कृष्ण के 108 नाम, अर्थ सहित
श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामावलिः में कृष्ण के 108 नाम हैं, और हर नाम किसी गुण, लीला या रूप की याद दिलाता है। नीचे हर नाम उसके लिप्यंतरण और इस साइट के लिए लिखे संक्षिप्त अर्थ के साथ है।
कृष्ण के सभी 108 नाम, अर्थ सहित
उसी क्रम में जिसमें पाठ होता है। पहले कॉलम में नाम और अर्पण की पंक्ति है, दूसरे में उसका लिप्यंतरण।
| क्र. | नाम (संस्कृत) | लिप्यंतरण | अर्थ |
|---|---|---|---|
| 1 | श्रीकृष्ण ॐ श्रीकृष्णाय नमः | Shrikrishna Om Shrikrishnaya Namah | श्यामवर्ण भगवान श्रीकृष्ण |
| 2 | कमलानाथ ॐ कमलानाथाय नमः | Kamalanatha Om Kamalanathaya Namah | कमला यानी लक्ष्मी के स्वामी |
| 3 | वासुदेव ॐ वासुदेवाय नमः | Vasudeva Om Vasudevaya Namah | वसुदेवनंदन, जिनमें सारा जगत बसता है |
| 4 | सनातन ॐ सनातनाय नमः | Sanatana Om Sanatanaya Namah | सदा से विद्यमान, शाश्वत प्रभु |
| 5 | वसुदेवात्मज ॐ वसुदेवात्मजाय नमः | Vasudevatmaja Om Vasudevatmajaya Namah | वसुदेव के पुत्र रूप में जन्मे |
| 6 | पुण्य ॐ पुण्याय नमः | Punya Om Punyaya Namah | पवित्र और पावन करने वाले |
| 7 | लीलामानुषविग्रह ॐ लीलामानुषविग्रहाय नमः | Lilamanushavigraha Om Lilamanushavigrahaya Namah | लीला के लिए मनुष्य रूप धारण करने वाले |
| 8 | श्रीवत्सकौस्तुभधर ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः | Shrivatsakaustubhadhara Om Shrivatsakaustubhadharaya Namah | श्रीवत्स चिह्न और कौस्तुभ मणि धारण करने वाले |
| 9 | यशोदावत्सल ॐ यशोदावत्सलाय नमः | Yashodavatsala Om Yashodavatsalaya Namah | माता यशोदा के लाडले |
| 10 | हरि ॐ हरये नमः | Hari Om Haraye Namah | पाप और दुख हरने वाले हरि |
| 11 | चतुर्भुजात्तचक्रासिगदाशङ्खाद्युदायुध ॐ चतुर्भुजात्तचक्रासिगदाशङ्खाद्युदायुधाय नमः | Chaturbhujattachakrasigadashankhadyudayudha Om Chaturbhujattachakrasigadashankhadyudayudhaya Namah | चार भुजाओं में चक्र, खड्ग, गदा, शंख आदि आयुध उठाए हुए |
| 12 | देवकीनन्दन ॐ देवकीनन्दनाय नमः | Devakinandana Om Devakinandanaya Namah | देवकी के पुत्र, देवकी को आनंद देने वाले |
| 13 | श्रीश ॐ श्रीशाय नमः | Shrisha Om Shrishaya Namah | श्री यानी लक्ष्मी के स्वामी |
| 14 | नन्दगोपप्रियात्मज ॐ नन्दगोपप्रियात्मजाय नमः | Nandagopapriyatmaja Om Nandagopapriyatmajaya Namah | ग्वाले नंद के प्यारे पुत्र |
| 15 | यमुनावेगसंहारी ॐ यमुनावेगसंहारिणे नमः | Yamunavegasamhari Om Yamunavegasamharine Namah | यमुना के तेज़ बहाव को थाम लेने वाले |
| 16 | बलभद्रप्रियानुज ॐ बलभद्रप्रियानुजाय नमः | Balabhadrapriyanuja Om Balabhadrapriyanujaya Namah | बलभद्र (बलराम) के प्रिय छोटे भाई |
| 17 | पूतनाजीवितहर ॐ पूतनाजीवितहराय नमः | Putanajivitahara Om Putanajivitaharaya Namah | राक्षसी पूतना के प्राण हरने वाले |
| 18 | शकटासुरभञ्जन ॐ शकटासुरभञ्जनाय नमः | Shakatasurabhanjana Om Shakatasurabhanjanaya Namah | छकड़े का रूप लिए शकटासुर को तोड़ने वाले |
| 19 | नन्दव्रजजनानन्दी ॐ नन्दव्रजजनानन्दिने नमः | Nandavrajajananandi Om Nandavrajajananandine Namah | नंद के व्रज के लोगों को आनंद देने वाले |
| 20 | सच्चिदानन्दविग्रह ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः | Sachchidanandavigraha Om Sachchidanandavigrahaya Namah | सत्, चित् और आनंद स्वरूप देह वाले |
| 21 | नवनीतविलिप्ताङ्ग ॐ नवनीतविलिप्ताङ्गाय नमः | Navanitaviliptanga Om Navanitaviliptangaya Namah | मक्खन से सने अंगों वाले |
| 22 | नवनीतनट ॐ नवनीतनटाय नमः | Navanitanata Om Navanitanataya Namah | मक्खन के लिए नाचने वाले नटखट बालक |
| 23 | अनघ ॐ अनघाय नमः | Anagha Om Anaghaya Namah | निष्पाप और निर्मल प्रभु |
| 24 | नवनीतनवाहारी ॐ नवनीतनवाहारिणे नमः | Navanitanavahari Om Navanitanavaharine Namah | ताज़ा मक्खन खाने वाले |
| 25 | मुचुकुन्दप्रसादक ॐ मुचुकुन्दप्रसादकाय नमः | Muchukundaprasadaka Om Muchukundaprasadakaya Namah | राजा मुचुकुंद पर कृपा करने वाले |
| 26 | षोडशस्त्रीसहस्रेश ॐ षोडशस्त्रीसहस्रेशाय नमः | Shodashastrisahasresha Om Shodashastrisahasreshaya Namah | सोलह हज़ार रानियों के स्वामी |
| 27 | त्रिभङ्गिमधुराकृति ॐ त्रिभङ्गिमधुराकृतये नमः | Tribhangimadhurakriti Om Tribhangimadhurakritaye Namah | त्रिभंगी मुद्रा में खड़े, मनोहर रूप वाले |
| 28 | शुकवागमृताब्धीन्दु ॐ शुकवागमृताब्धीन्दवे नमः | Shukavagamritabdhindu Om Shukavagamritabdhindave Namah | शुकदेव की अमृत-वाणी रूपी सागर से उदित चंद्रमा |
| 29 | गोविन्द ॐ गोविन्दाय नमः | Govinda Om Govindaya Namah | गायों का पालन और रक्षा करने वाले गोविंद |
| 30 | गोविदाम्पति ॐ गोविदाम्पतये नमः | Govidampati Om Govidampataye Namah | गौ (गायों या वेदवाणी) के ज्ञाताओं के स्वामी |
| 31 | वत्सवाटचर ॐ वत्सवाटचराय नमः | Vatsavatachara Om Vatsavatacharaya Namah | बछड़ों के बाड़ों में विचरने वाले |
| 32 | अनन्त ॐ अनन्ताय नमः | Ananta Om Anantaya Namah | जिनका कोई अंत नहीं, अनंत |
| 33 | धेनुकासुरभञ्जन ॐ धेनुकासुरभञ्जनाय नमः | Dhenukasurabhanjana Om Dhenukasurabhanjanaya Namah | धेनुकासुर का नाश करने वाले |
| 34 | तृणीकृततृणावर्त ॐ तृणीकृततृणावर्ताय नमः | Trinikritatrinavarta Om Trinikritatrinavartaya Namah | बवंडर रूपी असुर तृणावर्त को तिनके जैसा तुच्छ कर देने वाले |
| 35 | यमलार्जुनभञ्जन ॐ यमलार्जुनभञ्जनाय नमः | Yamalarjunabhanjana Om Yamalarjunabhanjanaya Namah | जुड़वाँ अर्जुन वृक्षों को तोड़ने वाले |
| 36 | उत्तालतालभेत्ता ॐ उत्तालतालभेत्रे नमः | Uttalatalabhetta Om Uttalatalabhetre Namah | ऊँचे ताड़ के पेड़ों को गिराने वाले |
| 37 | तमालश्यामलाकृति ॐ तमालश्यामलाकृतये नमः | Tamalashyamalakriti Om Tamalashyamalakritaye Namah | तमाल वृक्ष जैसे श्यामल रूप वाले |
| 38 | गोपगोपीश्वर ॐ गोपगोपीश्वराय नमः | Gopagopishvara Om Gopagopishvaraya Namah | गोपों और गोपियों के स्वामी |
| 39 | योगी ॐ योगिने नमः | Yogi Om Yogine Namah | योग के स्वामी, महायोगी |
| 40 | कोटिसूर्यसमप्रभ ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमः | Kotisuryasamaprabha Om Kotisuryasamaprabhaya Namah | करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी |
| 41 | इलापति ॐ इलापतये नमः | Ilapati Om Ilapataye Namah | पृथ्वी के स्वामी |
| 42 | परं ज्योतिः ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः | Param Jyotih Om Parasmai Jyotishe Namah | सर्वोच्च ज्योति स्वरूप |
| 43 | यादवेन्द्र ॐ यादवेन्द्राय नमः | Yadavendra Om Yadavendraya Namah | यादवों के राजा |
| 44 | यदूद्वह ॐ यदूद्वहाय नमः | Yadudvaha Om Yadudvahaya Namah | यदुवंश को धारण करने वाले, यदुश्रेष्ठ |
| 45 | वनमाली ॐ वनमालिने नमः | Vanamali Om Vanamaline Namah | वनफूलों की माला पहनने वाले |
| 46 | पीतवासाः ॐ पीतवाससे नमः | Pitavasah Om Pitavasase Namah | पीले वस्त्र (पीतांबर) धारण करने वाले |
| 47 | पारिजातापहारक ॐ पारिजातापहारकाय नमः | Parijatapaharaka Om Parijatapaharakaya Namah | स्वर्ग का पारिजात वृक्ष ले आने वाले |
| 48 | गोवर्धनाचलोद्धर्ता ॐ गोवर्धनाचलोद्धर्त्रे नमः | Govardhanachaloddharta Om Govardhanachaloddhartre Namah | गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले |
| 49 | गोपाल ॐ गोपालाय नमः | Gopala Om Gopalaya Namah | गायों के पालक, ग्वाले गोपाल |
| 50 | सर्वपालक ॐ सर्वपालकाय नमः | Sarvapalaka Om Sarvapalakaya Namah | सबका पालन करने वाले |
| 51 | अज ॐ अजाय नमः | Aja Om Ajaya Namah | जिनका जन्म नहीं होता, अजन्मा |
| 52 | निरञ्जन ॐ निरञ्जनाय नमः | Niranjana Om Niranjanaya Namah | निर्मल और दोषरहित प्रभु |
| 53 | कामजनक ॐ कामजनकाय नमः | Kamajanaka Om Kamajanakaya Namah | प्रेम के देवता कामदेव के पिता |
| 54 | कञ्जलोचन ॐ कञ्जलोचनाय नमः | Kanjalochana Om Kanjalochanaya Namah | कमल जैसे नेत्रों वाले |
| 55 | मधुहा ॐ मधुघ्ने नमः | Madhuha Om Madhughne Namah | मधु नामक दैत्य का वध करने वाले |
| 56 | मथुरानाथ ॐ मथुरानाथाय नमः | Mathuranatha Om Mathuranathaya Namah | मथुरा नगरी के स्वामी |
| 57 | द्वारकानायक ॐ द्वारकानायकाय नमः | Dvarakanayaka Om Dvarakanayakaya Namah | द्वारका नगरी के अधिपति |
| 58 | बली ॐ बलिने नमः | Bali Om Baline Namah | महान बल वाले, बलशाली |
| 59 | वृन्दावनान्तसञ्चारी ॐ वृन्दावनान्तसञ्चारिणे नमः | Vrindavanantasanchari Om Vrindavanantasancharine Namah | वृंदावन के भीतर विचरने वाले |
| 60 | तुलसीदामभूषण ॐ तुलसीदामभूषणाय नमः | Tulasidamabhushana Om Tulasidamabhushanaya Namah | तुलसी की माला से सजे हुए |
| 61 | स्यमन्तकमणेर्हर्ता ॐ स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे नमः | Syamantakamanerharta Om Syamantakamanerhartre Namah | स्यमंतक मणि को वापस लाने वाले |
| 62 | नरनारायणात्मक ॐ नरनारायणात्मकाय नमः | Naranarayanatmaka Om Naranarayanatmakaya Namah | नर और नारायण स्वरूप |
| 63 | कुब्जाकृष्णाम्बरधर ॐ कुब्जाकृष्णाम्बरधराय नमः | Kubjakrishnambaradhara Om Kubjakrishnambaradharaya Namah | कुब्जा प्रसंग से जुड़े, श्याम वस्त्र धारण करने वाले |
| 64 | मायी ॐ मायिने नमः | Mayi Om Mayine Namah | दिव्य माया के स्वामी |
| 65 | परमपूरुष ॐ परमपूरुषाय नमः | Paramapurusha Om Paramapurushaya Namah | सबसे श्रेष्ठ परम पुरुष |
| 66 | मुष्टिकासुरचाणूरमल्लयुद्धविशारद ॐ मुष्टिकासुरचाणूरमल्लयुद्धविशारदाय नमः | Mushtikasurachanuramallayuddhavisharada Om Mushtikasurachanuramallayuddhavisharadaya Namah | मुष्टिक और चाणूर के साथ मल्लयुद्ध में निपुण |
| 67 | संसारवैरी ॐ संसारवैरिणे नमः | Samsaravairi Om Samsaravairine Namah | जन्म-मरण के चक्र (संसार) के शत्रु |
| 68 | कंसारि ॐ कंसारये नमः | Kamsari Om Kamsaraye Namah | कंस के शत्रु |
| 69 | मुरारि ॐ मुरारये नमः | Murari Om Muraraye Namah | मुर नामक दैत्य के शत्रु |
| 70 | नरकान्तक ॐ नरकान्तकाय नमः | Narakantaka Om Narakantakaya Namah | नरकासुर का अंत करने वाले |
| 71 | अनादिब्रह्मचारी ॐ अनादिब्रह्मचारिणे नमः | Anadibrahmachari Om Anadibrahmacharine Namah | अनादि और सदा ब्रह्मचारी |
| 72 | कृष्णाव्यसनकर्षक ॐ कृष्णाव्यसनकर्षकाय नमः | Krishnavyasanakarshaka Om Krishnavyasanakarshakaya Namah | द्रौपदी (कृष्णा) का संकट दूर करने वाले |
| 73 | शिशुपालशिरश्छेत्ता ॐ शिशुपालशिरश्छेत्रे नमः | Shishupalashirashchhetta Om Shishupalashirashchhetre Namah | शिशुपाल का सिर काटने वाले |
| 74 | दुर्योधनकुलान्तक ॐ दुर्योधनकुलान्तकाय नमः | Duryodhanakulantaka Om Duryodhanakulantakaya Namah | दुर्योधन के कुल का अंत करने वाले |
| 75 | विदुराक्रूरवरद ॐ विदुराक्रूरवरदाय नमः | Vidurakruravarada Om Vidurakruravaradaya Namah | विदुर और अक्रूर को वर देने वाले |
| 76 | विश्वरूपप्रदर्शक ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नमः | Vishvarupapradarshaka Om Vishvarupapradarshakaya Namah | अपना विराट विश्वरूप दिखाने वाले |
| 77 | सत्यवाक् ॐ सत्यवाचे नमः | Satyavak Om Satyavache Namah | सदा सत्य वचन बोलने वाले |
| 78 | सत्यसङ्कल्प ॐ सत्यसङ्कल्पाय नमः | Satyasankalpa Om Satyasankalpaya Namah | जिनका संकल्प सदा सत्य होता है |
| 79 | सत्यभामारत ॐ सत्यभामारताय नमः | Satyabhamarata Om Satyabhamarataya Namah | सत्यभामा से प्रेम करने वाले |
| 80 | जयी ॐ जयिने नमः | Jayi Om Jayine Namah | सदा विजय पाने वाले |
| 81 | सुभद्रापूर्वज ॐ सुभद्रापूर्वजाय नमः | Subhadrapurvaja Om Subhadrapurvajaya Namah | सुभद्रा के बड़े भाई |
| 82 | जिष्णु ॐ जिष्णवे नमः | Jishnu Om Jishnave Namah | जीतने वाले, जिष्णु |
| 83 | भीष्ममुक्तिप्रदायक ॐ भीष्ममुक्तिप्रदायकाय नमः | Bhishmamuktipradayaka Om Bhishmamuktipradayakaya Namah | भीष्म को मुक्ति देने वाले |
| 84 | जगद्गुरु ॐ जगद्गुरवे नमः | Jagadguru Om Jagadgurave Namah | सारे जगत के गुरु |
| 85 | जगन्नाथ ॐ जगन्नाथाय नमः | Jagannatha Om Jagannathaya Namah | समस्त जगत के स्वामी |
| 86 | वेणुनादविशारद ॐ वेणुनादविशारदाय नमः | Venunadavisharada Om Venunadavisharadaya Namah | बाँसुरी बजाने में निपुण |
| 87 | वृषभासुरविध्वंसी ॐ वृषभासुरविध्वंसिने नमः | Vrishabhasuravidhvamsi Om Vrishabhasuravidhvamsine Namah | बैल रूपी असुर वृषभासुर का नाश करने वाले |
| 88 | बाणासुरकरान्तक ॐ बाणासुरकरान्तकाय नमः | Banasurakarantaka Om Banasurakarantakaya Namah | बाणासुर की भुजाएँ काट डालने वाले |
| 89 | युधिष्ठिरप्रतिष्ठाता ॐ युधिष्ठिरप्रतिष्ठात्रे नमः | Yudhishthirapratishthata Om Yudhishthirapratishthatre Namah | युधिष्ठिर को राजसिंहासन पर स्थापित करने वाले |
| 90 | बर्हिबर्हावतंसक ॐ बर्हिबर्हावतंसकाय नमः | Barhibarhavatamsaka Om Barhibarhavatamsakaya Namah | मोरपंख को मुकुट का आभूषण बनाने वाले |
| 91 | पार्थसारथि ॐ पार्थसारथये नमः | Parthasarathi Om Parthasarathaye Namah | पार्थ यानी अर्जुन के सारथी |
| 92 | अव्यक्त ॐ अव्यक्ताय नमः | Avyakta Om Avyaktaya Namah | इंद्रियों से परे, अव्यक्त |
| 93 | गीतामृतमहोदधि ॐ गीतामृतमहोदधये नमः | Gitamritamahodadhi Om Gitamritamahodadhaye Namah | गीता रूपी अमृत के महासागर |
| 94 | कालीयफणिमाणिक्यरञ्जितश्रीपदाम्बुज ॐ कालीयफणिमाणिक्यरञ्जितश्रीपदाम्बुजाय नमः | Kaliyaphanimanikyaranjitashripadambuja Om Kaliyaphanimanikyaranjitashripadambujaya Namah | जिनके चरणकमल कालिय नाग के फनों की मणियों से चमक उठे |
| 95 | दामोदर ॐ दामोदराय नमः | Damodara Om Damodaraya Namah | जिनके उदर को यशोदा ने रस्सी से बाँधा, दामोदर |
| 96 | यज्ञभोक्ता ॐ यज्ञभोक्त्रे नमः | Yajnabhokta Om Yajnabhoktre Namah | यज्ञ की आहुतियाँ ग्रहण करने वाले |
| 97 | दानवेन्द्रविनाशक ॐ दानवेन्द्रविनाशकाय नमः | Danavendravinashaka Om Danavendravinashakaya Namah | दानवों के राजाओं का विनाश करने वाले |
| 98 | नारायण ॐ नारायणाय नमः | Narayana Om Narayanaya Namah | सब प्राणियों के आश्रय नारायण |
| 99 | परं ब्रह्म ॐ परस्मै ब्रह्मणे नमः | Param Brahma Om Parasmai Brahmane Namah | सर्वोच्च ब्रह्म, परब्रह्म स्वरूप |
| 100 | पन्नगाशनवाहन ॐ पन्नगाशनवाहनाय नमः | Pannagashanavahana Om Pannagashanavahanaya Namah | सर्पभक्षी गरुड़ को वाहन बनाने वाले |
| 101 | जलक्रीडासमासक्तगोपीवस्त्रापहारक ॐ जलक्रीडासमासक्तगोपीवस्त्रापहारकाय नमः | Jalakridasamasaktagopivastrapaharaka Om Jalakridasamasaktagopivastrapaharakaya Namah | जलक्रीड़ा में मग्न गोपियों के वस्त्र उठा ले जाने वाले |
| 102 | पुण्यश्लोक ॐ पुण्यश्लोकाय नमः | Punyashloka Om Punyashlokaya Namah | पवित्र और प्रशंसनीय कीर्ति वाले |
| 103 | तीर्थपाद ॐ तीर्थपादाय नमः | Tirthapada Om Tirthapadaya Namah | जिनके चरण तीर्थ के समान पवित्र हैं |
| 104 | वेदवेद्य ॐ वेदवेद्याय नमः | Vedavedya Om Vedavedyaya Namah | वेदों के द्वारा जाने जाने वाले |
| 105 | दयानिधि ॐ दयानिधये नमः | Dayanidhi Om Dayanidhaye Namah | दया के भंडार |
| 106 | सर्वतीर्थात्मक ॐ सर्वतीर्थात्मकाय नमः | Sarvatirthatmaka Om Sarvatirthatmakaya Namah | सभी तीर्थों के स्वरूप |
| 107 | सर्वग्रहरूपी ॐ सर्वग्रहरूपिणे नमः | Sarvagraharupi Om Sarvagraharupine Namah | सभी ग्रहों का रूप धारण करने वाले |
| 108 | परात्पर ॐ परात्पराय नमः | Paratpara Om Paratparaya Namah | परे से भी परे, सर्वोच्च |
कृष्ण के 108 नामों का पाठ कैसे होता है
- स्नान के बाद, हो सके तो कृष्ण के चित्र के सामने, या बस पूर्व की ओर मुख करके बैठें।
- हर पंक्ति बारी-बारी से बोलें — ॐ, नाम, नमः — और अर्चना कर रहे हों तो हर नाम के साथ एक फूल, पत्ता या कुछ अक्षत अर्पित करें।
- गति एक-सी रखें। ध्यान से बोला गया नाम ही इस साधना का सार है, तेज़ी नहीं।
- अंत में कुछ क्षण मौन रहें, और आरती करें यदि वह आपकी पूजा का अंग है।
कृष्ण के 108 नामों की इस सूची का स्रोत
श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामावलिः — यह नामावली श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र ('श्रीकृष्णः कमलानाथो वासुदेवः सनातनः', जिसे शेष पृथ्वी को सुनाते हैं) से ली गई है। sanskritdocuments.org और vignanam.org की पुष्पिका इस स्तोत्र को नारदपञ्चरात्र (vignanam के अनुसार ज्ञानामृतसार, चतुर्थ रात्र) का बताती है; यही स्तोत्र संस्कृत विकिस्रोत पर छपे ब्रह्माण्डपुराण, मध्यभाग, अध्याय 36 (श्लोक 21–41) में भी मिलता है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक और सार्वजनिक है। हमने दो स्वतंत्र रूप से प्रकाशित संस्करणों को नाम-दर-नाम मिलाया और हर अंतर को तीसरे स्रोत से तय किया; संस्करण नीचे दिए हैं। अर्थ इस साइट के लिए लिखे गए हैं।
- vignanam.org — श्री कृष्णाष्टोत्तर शत नामावलि
- sanskritdocuments.org — श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामावलिः १
जहाँ संस्करणों में अंतर है, वहाँ यह पेज अधिकांश स्रोतों का पाठ अपनाता है; दूसरा पाठ साथ में दिया है:
- 1. श्रीकृष्णाय — पाठांतर कृष्णाय
- 17. पूतनाजीवितहराय — पाठांतर पूतनाजीवितापहराय
- 24. नवनीतनवाहारिणे — पाठांतर नवनीतनवाहाराय, नवनीतलवाहारिणे
- 30. गोविदाम्पतये — पाठांतर योगिनाम्पतये / योगिनां पतये
- 31. वत्सवाटचराय — पाठांतर वत्सवाटीचराय, वत्सवादहराय, वत्सपालनसञ्चारिणे
- 42. परस्मै ज्योतिषे — पाठांतर परञ्ज्योतिषे
- 56. मथुरानाथाय — पाठांतर मधुरानाथाय
- 63. कुब्जाकृष्णाम्बरधराय — पाठांतर कुब्जाकृष्टाम्बरधराय
- 72. कृष्णाव्यसनकर्षकाय — पाठांतर कृष्णाव्यसनकर्शकाय
- 82. जिष्णवे — पाठांतर विष्णवे
- 88. बाणासुरकरान्तकाय — पाठांतर बाणासुरबलान्तकाय
- 97. दानवेन्द्रविनाशकाय — पाठांतर दानवेन्द्रविनाशनाय
- 103. तीर्थपादाय — पाठांतर तीर्थकराय
- 108. परात्पराय — पाठांतर परात्परस्मै
एक छोटा अर्थ किसी नाम का पूरा भाव नहीं समेट सकता; जहाँ किसी नाम के कई अर्थ हैं, वहाँ सबसे प्रचलित दिया गया है।
कृष्ण के 108 नाम: सामान्य प्रश्न
श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामावलिः क्या है?
कृष्ण के 108 नामों की पारंपरिक सूची। पूजा में हर नाम 'ॐ … नमः' — 'ॐ, … को नमस्कार' — के रूप में अर्पित होता है, प्रायः हर नाम के साथ एक फूल या कुछ अक्षत।
कृष्ण के 108 नामों का पाठ कितनी बार किया जाता है?
कोई तय नियम नहीं है। बहुत से लोग रोज़ सुबह की पूजा में इनका पाठ करते हैं; कुछ लोग देवता के साप्ताहिक दिन या पर्व पर करते हैं।
कृष्ण के 108 नामों में पहला और अंतिम नाम कौन-सा है?
सूची श्रीकृष्ण से आरंभ होती है और परात्पर पर पूरी होती है।