त्रयोदशी कहता है।
क्या प्रदोष व्रत पूरे भारत में एक ही दिन होता है?
हमेशा नहीं। दिन सूर्योदय, सूर्यास्त या चंद्रोदय से तय होता है, और ये तीनों शहर के अनुसार बदलते हैं — इसलिए सिडनी और किसी दूर के शहर में दिन भी अलग हो सकता है। ऊपर शहर बदलकर पूरी तालिका फिर से गणना होती है।