आयुध पूजा 2026 कब है?

2026 में आयुध पूजा सोमवार, 19 अक्तूबर को है। श्रीनगर में नवमी तिथि 19 अक्तूबर, 10:52 से 20 अक्तूबर, 12:51 तक रहेगी।

आयुध पूजा कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय श्रीनगर के लिए निकाला गया है।

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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

आयुध पूजा 2026: तारीख और तिथि का समय

सोमवार, 19 अक्तूबर 2026

आयुध पूजा 2026: श्रीनगर में समय
समयश्रीनगरक्या है
नवमी तिथि आरंभ10:52महानवमी और आयुध पूजा की तिथि, नवमी, शुरू होती है।
नवमी तिथि समाप्त20 अक्तूबर, 12:51नवमी समाप्त होती है और दशमी — विजयादशमी — शुरू होती है।
तिथि
नवमी, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
आश्विन
तिथि आरंभ
19 अक्तूबर, 10:52
तिथि समाप्त
20 अक्तूबर, 12:51
दिन का निर्णय
अपराह्न
श्रीनगर में अपराह्न
19 अक्तूबर, 14:30

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: आयुध पूजा का निर्णय दोपहर बाद के भाग में चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके अपराह्न पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

आयुध पूजा क्या है?

आयुध पूजा — औज़ारों और अस्त्रों की पूजा — महानवमी को होती है, यानी शारदीय नवरात्रि के नौवें दिन, विजयादशमी से एक दिन पहले। औज़ार, अस्त्र, वाहन, मशीनें और वाद्य साफ़ करके हल्दी-कुमकुम से तिलक कर, माला पहनाकर पूजे जाते हैं और उस दिन उनसे काम नहीं लिया जाता: यह उन साधनों का सम्मान है जिनसे रोज़ी चलती है।

  • यह सबसे अधिक कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मनाई जाती है। कर्नाटक में यह मैसूरु दशहरे का हिस्सा है, जब महल में राजसी अस्त्रों की पूजा होती है; तमिलनाडु में इसी दिन सरस्वती पूजा भी होती है, जब किताबों और वाद्यों की पूजा की जाती है।
  • केरल में किताबें और औज़ार नवमी से पहले पूजा के लिए रख दिए जाते हैं (पूजा वैप्पु) और विजयादशमी को वापस लिए जाते हैं — उसी दिन बच्चों का अक्षरारंभ (विद्यारंभम) होता है।
  • वाहनों की पूजा सबसे ज़्यादा दिखती है: कार, बस, ऑटो-रिक्शा और ट्रक धोकर माला पहनाए जाते हैं, और कई जगह नज़र उतारने के लिए उनके सामने पेठा (सफ़ेद कुम्हड़ा) फोड़ा जाता है।
  • तारीख उसी नियम से तय होती है जिससे महानवमी: पहला दिन जिस दिन नवमी तिथि अपराह्न तक पहुँचे। ज़्यादातर घर बस दिन मानते हैं; नवमी तिथि के आरंभ और समाप्ति का समय ऊपर उन परिवारों के लिए दिया है जो तिथि के शुरू होने की प्रतीक्षा करते हैं।

आने वाले वर्षों में आयुध पूजा की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति श्रीनगर के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 सोमवार, 19 अक्तूबर 2026 आने वाली
2027 शुक्रवार, 8 अक्तूबर 2027 आने वाली
2028 मंगलवार, 26 सितंबर 2028 आने वाली

पंचांगों में आयुध पूजा की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग आयुध पूजा की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: आयुध पूजा का निर्णय अपराह्न से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

आयुध पूजा से जुड़े सामान्य प्रश्न

2026 में आयुध पूजा कब है?

2026 में आयुध पूजा सोमवार, 19 अक्तूबर को है। श्रीनगर में नवमी तिथि 19 अक्तूबर, 10:52 से 20 अक्तूबर, 12:51 तक रहेगी।

आयुध पूजा की तिथि क्या है?

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि। श्रीनगर में यह तिथि 19 अक्तूबर, 10:52 से 20 अक्तूबर, 12:51 तक है, और आयुध पूजा का दिन दोपहर बाद के भाग में चल रही तिथि से तय होता है।

दूसरे कैलेंडर में आयुध पूजा की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल आयुध पूजा कब है?

2027 में शुक्रवार, 8 अक्तूबर; 2028 में मंगलवार, 26 सितंबर।

क्या आयुध पूजा और महानवमी एक ही दिन हैं?

हाँ। 2026 में दोनों सोमवार, 19 अक्तूबर 2026 को हैं: आयुध पूजा महानवमी को होती है, जो शारदीय नवरात्रि का नौवाँ दिन है, और विजयादशमी अगले दिन, मंगलवार, 20 अक्तूबर 2026 को है।

श्रीनगर में आयुध पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

इसका अलग से कोई मुहूर्त नहीं है। आयुध पूजा दिन भर का पर्व है — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026 — और ज़्यादातर घर और कारख़ाने इसी दिन, कई सुबह ही, पूजा कर लेते हैं। जो इसे नवमी तिथि के भीतर करते हैं, उनके लिए श्रीनगर में तिथि 19 अक्तूबर, 10:52 से 20 अक्तूबर, 12:51 तक है।

आयुध पूजा कहाँ मनाई जाती है?

सबसे अधिक कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में। कर्नाटक में यह मैसूरु दशहरे का हिस्सा है, जब महल में राजसी अस्त्रों की पूजा होती है; तमिलनाडु में यह इसी दिन सरस्वती पूजा के साथ मनाई जाती है। बाकी भारत में यह दिन महानवमी के रूप में मनाया जाता है।