आमलकी एकादशी 2027 कब है?

2027 में आमलकी एकादशी गुरुवार, 18 मार्च को है। भोपाल में एकादशी तिथि 18 मार्च, 04:22 से 19 मार्च, 01:51 तक रहेगी। पारण 19 मार्च को 07:13 से 08:50 तक है।

आमलकी एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय भोपाल के लिए निकाला गया है।

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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

आमलकी एकादशी 2027: तारीख और तिथि का समय

गुरुवार, 18 मार्च 2027

तिथि
एकादशी, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
फाल्गुन
तिथि आरंभ
18 मार्च, 04:22
तिथि समाप्त
19 मार्च, 01:51
दिन का निर्णय
सूर्योदय
भोपाल में सूर्योदय
18 मार्च, 06:26

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: आमलकी एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

आमलकी एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त

आमलकी एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तभोपाल में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्त 12:04 से 12:52 शुभ
अमृत काल 21:25 से 22:54 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 04:51 से 05:38 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिभोपाल में समय
राहु काल 13:59 से 15:29
यमगण्ड काल 06:26 से 07:57
दुर्मुहूर्त (पहला) 10:28 से 11:16
दुर्मुहूर्त (दूसरा) 15:17 से 16:05
वर्ज्यम् 12:32 से 14:01

ऊपर का हर समय भोपाल के लिए गुरुवार, 18 मार्च 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

आमलकी एकादशी 2027 पारण का समय

शुक्रवार, 19 मार्च 2027, 07:13 से 08:50

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 19 मार्च, 07:13 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) प्रातःकाल के भीतर समाप्त होता है, इसलिए पारण उसके ख़त्म होने के बाद से प्रातःकाल के अंत तक है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

आमलकी एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख

इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
गुरुवार, 18 मार्च 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
गुरुवार, 18 मार्च 2027 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; गुरुवार, 18 मार्च 2027 का अरुणोदय (18 मार्च, 04:50) एकादशी में है, दशमी में नहीं।

ऊपर का हर दिन भोपाल के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।

आमलकी एकादशी व्रत कथा और महत्व

अन्य नाम: रंगभरी एकादशी।

आमलकी एकादशी फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी है, होली से कुछ दिन पहले। इसकी विधि आंवले के वृक्ष की पूजा है, जिसमें भगवान विष्णु का वास माना जाता है: लोग वृक्ष को जल देते हैं, उस पर सूत लपेटते हैं, नीचे दीप जलाते हैं और उसके पास रात्रि जागरण करते हैं। वाराणसी में यही दिन रंगभरी एकादशी है — माना जाता है कि विवाह के बाद भगवान शिव इसी दिन माता पार्वती को काशी लाए थे — और काशी विश्वनाथ में रंग से नगर की होली शुरू होती है।

आमलकी एकादशी की कथा

संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: ब्रह्मांड पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य।

वैदिश नगर में राजा चैत्ररथ के राज्य में हर नागरिक विष्णु भक्त था और हर एकादशी रखी जाती थी। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को राजा और प्रजा नदी किनारे के मंदिर में एकत्र हुए, वहाँ आंवले के वृक्ष की पूजा की और रात भर भजन में जागते रहे।

उस रात दिन भर के बिना शिकार भूखा एक बहेलिया भोजन की आशा में मंदिर आया। भोजन नहीं मिला — सब उपवास पर थे — तो वह भीड़ के किनारे बैठ गया और, कुछ और न सूझने पर, रात भर भगवान की कथाएँ और उस दिन का महत्व सुनता रहा। भोर में घर जाकर उसने भोजन किया।

समय पर बहेलिये की मृत्यु हुई, और उस एक रात के कारण — अनचाहे उपवास और संयोग से किए जागरण के कारण — वह जयंती नगर का राजा वसुरथ बनकर जन्मा। एक दिन वन में अकेले सोते समय शत्रुओं ने उसे घेर लिया। उनके शस्त्र उसे छू भी न सके, और उसके शरीर से एक तेजस्वी देवी प्रकट होकर उनका नाश कर गई।

आकाशवाणी ने बताया कि वह पिछले जन्म में रखी आमलकी एकादशी की शक्ति है। श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि जब अनजाने का व्रत भी ऐसी रक्षा करता है, तो जानकर रखे व्रत का पुण्य अपार है।

व्रत कैसे रखा जाता है

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
  • पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।

उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख

साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।

अगली एकादशी और उसका पारण · 2027 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ

आने वाले वर्षों में आमलकी एकादशी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति भोपाल के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026 बीत गई
2027 गुरुवार, 18 मार्च 2027 आने वाली
2028 मंगलवार, 7 मार्च 2028 आने वाली

पंचांगों में आमलकी एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग आमलकी एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: आमलकी एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

आमलकी एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में आमलकी एकादशी कब है?

2027 में आमलकी एकादशी गुरुवार, 18 मार्च को है। भोपाल में एकादशी तिथि 18 मार्च, 04:22 से 19 मार्च, 01:51 तक रहेगी। पारण 19 मार्च को 07:13 से 08:50 तक है।

आमलकी एकादशी की तिथि क्या है?

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि। भोपाल में यह तिथि 18 मार्च, 04:22 से 19 मार्च, 01:51 तक है, और आमलकी एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

आमलकी एकादशी का पारण कब करें?

शुक्रवार, 19 मार्च 2027 को 07:13 से 08:50 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) प्रातःकाल के भीतर समाप्त होता है, इसलिए पारण उसके ख़त्म होने के बाद से प्रातःकाल के अंत तक है।

दूसरे कैलेंडर में आमलकी एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल आमलकी एकादशी कब है?

2028 में मंगलवार, 7 मार्च।

आमलकी एकादशी क्यों रखी जाती है?

आमलकी एकादशी फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी है, होली से कुछ दिन पहले। इसकी विधि आंवले के वृक्ष की पूजा है, जिसमें भगवान विष्णु का वास माना जाता है: लोग वृक्ष को जल देते हैं, उस पर सूत लपेटते हैं, नीचे दीप जलाते हैं और उसके पास रात्रि जागरण करते हैं। वाराणसी में यही दिन रंगभरी एकादशी है — माना जाता है कि विवाह के बाद भगवान शिव इसी दिन माता पार्वती को काशी लाए थे — और काशी विश्वनाथ में रंग से नगर की होली शुरू होती है।

आमलकी एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?

कथा ब्रह्मांड पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

क्या स्मार्त और वैष्णव आमलकी एकादशी अलग दिन है?

नहीं, इस बार दोनों गुरुवार, 18 मार्च 2027 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।