जनवरी 2026 में भूमि पूजन मुहूर्त

जनवरी 2026 में कोई भूमि पूजन मुहूर्त नहीं है। शुक्र 26 नवंबर 2025 से 17 फ़रवरी 2026 तक अस्त है और सूर्य 16 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक धनु राशि में है।

  • जयपुर के लिए सूर्य, चंद्रमा, गुरु और शुक्र की स्थिति से गणना — किसी छपी सूची से नकल नहीं।
  • हर मुहूर्त के साथ वह नक्षत्र, तिथि और वार दिया है जिन पर वह शुद्ध निकला, और हर वर्जित सौर मास और अस्त का आरंभ और अंत भी।

जनवरी 2026 भूमि पूजन मुहूर्त की तारीखें और समय

शुक्र 26 नवंबर 2025 से 17 फ़रवरी 2026 तक अस्त है और सूर्य 16 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक धनु राशि में है।

गुरु-शुक्र अस्त के कारण छोड़े गए दिन

ये दिन बाकी हर नियम पर शुद्ध हैं, पर गुरु या शुक्र अपनी अंश-सीमा में अस्त है। जो पंचांग अस्त केवल तब मानते हैं जब ग्रह दिखना बंद हो जाए, वे इनमें से कुछ दिन सूची में देते हैं।

तारीखग्रहसूर्य से दूरीमुहूर्त
बुधवार, 21 जनवरी 2026शुक्र3.4° (सीमा 10°)07:16 – 02:47 (22 जनवरी)
शुक्रवार, 23 जनवरी 2026शुक्र3.9° (सीमा 10°)14:33 – 07:15 (24 जनवरी)
शनिवार, 24 जनवरी 2026शुक्र4.2° (सीमा 10°)07:15 – 07:15 (25 जनवरी)
बुधवार, 28 जनवरी 2026शुक्र5.1° (सीमा 10°)09:27 – 07:13 (29 जनवरी)
गुरुवार, 29 जनवरी 2026शुक्र5.4° (सीमा 10°)07:13 – 05:29 (30 जनवरी)
शनिवार, 31 जनवरी 2026शुक्र5.8° (सीमा 10°)05:53 – 07:12 (1 फ़रवरी)

जनवरी 2026 में वर्जित अवधि

  • शुक्र 26 नवंबर 2025 से 17 फ़रवरी 2026 तक अस्त है
  • सूर्य 16 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक धनु राशि में है

भूमि पूजन मुहूर्त के नियम

  • ये नियम कहाँ से: मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण के गृहारंभ (निर्माण की शुरुआत) नियम। कोई बड़ा पंचांग भूमि पूजन की गणना-आधारित सूची नहीं छापता, और जो सूचियाँ चलती हैं वे आपस में मेल नहीं खातीं, इसलिए नियम यहाँ पूरे लिखे हैं।
  • सूर्य की राशि: जब तक सूर्य चार द्विस्वभाव राशियों — मिथुन, कन्या, धनु और मीन — में से किसी में हो, तब तक नहीं (धनु 16 दिसंबर 2025 – 14 जनवरी 2026, मीन 15 मार्च 2026 – 14 अप्रैल 2026, मिथुन 15 जून 2026 – 16 जुलाई 2026, कन्या 17 सितंबर 2026 – 17 अक्तूबर 2026 और धनु 16 दिसंबर 2026 – 14 जनवरी 2027)। धनु और मीन ही खरमास हैं।
  • वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार या शनिवार (वैदिक वार, जो सूर्योदय से बदलता है)। मंगलवार या रविवार कभी नहीं।
  • नक्षत्र: चंद्रमा इन 13 में से किसी में हो — रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तर भाद्रपदा और रेवती।
  • तिथि: किसी भी पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, और पूर्णिमा। प्रतिपदा, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी या अमावस्या नहीं।
  • गुरु और शुक्र उदित हों: जब तक गुरु सूर्य से 11° के भीतर हो या शुक्र 10° के भीतर (वक्री हो तो 8°), वह ग्रह अस्त है और कोई मुहूर्त नहीं।
  • अधिक मास वर्जित: अधिक ज्येष्ठ (अधिक मास) 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक है।
  • चातुर्मास: यहाँ नियम नहीं है। सौर मास का नियम कर्क और सिंह के सूर्य वाले महीने खुले रखता है, इसलिए बरसात में भी तारीखें हैं; जो परिवार निर्माण के लिए चातुर्मास टालते हैं वे इन्हें छोड़ दें।
  • दिन: सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक, जयपुर के अनुसार। जिस दिन को कोई वर्जित अवधि ज़रा भी छूती है, वह पूरा दिन छोड़ दिया जाता है; बाकी दिनों में मुहूर्त वह समय है जब ऊपर की सारी शर्तें एक साथ पूरी हों, और कम से कम 20 मिनट चले।
  • जो यहाँ नहीं जाँचा गया: भूखंड स्वयं — पहली खुदाई कहाँ हो, जो सूर्य की राशि से तय होती है — लग्न (स्थिर लग्न उत्तम) और स्वामी की अपनी कुंडली। ये पंडित या वास्तु सलाहकार मौके पर तय करते हैं।

भूमि पूजन मुहूर्त 2026 — पूरे नियम और साल भर की सूची

महीनेवार भूमि पूजन मुहूर्त 2026

दूसरे शहर का मुहूर्त

दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक गिना जाता है, और भारत में सूर्योदय एक घंटे से भी अधिक अंतर रखता है — इसलिए भोर के पास का मुहूर्त दूसरे शहर में अलग तारीख का हो सकता है, और हर समय बदल जाता है।

ये लिंक आपके चुने शहर के लिए सूची फिर से निकालते हैं। ये इसी पेज के रूप हैं: हर एक ऊपर के पते पर canonical रखता है और खोज इंजनों से इसे अनुक्रमित न करने को कहता है।

सामान्य प्रश्न

क्या जनवरी 2026 में भूमि पूजन मुहूर्त है?

नहीं। शुक्र 26 नवंबर 2025 से 17 फ़रवरी 2026 तक अस्त है और सूर्य 16 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक धनु राशि में है।

जनवरी 2026 के बाद अगला भूमि पूजन मुहूर्त कब है?

बुधवार, 18 फ़रवरी 2026 को।

कुछ पंचांग जनवरी 2026 में और तारीखें क्यों दिखाते हैं?

21, 23, 24, 28, 29 और 31 जनवरी बाकी सब नियमों पर शुद्ध हैं, पर उस समय शुक्र अपनी अंश-सीमा में अस्त है। जो पंचांग अस्त को ग्रह के दिखना बंद होने से गिनते हैं, वे इनमें से कुछ दिन दे सकते हैं।